गरीब बच्चों को निःशुल्क शिक्षा देने में भेदभाव ना करें सरकार : पॉल

रायपुर। राज्य सरकार के द्वारा गरीब बच्चों को निःशुल्क शिक्षा देने में भेदभाव किया जा रहा है। सरकारी और प्रायवेट अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों में प्रवेश देने अलग-अलग मापदंड तय किए गए है। स्वामी आत्मानंद शासकीय अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों (सेजेस) और शिक्षा का अधिकार (आरटीई) के अंतर्गत प्रायवेट विद्यालयों में गरीब बच्चों को प्रवेश दिया जाता है।
गरीब बच्चों को सेजेस में कक्षा पहली में प्रवेश पाने के लिए उम्र 6 वर्ष निर्धारित किया गया है तो आरटीई के अंतर्गत प्रायवेट विद्यालयों में कक्षा पहली में प्रवेश पाने के लिए उम्र 5 वर्ष निर्धारित किया गया है। वहीं गरीब होने का प्रमाण पत्र के लिए सेजेस में सरकार द्वारा जारी आय प्रमाण को मान्य किया गया तो आरटीई में प्रवेश पाने गरीबों से बीपीएल सर्वे सूची और अंत्योदय कार्ड सामाजिक-आर्थिक एवं जातिगत जनगणना सूचि की मांग किया जाता है। छत्तीसगढ़ पैरेंट्स एसोसियेशन के प्रदेश अध्यक्ष क्रिष्टोफर पॉल का कहना है कि गरीब बच्चों को निःशुल्क शिक्षा देने में भेदभाव किया जाना उचित नहीं है। राज्य सरकार को अलग-अलग विद्यालयों में प्रवेश देने के लिए अलग-अलग मापदंड तय नहीं किया जाना चाहिए।




