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आस्था क्षेत्र में जनसुरक्षा से समझौता नहीं, सार्वजनिक संसाधनों का पूरा हिसाब दे प्रशासन : नवनीत चाँद

 

 

मीना बाजार का स्थल परिवर्तन, 2025 के स्वदेशी मेले की निष्पक्ष जांच और 2026 की अनुमति से पहले सभी वैधानिक मापदंडों की समीक्षा की मांग

 

जगदलपुर। बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा के मुख्य संयोजक एवं जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के बस्तर संभाग अध्यक्ष नवनीत चाँद के नेतृत्व में संगठन के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), जगदलपुर के माध्यम से कलेक्टर जिला बस्तर, पुलिस अधीक्षक जिला बस्तर, नगर निगम आयुक्त जगदलपुर एवं बस्तर संभाग आयुक्त के नाम ज्ञापन सौंपकर बस्तर दशहरा के दौरान प्रस्तावित मीना बाजार तथा वर्ष 2025 में आयोजित स्वदेशी मेले से जुड़े विभिन्न बिंदुओं की निष्पक्ष जांच, पारदर्शी समीक्षा एवं आवश्यक कार्रवाई की मांग की।

 

आस्था क्षेत्र में भीड़ बढ़ाना जनसुरक्षा के लिए चुनौती

 

नवनीत चाँद ने कहा कि बस्तर दशहरा के दौरान माँ दंतेश्वरी मंदिर एवं राजमहल परिसर में पहले से ही श्रद्धालुओं और आम नागरिकों की भारी आवाजाही रहती है। ऐसे संवेदनशील एवं सीमित आवागमन वाले क्षेत्र में अतिरिक्त व्यावसायिक आयोजन से यातायात, पार्किंग, पैदल आवागमन तथा आपातकालीन निकासी पर दबाव बढ़ सकता है।

 

उन्होंने मांग की कि मीना बाजार को लालबाग अथवा किसी अन्य बड़े, खुले एवं सुरक्षित मैदान में स्थानांतरित किया जाए। यदि वर्तमान स्थल पर आयोजन की अनुमति पर विचार किया जाता है तो उससे पहले अग्निशमन, पुलिस, यातायात, चिकित्सा, विद्युत सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण एवं आपातकालीन निकासी सहित सभी आवश्यक विभागों की संयुक्त तकनीकी जांच कराकर सुरक्षा मानकों की पूर्ति सुनिश्चित की जाए।

 

2025 के स्वदेशी मेले का पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक हो

 

संगठन ने वर्ष 2025 में आयोजित स्वदेशी मेले को लेकर भी पारदर्शिता की मांग की है। यदि आयोजन में NMDC Sponsorship/CSR, लालबाग मैदान, सरकारी कर्मचारी, बिजली, पानी, सफाई, वाहन अथवा अन्य सार्वजनिक संसाधनों का उपयोग हुआ है, तो उसकी अनुमति, वित्तीय प्रक्रिया, राशि, खर्च, स्टॉल से प्राप्त राजस्व, मैदान शुल्क तथा संबंधित विभागों की वैधानिक अनुमतियों एवं सुरक्षा प्रमाणपत्रों का रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाए।

 

नवनीत चाँद ने कहा कि यदि किसी सार्वजनिक क्षेत्र की संस्था की CSR राशि का उपयोग हुआ है तो उसकी वैधानिक प्रक्रिया, पात्रता और बस्तर की स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप वास्तविक जनहित परिणाम भी स्पष्ट होने चाहिए।

 

2026 की अनुमति से पहले 2025 की समीक्षा जरूरी

 

उन्होंने कहा कि वर्ष 2026 के आयोजन की अनुमति देने से पहले वर्ष 2025 के आयोजन से संबंधित अनुमति, वित्तीय लेनदेन, Sponsorship/CSR, स्टॉल राजस्व, मैदान उपयोग, सुरक्षा व्यवस्था, आवश्यक अनापत्तियां एवं सरकारी संसाधनों के उपयोग की प्रशासनिक एवं तकनीकी समीक्षा की जानी चाहिए।

 

उन्होंने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 14 समानता और गैर-मनमानी के सिद्धांत की मांग करता है। इसलिए सार्वजनिक मैदान और संसाधनों के उपयोग में नियम सभी आयोजकों के लिए समान होने चाहिए तथा निर्णय पारदर्शी प्रक्रिया के आधार पर लिए जाने चाहिए।

 

“जनता को आश्वासन नहीं, दस्तावेज और जवाब चाहिए”

 

नवनीत चाँद ने कहा—

 

“हम किसी आयोजन या व्यापार के विरोध में नहीं हैं। हमारी आपत्ति अव्यवस्था, संभावित सुरक्षा जोखिम और अपारदर्शिता के खिलाफ है। बस्तर की आस्था सुरक्षित रहनी चाहिए, शहर की जनता का आवागमन सुरक्षित रहना चाहिए और सार्वजनिक धन एवं संपत्ति का उपयोग जनता के हित और पारदर्शी नियमों के तहत होना चाहिए। प्रशासन दुर्घटना के बाद कार्रवाई करने के बजाय दुर्घटना से पहले रोकथाम की नीति अपनाए।”

 

उन्होंने प्रशासन से मांग की कि नागरिकों की आपत्तियों एवं उपलब्ध दस्तावेजों पर समयबद्ध लिखित निर्णय लिया जाए तथा जनसुरक्षा और सार्वजनिक संसाधनों की जवाबदेही को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।

 

इस अवसर पर बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा एवं जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के बस्तर जिले के प्रमुख पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

 

 

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