संतान की लंबी उम्र को लेकर माताएं रखी हलषष्ठी व्रत..विधीवत पूजा अर्चना कर दीर्घायु की कामना

हरिमोहन तिवारी /रायपुर छ
त्तीसगढ़ में संतान की दीर्घायु को लेकर रखा जाने वाला पर्व हलषष्ठी (कमरछठ) मनाया गया
पर्व को लेकर राजधानी सहित पुरे राज्य की महिलाओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला
शहर के चौक-चौराहों में पसहर चावल की बिक्री हो रही थी पिछले साल की तुलना में इसमें 15 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है।
संतानों की दीर्घायु की कामना को लेकर माताएं कमरछठ पर्व पर कठिन व्रत रखकर पूजा-अर्चना करती हैं।
वही महासमुंद जिले के वनांचल क्षेत्र सरायपाली ब्लाक की ग्राम पैकिन की महिलाओं में काफी उत्साह देखने को मिला है
व्रत को लेकर माताएं सुबह से ही पूजा अर्चना की सामग्री एकत्रीत करने के साथ दिन भर इस व्रत की उपवास को लेकर महिलाये पूजन कार्य में लगी रही
तिवारी मोहल्ले की रवीन्द्र के निजी निवास के आंगन में पूजा करने के स्थान पर सगरी खोदकर भगवान शंकर एवं गौरी, गणेश को पसहर चावल, भैंस का दूध, दही, घी, बेल पत्ती, कांशी, खमार, बांटी, भौरा सहित अन्य सामग्रियां अर्पित कर संतान की दीर्घायु की कामना की
पूजन पश्चात माताएं घर पर बिना हल के सहारे उत्पादित अनाज पसहर चावल, छह प्रकार की भाजी को पकाकर प्रसाद के रूप में वितरण कर अपना उपवास तोड़कर घर की बुजूर्गो से आर्शीवाद लिया
हलषष्ठी पूजन
भादो माह के षष्ठी तिथि को हलषष्ठी मनाई जाती है।
इस साल हलषष्ठी व्रत 24 अगस्त को दोपहर 12:30 बजे से शुरू होगा और 25 अगस्त को सुबह 10:11 बजे तक रहेगा।
कमरछठ पर्व को महिलाएं पूरे उत्साह के साथ मना रही है।
*बिना जोते खेतों में पैदा होता है पसहर चावल*
इस पर्व पर उपवास तोडकर खास अन्न पसहर (फसही) चावल का सेवन करते है
यह चावल सप्ताहभर पहले बाजार में पहुंच गया है।
शहर के अलग-अलग स्थानों और दुकानों में यह चावल बिक रहा है।
इस चावल की खास बात यह है कि यह बिना हल के ही खेतों में पैदा होता है।
चावल खाकर व्रत तोड़ने की मान्यता
हलषष्ठी के पर्व पर इस चावल की मांग अधिक होती है।
मान्यता है कि, इस चावल से ही व्रत तोड़ने का सदियों पुरानी परंपरा है। बाजार में पसहर चावल 20 से 40 रुपए पॉव में बिक रहा है।
इसमें भी अलग-अलग किस्म के पसहर चावल हैं।
मोटा और साफ चावल के भाव तय कर दिए गए हैं।



