योजना का लाभ या खानापूर्ति पंचायतों में पहुंचे टैंकरों पर सवाल

गांवों की प्यास बुझाने खरीदे
टैंकरों में कथित तकनीकी खामी
चक्के के पास पट्टे को पर्याप्त सपोर्ट नहीं
हरिमोहन तिवारी
रायपुर गांवों में पानी की जरूरत पूरी करने के लिए सरकारी योजनाओं के तहत ग्राम पंचायतों को उपलब्ध कराए गए पानी टैंकरों की गुणवत्ता अब सवालों के घेरे में है। पिथौरा विकासखंड में वर्ष 2025 और 2026 के दौरान पंचायतों को दिए गए टैंकरों को लेकर कथित तौर पर तकनीकी खामी और नियमों की अनदेखी के आरोप सामने आए हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब टैंकर ग्रामीणों के उपयोग के लिए तैयार किए गए थे, तो उनकी गुणवत्ता और सुरक्षा की जांच आपूर्ति से पहले क्यों नहीं हुई
चक्के के पास सपोर्ट नहीं होने की शिकायत
जमीनी स्तर पर सामने आई शिकायत में कहा गया है कि टैंकर के चक्के के पास लगे पट्टे को पर्याप्त सपोर्ट नहीं दिया गया है।
पानी से भरे टैंकर को सड़क पर चलाने के दौरान इस हिस्से पर दबाव बढ़ता है।
ऐसे में यह डिजाइन और सुरक्षा मानकों के अनुरूप है या नहीं, इसका तकनीकी परीक्षण जरूरी है।
यदि जांच में खामी मिलती है तो यह भी जांच का विषय होगा कि टैंकर तैयार होने के बाद किस स्तर पर उसका निरीक्षण हुआ और किस अधिकारी ने उसे उपयोग के लिए उपयुक्त माना
सरकारी सुविधा में गुणवत्ता का सवाल
सरकार की योजनाओं का उद्देश्य ग्रामीणों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराना है। पानी टैंकर जैसी सामग्री सीधे ग्रामीण जरूरतों से जुड़ी है। ऐसे में यदि टैंकरों में कथित तौर पर निर्माण संबंधी कमी है तो इसका असर योजना की उपयोगिता पर पड़ेगा।
कथित आरोप यह भी है कि टैंकर की बॉडी, चेसिस, निर्माण सामग्री और तकनीकी मानकों की पर्याप्त जांच के बिना ही पंचायतों को आपूर्ति कर दी गई।
हालांकि इन आरोपों की पुष्टि तकनीकी जांच और संबंधित रिकॉर्ड से ही हो सकेगी।
खरीदी में भंडार क्रय नियमों का पालन हुआ
गुणवत्ता के साथ खरीदी प्रक्रिया पर भी सवाल हैं।
क्या टैंकर खरीदने से पहले नियमानुसार कोटेशन या निविदा प्रक्रिया अपनाई गई? क्या प्राप्त दरों की तुलना की गई तकनीकी स्पेसिफिकेशन किसने तय की आपूर्ति के बाद टैंकरों का भौतिक सत्यापन किस अधिकारी ने किया
यदि प्रक्रिया पूरी हुई है तो संबंधित दस्तावेजों से इसकी पुष्टि हो सकती है।
भुगतान से पहले किसने किया सत्यापन
जांच का अहम बिंदु यह भी है कि टैंकरों की आपूर्ति के बाद भुगतान से पहले गुणवत्ता और भौतिक सत्यापन की प्रक्रिया क्या रही
यदि तकनीकी परीक्षण हुआ था तो उसकी रिपोर्ट क्या कहती है? किस अधिकारी ने टैंकरों को निर्धारित मानकों के अनुरूप पाया
जांच के बाद होगी कार्रवाई
जनपद पंचायत पिथौरा के सीईओ सनत महादेवा ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में पानी टैंकरों का वितरण किया गया है।
टैंकर गुणवत्ता-विहीन हैं या नहीं, इसकी जानकारी फिलहाल उन्हें नहीं है। उन्होंने बताया कि उन्होंने अगस्त में कार्यभार संभाला है और यह जानकारी उन्हें मीडिया के माध्यम से मिली है।
मामले की जांच कराई जाएगी। जांच में अनियमितता या किसी की जिम्मेदारी सामने आने पर संबंधित के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
जांच हुई तो कई सवालों के जवाब मिलेंगे
मामले की निष्पक्ष जांच के लिए पंचायतों में उपलब्ध टैंकरों का मौके पर तकनीकी निरीक्षण जरूरी है। बॉडी, चेसिस, पट्टे, पहियों के सपोर्ट, क्षमता और निर्माण सामग्री की जांच के साथ खरीदी से संबंधित स्वीकृति आदेश और गुणवत्ता परीक्षण रिपोर्ट की भी पड़ताल होनी चाहिए।
सरकारी योजना से खरीदी गई सामग्री की गुणवत्ता सिर्फ कागजों में नहीं, मौके पर भी दिखाई देनी चाहिए
अब सवाल यही है कि प्रशासन शिकायतों को कितनी गंभीरता से लेता है और तकनीकी जांच में टैंकरों की वास्तविक स्थिति क्या सामने आती है।



