गुरु वह है जिससे सत्व का बोध चेतन स्वरूप शरीर धारण कर ले

गुरु ही है ..जो यह बताता है कि कौन सा बटन दबाने से हमारे अंदर से तामसिकता डिलीट हो सकता है
गुरुता का भाव पूर्ण स्वरूप में जागृति हो गया तो शिक्षा जैसे सहज भाव को बाजारू बनाने वाले भी जलभुन कर नष्ट हो जाएंगे
एक पत्रकार की डायरी से/नवीन श्रीवास्तव,पत्रकार एवं लेखक, स्तंभकार (🌴🌴जीवनदायिनी बस्तर से*)
पांच तत्वों के साथ छठा तत्व सत्व स्वरूप जागरण और शिक्षा भी प्रेरक तत्व है … देने का भाव …और गुरु तो सृजनकर्ता हैं, गुरु हमें आत्मिक रास्ता और सत्य का रास्तादिखाते हैं , माता-पिता,शिक्षक , ग्रन्थ, पुस्तक, परिस्थितिया.. *जो हमारे लिए सत्व को संस्कार में बदले वे गुरु हैं* ..जिससे सत्व का बोध चेतन स्वरुप शरीर धारण कर लें ताकि पूरी धरती पर सारे जीवों के लिए कल्याणकारी सुवासित फूलों की फसलें लहलहा उठे।..मानवता, सहज विकास और राष्ट्र विरोधी धनलोलुप ऐसे भेड़ियों की कमी नहीं है जिन्होंने बुनियादी शिक्षा को बाजारू बनाया है …क्योंकि उन्हें डर लगता है, उन्हें भय है कि शिक्षा का अलख जगा ..तो कथित विकास, साक्षरता ,सुख के आड़ में फलफूल रहा दुकानदारी बंद हो जाएगा ..गुरुता का भाव पूर्ण स्वरूप में जागृति हो गया तो आत्मिक उत्थान के साथ शिक्षा जैसे सहज भाव को बाजारू बनाने वाले भी जलभुन कर नष्ट हो जाएंगे…वर्तमान में एक तरफ अच्छे,सच्चे लोग भी हैं जो शिक्षा को सार्थक अर्थ देने लगातार लड़ रहे हैं तो दूसरी तरफ शिक्षा व्यवस्था पूंजीपतियों के तेज दांत वाले जबड़े में भी है ..बड़ी बड़ी चमचमाती इमारतों वाले ऐसे स्कूलों के कथित आयोजित भव्य परन्तु दिखावे के समारोह में गले में माला पहनने की राजनीतिक भूख और शौक से भी शिक्षा व्यवस्था को बचाना जरूरी है साथ ही केवल धन,वैभव ,महत्वाकांशा के अंधेरे फैलाने वाले ..भूखे,दरिद्र,अधम.. ऎसे सफेदपोश लोगों को धरती से, देश की जमीन से डिलीट करना जरूरी है… ऐसे में किसी ने कितना सही कहा है कि –गुरु ही है , ..जो यह बताता है कि वह बटन कौन सा जिसे दबाने से हमारे अंदर से तामसिकता डिलीट हो सकता है ..और अंदर से फूटते उजालों से सभी तरह के अन्धेरे का विनाश हो जाए…।। ( गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर सभी गुरुजनों के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम के साथ… शुभकामनाओं सहित सादर..नवीन श्रीवास्तव, पत्रकार



