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बस्तर बेटा के आह्वान पर बस्तर आयुक्त से प्रतिनिधिमंडल ने की मुलाकात

 

 

पुनर्वास पहले विस्थापन बाद में टेलिंग डैम प्रभावितों को न्याय दिलाने की रखी मांग

 

 

जगदलपुर, 10 जून 2026/

बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा के मुख्य संयोजक एवं जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के बस्तर संभाग अध्यक्ष नवनीत चाँद के आव्हान पर बस्तर एवं सुकमा जिला इकाई के पदाधिकारियों ने आज बस्तर संभाग आयुक्त से मुलाकात कर दंतेवाड़ा जिले के बचेली स्थित टेलिंग डैम-1 प्रभावित परिवारों के पक्ष में विस्तृत ज्ञापन सौंपा तथा अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) बचेली द्वारा जारी बेदखली आदेश पर तत्काल स्थगन की मांग की।

 

प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि प्रभावित परिवार जन-सुरक्षा के विरोधी नहीं हैं, लेकिन सुरक्षा के नाम पर केवल गरीब, आदिवासी एवं कमजोर वर्ग के लोगों को हटाना और दूसरी ओर दशकों से संचालित टेलिंग डैम की वास्तविक स्थिति, उसकी सुरक्षा, रखरखाव तथा संचालन के लिए जिम्मेदार संस्थाओं की जवाबदेही पर मौन रहना गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

 

ज्ञापन में कहा गया है कि दिनांक 04 जून 2026 को जारी आदेश में संभावित खतरे एवं जनहानि की आशंका का उल्लेख तो किया गया है, किंतु यह स्पष्ट नहीं किया गया कि यदि टेलिंग डैम वास्तव में संवेदनशील एवं जोखिमयुक्त स्थिति में था तो पिछले चार दशकों में उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसकी थी, सुरक्षा ऑडिट क्यों नहीं सार्वजनिक किए गए, और प्रभावित परिवारों को इतने वर्षों तक वहां रहने की अनुमति किन परिस्थितियों में दी गई।

 

प्रतिनिधिमंडल का मत है कि आदेश का पूरा प्रभाव केवल प्रभावित परिवारों पर दिखाई देता है, जबकि टेलिंग डैम के निर्माण, संचालन, निगरानी एवं सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े संस्थानों विशेषकर एनएमडीसी की जवाबदेही पर अपेक्षित स्पष्टता दिखाई नहीं देती। इससे आम जनता के बीच यह धारणा बन रही है कि कहीं न कहीं वास्तविक जिम्मेदार पक्षों को जवाबदेही से बचाने का प्रयास किया जा रहा है। ऐसे में न्याय की निष्पक्षता एवं प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों की रक्षा के लिए आदेश पर तत्काल स्थगन आवश्यक है।

 

प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि किसी भी प्रकार की बेदखली अथवा विस्थापन कार्यवाही से पूर्व प्रभावित परिवारों को भूमि सहित स्थायी पुनर्वास, आवास, पेयजल, बिजली, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं आजीविका की समुचित व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए।

 

ज्ञापन में यह भी मांग की गई कि संपूर्ण प्रकरण की जांच हेतु उच्च स्तरीय तकनीकी एवं न्यायिक समिति गठित की जाए, जिसमें एनएमडीसी, जिला प्रशासन, भूवैज्ञानिक विशेषज्ञ, आपदा प्रबंधन विशेषज्ञ, जल संसाधन विभाग, पर्यावरण विशेषज्ञ तथा अन्य संबंधित विभागों को शामिल किया जाए। समिति द्वारा टेलिंग डैम की वर्तमान स्थिति, सुरक्षा मानकों, संभावित खतरे एवं जिम्मेदार पक्षों की भूमिका पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।

 

प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि एनएमडीसी की सुरक्षा ऑडिट रिपोर्ट, जोखिम मूल्यांकन रिपोर्ट, आपदा प्रबंधन योजना, संरचनात्मक स्थिरता रिपोर्ट एवं टेलिंग डैम से संबंधित अन्य तकनीकी दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं ताकि जनता को वास्तविक स्थिति की जानकारी मिल सके।

 

साथ ही यह भी मांग की गई कि यदि टेलिंग डैम नगर क्षेत्र एवं आबादी के लिए दीर्घकालीन खतरा उत्पन्न कर रहा है तो उसे नगर पालिका क्षेत्र से बाहर स्थानांतरित करने की व्यवहार्यता पर विचार कर दीर्घकालीन सुरक्षा योजना बनाई जाए।

 

प्रतिनिधिमंडल ने यह भी कहा कि यदि प्रशासन अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करना चाहता है तो टेलिंग डैम प्रभावित परिवारों के साथ-साथ वन भूमि एवं शासकीय भूमि पर संचालित अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, परिवहन कार्यालयों एवं प्रभावशाली व्यक्तियों के कब्जों की भी निष्पक्ष जांच कर समान रूप से कार्रवाई की जानी चाहिए। कानून केवल गरीबों के लिए नहीं बल्कि सभी के लिए समान होना चाहिए।

 

इस अवसर पर बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा के मुख्य संयोजक एवं जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के बस्तर संभाग अध्यक्ष नवनीत चाँद ने कहा—

 

“हम जन-सुरक्षा के पक्षधर हैं, लेकिन सुरक्षा के नाम पर गरीबों को उजाड़कर और वास्तविक जिम्मेदार संस्थाओं को जवाबदेही से मुक्त कर देना न्याय नहीं कहलाएगा। यदि टेलिंग डैम खतरा है तो पहले यह तय होना चाहिए कि इस स्थिति के लिए जिम्मेदार कौन है। प्रभावित परिवारों को बलि का बकरा बनाकर समस्या का समाधान नहीं किया जा सकता।”

 

जगदलपुर विधानसभा अध्यक्ष मेहताब सिंह ने कहा—

 

“संविधान का अनुच्छेद 21 प्रत्येक नागरिक को गरिमामय जीवन का अधिकार देता है। बिना स्थायी पुनर्वास के विस्थापन सामाजिक न्याय की भावना के विपरीत है।”

 

सुकमा जिला अध्यक्ष पी. प्रसाद राजू ने कहा—

 

“यदि प्रशासन को वास्तव में जनहित की चिंता है तो उसे पहले एनएमडीसी की जवाबदेही तय करनी चाहिए। केवल प्रभावित परिवारों को हटाने से समस्या समाप्त नहीं होगी।”

 

संभागीय सचिव सुब्बाराव, बस्तर ब्लॉक अध्यक्ष वनमाली नाग, जिला महासचिव संतु कश्यप, शहर महामंत्री निहारिका सिंह, यूथ जिला अध्यक्ष हिमांशु आनंद तथा जिला प्रवक्ता अलका नादान ने संयुक्त बयान में कहा कि—

 

“बस्तर की जनता न्याय चाहती है, अन्यायपूर्ण विस्थापन नहीं। पुनर्वास, जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित किए बिना किसी भी प्रकार की बेदखली स्वीकार नहीं की जाएगी।”

 

प्रतिनिधिमंडल ने आयुक्त महोदय से मांग की कि बेदखली आदेश पर तत्काल स्थगन प्रदान कर निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा “पुनर्वास पहले, विस्थापन बाद में” के सिद्धांत के अनुरूप प्रभावित परिवारों के सम्मानजनक एवं स्थायी पुनर्वास की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

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