बस्तर में कोरोना व धारा 144 का सरकारी दोहरा चरित्र उजागर,उद्योगपति व जनता के लिए अलग-मुक्तिमोर्चा

BY-Naveen Shrivastava

बस्तर अधिकार मुक्तिमोर्चा के मुख्य सयोंजक नवनीत चाँद ने कहा कि ,बस्तर जिले में राज्य सरकार व स्थानीय जनप्रतिनिधियों सहमति से स्थानिय प्रशासन द्वारा कोरोना कॉल के तहत जिले में144 धारा व नए नए आदेश प्रभाव शील किये है। जिसके दो चरित्र बस्तर ब्लाक के चपका में गोपाल स्टील प्लांट निर्माण हेतु पर्यावरण विभाग द्वारा उधोगपति के आवेदन पर शासकीय कार्यक्रम आयोजित किया जाना यह दर्शाता है। कि सरकार द्वारा बस्तर में धारा 144 व कोरोना संक्रमण रोक थाम हेतु जारी नई गाइडलाइंस के तुगलकी आदेश, सिर्फ बस्तर की जनता व सामाजिक कार्यक्रम ,धार्मिक कार्यक्रम ,व्यपार व विपक्ष के कार्यक्रम पर ही लागू है। सरकार बस्तर में 5 वी अनुसूची ,पेशा कानून को दर किनार कर ग्राम पंचायतो के विरोध के बावजूद भी उधोगपति के पक्ष में गोपाल स्पंज आयरन प्लांट हेतु ग्राम चपका, ब्लाक बस्तर जिला बस्तर पर्यावरण विभाग द्वारा प्लांट निर्माण हेतु अनापत्ति हेतु शासकीय कार्यक्रम आयोजित किया जाना बस्तर के भावनाओ के विरुद्ध अन्यायपूण कदम है। जिसकी की जितनी निंदा की जाए वो कम है। विगत दिनों बस्तर अधिकार मुक्तिमोर्चा द्वारा बयान जारी कर व बस्तर कमिश्नर से दूरभाष में चर्चा कर कोरोना संक्रमण के बढ़ते प्रभाव व जिले में 144 धारा प्रभावशीलत व प्रभावित ग्राम पंचायतों की नाराजगी को ध्यान में ला एन ऑर्डर दुरस्त बनाये रखने के उद्देश्य पर्यावरण विभाग के कार्यक्रम को स्थगित करने हेतु निवेदन किया था। पर सरकार द्वारा उधोगपतियो के पक्ष को ध्यान में रख स्थानीय प्रशासन पर कोरोना संक्रमण के फैलाव को नजरअंदाज कर इस कार्यक्रम की अनुमति देने व इस कार्यक्रम को करवाने का आदेश दिया जिसमें प्रशासनिक आदेश 144 व कोरोना गाइडलाइंस की सम्पूर्ण रूप से उल्लंघन देखा जा रहा है।जिसे देख कर यह कहना गलत नही होगा कि कोरोना संक्रमण के मद्देजनर किसी गाइडलाइंस का पालन नही किया जाना न केबल चिंता का विषय बल्कि सरकार का कोरोना के नाम पर दोहरा चरित्र भी दर्शाता है। वही जो तनावपूर्ण परिस्थितियों वहाँ उतपन्न हुई है। उसके लिए लापरवाही जिमेदार अधिकारियों पर सरकार कार्यवाही करे।

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