स्वास्थ्य मंत्री ने NHM कर्मचारियों को आज शाम तक काम पर लौटने की दी चेतावनी, वरना होगी नई भर्ती

रायपुर छत्तीसगढ से मेघा तिवारी
छत्तीसगढ़ में एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल आज अपने 33वें दिन में प्रवेश कर चुकी है, जो कि राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं पर गहरा प्रभाव डाल रही है। इस क्रम में, राज्य के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की, जिसमें उन्होंने सभी संबंधित पक्षों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। मंत्री ने स्पष्ट किया कि हड़ताल समाप्त करने के संबंध में एक सहमति की दिशा में प्रगति हुई है, जो कि सभी के लिए सकारात्मक संकेत है। उनके अनुसार, कर्मचारियों द्वारा उठाई गई 10 प्रमुख मांगों में से 4 मांगों को स्वीकार कर लिया गया है, जबकि 3 मांगों को लेकर एक समिति का गठन किया गया है, जो इन विशेष मुद्दों पर गहन विचार करेगी। साथ ही, शेष 3 मांगों पर उच्च स्तरीय स्तर पर विचार करने का आश्वासन भी दिया गया है। इस प्रकार, स्वास्थ्य मंत्री के द्वारा दी गई जानकारी से यह संकेत मिलता है कि समस्या को सुलझाने के लिए प्रयास जारी हैं और अंततः हड़ताल समाप्त होने की संभावना बढ़ती जा रही है।
मंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि हड़ताल समाप्त करने का निर्णय लिया जाता है, तो इस संदर्भ में यह सुनिश्चित किया जाएगा कि जिन कर्मचारियों की सेवा को समाप्त किया गया है, उनके खिलाफ कोई नकारात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। उन्होंने सभी संबंधित कर्मचारियों से अपील की कि वे आज शाम तक अपने कार्यस्थल पर लौट आएं, ताकि सामान्य कार्य संचालन को फिर से शुरू किया जा सके। यदि ऐसा नहीं किया जाता है, तो सरकार को नई भर्ती की प्रक्रिया शुरू करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
यह महत्वपूर्ण है कि इस बात को ध्यान में रखा जाए कि छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत काम करने वाले एनएचएम कर्मचारी 18 अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। उनकी हड़ताल तात्कालिक और गंभीर मुद्दों पर आधारित है, जिसमें 10 सूत्रीय मांगें शामिल हैं। इन मांगों में मुख्य रूप से संविलियन और स्थायीकरण की आवश्यकता, पब्लिक हेल्थ कैडर की स्थापना, ग्रेड पे का उचित निर्धारण, लंबित 27% वेतन वृद्धि की प्राप्ति, सीआर सिस्टम में पारदर्शिता सुनिश्चित करना, नियमित भर्ती में सीटों का आरक्षण लागू करना, अनुकंपा नियुक्तियों का उचित प्रावधान, चिकित्सा और अन्य छुट्टियों की सुविधाएं उपलब्ध कराना, ट्रांसफर पॉलिसी का निर्माण करना, और न्यूनतम 10 लाख रुपये तक का कैशलेस मेडिकल इंश्योरेंस प्रदान करना शामिल हैं। ये सभी मांगें न केवल कर्मचारियों के हित में हैं, बल्कि स्वास्थ्य प्रणाली की मजबूती और दक्षता के लिए भी अत्यंत आवश्यक हैं।



