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15 साल से सड़क नहीं, सिर्फ कीचड़ और इंतजार!

छोटे मुड़मा के छेपड़ा पारा के ग्रामीणों ने प्रशासन से पूछा—पुलिया बनी तो सड़क क्यों नहीं?

 

 

 

 

उपशीर्षक :

नवनीत चाँद के नेतृत्व में ग्रामीणों ने अपर कलेक्टर से मुलाकात कर तत्काल मरम्मत, तकनीकी सर्वेक्षण और शासकीय योजना के तहत स्थायी पक्की सड़क की स्वीकृति की मांग की

 

जगदलपुर, 29 सितंबर 2026। ग्राम पंचायत बड़े मुड़मा के आश्रित ग्राम छोटे मुड़मा के छेपड़ा पारा के ग्रामीणों ने लगभग 15 वर्षों से मुख्य सड़क तक कच्चे एवं जर्जर संपर्क मार्ग की समस्या को लेकर बस्तर जिला के अपर कलेक्टर से मुलाकात की। बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा के मुख्य संयोजक एवं बस्तर संभाग अध्यक्ष, जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) नवनीत चाँद के नेतृत्व में ग्रामीणों ने कलेक्टर बस्तर एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत बस्तर के नाम आवेदन सौंपकर तत्काल सड़क मरम्मत तथा स्थायी पक्की सड़क निर्माण की स्वीकृति की मांग रखी।

 

सड़क की तस्वीरें बता रही हैं जमीनी हकीकत

 

मौके की तस्वीरों में सड़क पर कीचड़, जलभराव, गड्ढे और असमतल मार्ग की स्थिति स्पष्ट दिखाई दे रही है। बारिश के दौरान यह मार्ग ग्रामीणों के लिए आवागमन को कठिन बनाता है। ग्रामीणों के अनुसार इसका प्रभाव विशेष रूप से स्कूली बच्चों, बुजुर्गों, मरीजों, महिलाओं तथा आवश्यक सेवाओं के लिए आने-जाने वाले लोगों पर पड़ता है।

 

नवनीत चाँद ने प्रशासन से उठाए तकनीकी और जवाबदेही के सवाल

 

1. यदि इस मार्ग पर पुल/पुलिया का निर्माण हो चुका है, तो उससे जुड़ा संपर्क मार्ग आज भी स्थायी क्यों नहीं है?

 

2. लगभग 15 वर्षों से समस्या होने के बावजूद अब तक स्थल का तकनीकी सर्वेक्षण, DPR और प्राक्कलन तैयार किया गया है या नहीं?

 

3. सड़क निर्माण के लिए पात्र शासकीय योजना/मद कौन-सा है और प्रस्ताव वर्तमान में किस विभाग अथवा स्तर पर लंबित है?

 

4. पुलिया के निर्माण की स्वीकृति, लागत, कार्यादेश, निर्माण एजेंसी, पूर्णता प्रमाण-पत्र एवं भुगतान संबंधी अभिलेख उपलब्ध हैं या नहीं?

 

5. वर्तमान में सड़क की जलनिकासी, कैरिजवे, सड़क की लंबाई-चौड़ाई और आवश्यक संरचनात्मक सुधार के संबंध में विभाग का तकनीकी आकलन क्या है?

 

6. स्थायी निर्माण में समय लगने की स्थिति में ग्रामीणों को सुरक्षित आवागमन उपलब्ध कराने के लिए तत्काल मुरुम/ग्रेवल एवं ड्रेनेज सुधार कब किया जाएगा?

 

मुख्य मांगें—तत्काल कार्रवाई के साथ स्थायी समाधान

 

बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा ने प्रशासन से मांग की है कि—

 

तत्काल संयुक्त स्थल निरीक्षण एवं तकनीकी सर्वेक्षण कराया जाए।

 

सड़क की लंबाई, चौड़ाई, कैरिजवे, ढाल, जलनिकासी एवं पुलिया सहित पूर्ण तकनीकी परीक्षण किया जाए।

 

पात्र शासकीय योजना के अंतर्गत DPR एवं प्राक्कलन तैयार कर सड़क निर्माण की स्वीकृति हेतु प्रस्ताव भेजा जाए।

 

स्थायी स्वीकृति तक मुरुम/ग्रेवल एवं जलनिकासी की तत्काल व्यवस्था की जाए।

 

पूर्व में निर्मित पुलिया से संबंधित स्वीकृति एवं व्यय अभिलेखों का परीक्षण कराया जाए।

 

पूरी कार्रवाई एवं प्रस्ताव की वर्तमान स्थिति से ग्रामीणों को लिखित रूप में अवगत कराया जाए।

 

 

बस्तर में सड़क सिर्फ सड़क नहीं—शिक्षा, स्वास्थ्य और अधिकारों तक पहुंच है

 

नवनीत चाँद ने कहा कि दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्र में सड़क की स्थिति का सीधा संबंध स्कूल, स्वास्थ्य सेवा, बाजार, रोजगार, आपातकालीन सेवाओं और प्रशासनिक पहुंच से है। इसलिए समस्या का समाधान केवल अस्थायी मिट्टी-मुरुम डालने तक सीमित न रहकर वैज्ञानिक तकनीकी परीक्षण और स्थायी सड़क निर्माण के रूप में किया जाना चाहिए।

 

उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 में निहित समानता एवं गरिमापूर्ण जीवन के मूल्यों की दृष्टि से भी सार्वजनिक सेवाओं तक वास्तविक पहुंच सुनिश्चित करना प्रशासनिक प्राथमिकता का विषय होना चाहिए।

 

सीधा सवाल: 15 साल का इंतजार अब और कितना?

 

ग्रामीणों की मांग स्पष्ट है—पहले तत्काल सुरक्षित आवागमन, फिर स्थायी पक्की सड़क।

 

अब संबंधित राज्य सरकार, क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि, जिला प्रशासन, जनपद पंचायत और सड़क निर्माण विभाग को स्पष्ट करना चाहिए कि छोटे मुड़मा के छेपड़ा पारा की सड़क का तकनीकी सर्वेक्षण कब होगा, मरम्मत कब शुरू होगी और स्थायी सड़क निर्माण का प्रस्ताव कब स्वीकृत होगा?

 

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