क्या पेट्रोल में बढ़ेगी इथेनॉल की मात्रा? सरकार ने संसद में साफ किया रुख

केंद्र सरकार ने सोमवार को राज्यसभा में कहा कि पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य देश की खाद्य सुरक्षा या जल संसाधनों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं डाल रहा है। सरकार ने कहा कि यह पूरी पहल वेस्ट-टू-वेल्थ यानी अपशिष्ट से संपदा बनाने के सिद्धांत पर आधारित है।

 

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने राज्यसभा में कहा कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस), राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए), अन्य कल्याणकारी योजनाओं और निर्धारित बफर स्टॉक के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। इन सभी जरूरतों को पूरा करने के बाद ही अतिरिक्त कृषि उपज को इथेनॉल उत्पादन के लिए अनुमति दी जाती है।

पेट्रोल में 20% से ज्यादा इथेनॉल मिश्रण बढ़ाने पर क्या बोली सरकार?

केंद्र सरकार ने सोमवार को राज्यसभा में स्पष्ट किया कि फिलहाल पेट्रोल में 20 प्रतिशत से अधिक इथेनॉल मिश्रण बढ़ाने का कोई फैसला नहीं लिया गया है। सुरेश गोपी ने लिखित जवाब में कहा कि इथेनॉल मिश्रण का प्रतिशत 20 प्रतिशत से आगे बढ़ाने पर कोई भी निर्णय विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन और सभी संबंधित पक्षों से चर्चा के बाद ही लिया जाएगा।

 

उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में ऑटोमोबाइल निर्माता कंपनियां, तेल विपणन कंपनियां और शोध संस्थानों सहित सभी प्रमुख हितधारकों से विचार-विमर्श किया जाएगा। सुरेश गोपी ने बताया कि भारत ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य तय समय से पांच वर्ष पहले ही हासिल कर लिया है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2013-14 में औसत इथेनॉल मिश्रण करीब 1.53 प्रतिशत था, जो दो दशक से अधिक समय तक चरणबद्ध तरीके से लागू किए गए कार्यक्रम के बाद वर्ष 2025-26 के एथेनॉल आपूर्ति वर्ष में बढ़कर 20 प्रतिशत तक पहुंच गया है।

 

खाद्य सुरक्षा और जल संकट पर क्या बोली सरकार?

सुरेश गोपी ने कहा, “20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण के लक्ष्य का खाद्यान्न की उपलब्धता या भारत की खाद्य सुरक्षा पर कोई असर नहीं पड़ा है।” उन्होंने बताया कि सरकार “एमएसपी के तहत खुली खरीद प्रणाली” अपनाती है, जिसमें पीडीएस, एनएफएसए, अन्य कल्याणकारी योजनाओं और निर्धारित बफर स्टॉक के लिए खरीद को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है।

 

जल संकट को लेकर उठ रहे सवालों पर मंत्री ने कहा कि इथेनॉल उत्पादन के लिए इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल में बड़ा बदलाव किया गया है। उन्होंने बताया कि सरकार ने गन्ने की तुलना में कम पानी की जरूरत वाली मक्का की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ाई है। इथेनॉल सप्लाई वर्ष 2021-22 में जहां मक्का की हिस्सेदारी शून्य थी, वहीं 2025-26 में यह बढ़कर लगभग 37 प्रतिशत हो गई है।

 

केंद्र सरकार ने राज्यसभा में क्या-क्या बताया?

लिखित जवाब में कहा गया, “खाद्य सुरक्षा की सभी जरूरतों और निर्धारित बफर स्टॉक को पूरा करने के बाद खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग द्वारा अतिरिक्त घोषित किए गए खाद्यान्न को ही इथेनॉल उत्पादन के लिए अनुमति दी जाती है।” सरकार ने कहा कि यह कार्यक्रम “वेस्ट-टू-वेल्थ” दृष्टिकोण पर आधारित है। इसके तहत अतिरिक्त कृषि उपज, क्षतिग्रस्त खाद्यान्न, टूटे हुए चावल और मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त अनाज का उपयोग किया जाता है। साथ ही कृषि अवशेषों से दूसरी पीढ़ी (2जी) के इथेनॉल उत्पादन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

 

सरकार ने बताया कि वर्ष 2024 में कृषि विशेषज्ञ समिति ने इथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल होने वाली फसलों की जल आवश्यकता की समीक्षा की थी। इसके अलावा प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत सूक्ष्म सिंचाई को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। केंद्र सरकार ने कहा कि इथेनॉल कार्यक्रम का खुदरा खाद्य महंगाई पर भी कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ा है।

 

लिखित जवाब में कहा गया, “इथेनॉल उत्पादन के लिए केवल अतिरिक्त चीनी का ही उपयोग किया जा रहा है।” इसके कारण वर्ष 2024-25 की तुलना में खुदरा चीनी की कीमतों में वार्षिक वृद्धि लगभग 2.5 प्रतिशत रही है। सरकार ने यह भी कहा कि भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के अतिरिक्त चावल के उपयोग से भी खुदरा खाद्य महंगाई पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है, क्योंकि यह तभी किया जाता है जब खाद्य सुरक्षा और बफर स्टॉक की जरूरतें पूरी हो जाती हैं।

 

पर्यावरण संरक्षण के संबंध में सरकार ने कहा कि इथेनॉल संयंत्रों को सख्त पर्यावरणीय मानकों का पालन करना होता है। सरकार के अनुसार, शीरा और अनाज आधारित डिस्टिलरी में जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (जेडएलडी) व्यवस्था लागू है। इसके तहत प्रक्रिया में इस्तेमाल किए गए पानी का पुनर्चक्रण और दोबारा उपयोग किया जाता है, जिससे कोई तरल अपशिष्ट पर्यावरण में नहीं छोड़ा जाता।

सरकार ने बताया कि आधुनिक इथेनॉल संयंत्रों में एक लीटर इथेनॉल बनाने के लिए केवल तीन से पांच लीटर प्रसंस्कृत पानी की आवश्यकता होती है। उत्पादन में क्षतिग्रस्त अनाज, टूटे हुए चावल और कृषि अवशेषों का भी व्यापक उपयोग किया जाता है। जल उपयोग को लेकर सरकार ने कहा कि उसने इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ईबीपी) कार्यक्रम में “संतुलित दृष्टिकोण” अपनाया है, जिससे जल संरक्षण, खाद्य सुरक्षा और किसानों के हित सर्वोच्च प्राथमिकता बने रहें।

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