CG में IPL की तरह ऑक्शन से कलेक्टर-एसपी की पोस्टिंग, रमन बोले- निकले साढ़े 3 साल दो शीर्ष नेताओं की लड़ाई में

भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम डॉ. रमन सिंह ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि IPL के ऑक्शन की तरह छत्तीसगढ़ में कलेक्टर-एसपी की पोस्टिंग के लिए ऑक्शन हो रहा है। कोरबा कलेक्टर बनने के लिए सबसे ज्यादा बोली लगती है। सरकार का साढ़े 3 साल का कार्यकाल सिर्फ 2 शीर्ष नेताओं की लड़ाई में निकल गया। सरगुजा इस लड़ाई की युद्धभूमि बना हुआ है।
अंबिकापुर के सर्किट हाउस में मीडिया से चर्चा करते हुए डॉ. रमन ने कहा कि सरगुजा का विकास जान-बूझकर रोका गया है। चुनाव में यहां के लोगों ने कांग्रेस को भरपूर समर्थन दिया, बावजूद प्रदेश सरकार का साढ़े 3 साल का कार्यकाल सिर्फ 2 शीर्ष नेताओं की लड़ाई में निकल गया। आय से अधिक संपति मामले में हाईकोर्ट के आदेश की बात पर डॉ. रमन ने कहा कि यह सिर्फ राजनीतिक षडय़ंत्र है। हम पूरे आय का इनकम टैक्स रिटर्न भरते हैं। मैंने पूरा तथ्य विधानसभा व आईटी डिपार्टमेंट में रख दिया है।
छत्तीसगढ़ पर 81 हजार करोड़ का कर्ज
डॉ. रमन ने कहा कि छत्तीसगढ़ पर साढ़े 3 साल में कर्ज का बोझ काफी बढ़ गया है। हमने भी 15 साल सरकार चलाई। 36 हजार करोड़ का कर्ज लिया। इनके साढ़े 3 साल के कार्यकाल में 81 हजार करोड़ रुपये कर्ज पहुंच गया। इन्हें 12 हजार करोड़ रुपये तो हर साल ब्याज देना पड़ रहा है। हमने तो इंफ्रास्ट्रक्चर के काम किए, सडक़ों का जाल बिछाया। यहां अमृत मिशन में मिले करोड़ों रुपये का बंदरबांट हो गया।
नरवा, गरुवा, घुरवा और बाड़ी में बर्बादी
डॉ. रमन सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार पहले राज्यों को 32 प्रतिशत शेयर देती थी, लेकिन अब 42 प्रतिशत कर दिया है। भूपेश सरकार पूरे पैसे केवल नरवा, गरुवा, घुरवा और बाड़ी में बर्बाद कर रही है। पीएम आवास के लिए कर्ज लो, एनएच के लिए लो या अन्य विकास कार्यों के लिए लो, लेकिन ये कर्ज लेकर लूट में लगे हुए हैं। गरीबों का पीएम आवास तक बनने नहीं दिया। राज्य का शेयर ही जमा नहीं कर पाए।
हार के डर से जिला बनाने की घोषणा
डॉ. रमन ने कहा कि खैरागढ़ उपचुनाव में कांग्रेस को 29 सूत्रीय घोषणा पत्र जारी करना पड़ा। सीएम भूपेश इतना घबराए हुए थे कि उन्हें सप्ताहभर खैरागढ़ में रहना पड़ा। हार के डर से खैरागढ़ को जिला बनाने की घोषणा करनी पड़ गई। उन्होंने कहा कि कवर्धा की तरह ही यहां भी तुष्टीकरण की राजनीति दिख रही है। सुनियोजित तरीके से महामाया की पहाड़ी व बॉर्डर पर लोगों को बसाने का काम किया जा रहा है।



