बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा एवं जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के आरोपों में दिख रही सच्चाई, अब बड़े संरक्षणकर्ताओं तक पहुंचे जांच – नवनीत चाँद

छोटे अधिकारियों पर हुई कार्रवाई जनता के संघर्ष की पहली जीत, लेकिन असली जिम्मेदारों पर कार्रवाई अभी बाकी
जगदलपुर।बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा एवं जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के मुख्य संयोजक एवं बस्तर संभाग अध्यक्ष नवनीत चाँद ने कहा है कि विगत कई वर्षों से संगठन द्वारा बेलाडिला, किरंदुल, बचेली, पंडेवार, मिरतुर, गंगालूर एवं बस्तर संभाग के अन्य क्षेत्रों में कथित लौह अयस्क तस्करी, अवैध परिवहन, उत्पादन एवं राजस्व संबंधी अनियमितताओं के मुद्दे लगातार उठाए जाते रहे हैं।
आज विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों, विभागीय जांचों तथा एनएमडीसी से जुड़े कुछ अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर हुई कार्रवाई से यह स्पष्ट होता दिखाई दे रहा है कि जिन गंभीर आशंकाओं और आरोपों को बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा एवं जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) लंबे समय से उठा रहे थे, उनमें पर्याप्त तथ्य और सच्चाई मौजूद थी।
नवनीत चाँद ने कहा कि कुछ अधिकारियों पर हुई कार्रवाई का स्वागत किया जाना चाहिए क्योंकि यह बस्तर की जनता, सामाजिक संगठनों और जनआंदोलनों के संघर्ष की पहली महत्वपूर्ण जीत है। यह उन लोगों की जीत है जिन्होंने वर्षों तक दबाव, उपेक्षा और विरोध के बावजूद बस्तर की खनिज संपदा की रक्षा की आवाज बुलंद रखी।
किन्तु उन्होंने स्पष्ट कहा कि केवल कुछ छोटे अधिकारियों अथवा कर्मचारियों पर कार्रवाई कर पूरे मामले को समाप्त मान लेना उचित नहीं होगा।
सबसे बड़ा प्रश्न अभी भी अनुत्तरित है
यदि वर्षों तक हजारों टन लौह अयस्क का उत्खनन, भंडारण, सड़क परिवहन, वेब्रिज सत्यापन, रेलवे रेक लोडिंग, डिस्पैच एवं रॉयल्टी निर्धारण की प्रक्रियाएं संचालित होती रहीं, तो क्या यह सब केवल निचले स्तर के कर्मचारियों की जानकारी से संभव था?
यदि अनियमितताएं हुई हैं तो—
– उन्हें संरक्षण किस स्तर से प्राप्त हुआ?
– वास्तविक लाभार्थी कौन हैं?
– प्रशासनिक, विभागीय एवं कॉर्पोरेट स्तर पर निर्णय लेने वाले कौन लोग थे?
– उत्पादन, परिवहन और डिस्पैच के रिकॉर्ड में यदि अंतर है तो उसकी जवाबदेही कौन तय करेगा?
– खनिज संपदा से जुड़े राजस्व नुकसान की भरपाई कौन करेगा?
बस्तर की जनता को चाहिए पूरी सच्चाई
नवनीत चाँद ने कहा कि बस्तर की जनता केवल कुछ नामों की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि पूरे तंत्र की सच्चाई जानना चाहती है। यदि जांच निष्पक्ष हुई तो यह केवल व्यक्तियों का नहीं बल्कि एक संभावित संगठित नेटवर्क का मामला भी सामने ला सकती है।
बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा की प्रमुख मांगें
✔ बेलाडिला से लेकर बस्तर संभाग की सभी प्रमुख खदानों का स्वतंत्र तकनीकी, वित्तीय एवं प्रशासनिक ऑडिट।
✔ एनएमडीसी एवं अन्य खनन कंपनियों के वास्तविक उत्पादन, स्टॉक, डिस्पैच एवं रॉयल्टी भुगतान का विशेष सत्यापन।
✔ वेब्रिज, रेलवे रेक लोडिंग प्वाइंट, स्टॉक यार्ड, परिवहन मार्ग एवं डिस्पैच रिकॉर्ड की फोरेंसिक जांच।
✔ वन टी.पी., ई-परमिट, ट्रांजिट पास, रॉयल्टी पास एवं जीपीएस डेटा का स्वतंत्र परीक्षण।
✔ पिछले दस वर्षों के उत्पादन, रॉयल्टी, कर भुगतान एवं डिस्पैच रिकॉर्ड का विशेष ऑडिट।
✔ खनिज, वन, राजस्व, परिवहन, रेलवे, पुलिस एवं आर्थिक अपराध अन्वेषण एजेंसियों की संयुक्त उच्च स्तरीय SIT का गठन।
✔ जांच रिपोर्ट सार्वजनिक कर ग्राम सभाओं, जनप्रतिनिधियों एवं जनता के समक्ष प्रस्तुत की जाए।
✔ दोष सिद्ध होने पर संबंधित अधिकारियों, ठेकेदारों, परिवहनकर्ताओं, कंपनी प्रतिनिधियों तथा संरक्षण प्रदान करने वाले प्रभावशाली व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाए।
यह केवल खनिज का मामला नहीं, बस्तर के अधिकारों का प्रश्न है
नवनीत चाँद ने कहा कि बस्तर की खनिज संपदा पर पहला अधिकार बस्तर की जनता का है। यदि खनिज संपदा से जुड़े प्रश्नों को दबाने, जांच को सीमित करने या बड़े जिम्मेदार लोगों को बचाने का प्रयास किया गया तो बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा एवं जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) व्यापक जनजागरण अभियान एवं लोकतांत्रिक जनआंदोलन प्रारंभ करने के लिए बाध्य होंगे।
उन्होंने कहा कि खनिज संपदा से प्राप्त संसाधनों का लाभ बस्तर के युवाओं, आदिवासियों, किसानों, शिक्षा, स्वास्थ्य और क्षेत्रीय विकास में दिखाई देना चाहिए, न कि भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोपों में।
**”छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई शुरुआत है, अंत नहीं।
बस्तर की जनता अब पूरी सच्चाई, जवाबदेही और न्याय चाहती है।”**



