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राजनीतिक दलों ने एसआईआर पर क्यों जताई आपत्ति? चुनाव आयोग ने मतभेद के बीच कही ये बात

केरल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान राजनीतिक दलों और चुनाव प्रशासन के बीच मतभेद खुलकर सामने आए हैं। शनिवार को हुई बैठक में कई दलों ने मतदाताओं की सुनवाई कम से कम करने की मांग उठाई। दलों का कहना है कि सुनवाई की प्रक्रिया से आम मतदाताओं को परेशानी हो सकती है, इसलिए इसमें छूट दी जाए।

यह मुद्दा मुख्य निर्वाचन अधिकारी रतन यू केलकर द्वारा बुलाई गई बैठक में उठा। एसआईआर के तहत वर्ष 2002 की मतदाता सूची को आधार बनाया गया है। इसके चलते राज्य में 19.32 लाख से अधिक मतदाताओं को दस्तावेज जमा करने को कहा गया है। राजनीतिक दलों ने आशंका जताई कि यदि निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी नोटिस जारी कर सुनवाई करेंगे, तो बड़ी संख्या में मतदाता परेशान होंगे।

ऑनलाइन दस्तावेज और वर्चुअल सुनवाई की मांग
बैठक में दलों ने सुझाव दिया कि मतदाताओं को पहचान से जुड़े दस्तावेज ऑनलाइन जमा करने की अनुमति दी जाए। साथ ही सुनवाई की जरूरत पड़ने पर वर्चुअल माध्यम अपनाया जाए। दलों ने यह भी आपत्ति जताई कि सुनवाई के दौरान जाति प्रमाण पत्र को पहचान के प्रमाण के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है, जो उचित नहीं है।

भाजपा की अलग राय
जहां अधिकतर दल सुनवाई से राहत चाहते दिखे, वहीं भारतीय जनता पार्टी ने अलग रुख अपनाया। भाजपा ने साफ कहा कि एसआईआर का उद्देश्य पूरा करने के लिए मतदाताओं की सुनवाई जरूरी है। पार्टी की ओर से कहा गया कि बिना सुनवाई के मतदाता सूची को पूरी तरह त्रुटिरहित नहीं बनाया जा सकता।

चुनाव अधिकारी का स्पष्ट रुख
मुख्य निर्वाचन अधिकारी रतन यू केलकर ने कहा कि सभी मतदाताओं को सुनवाई के लिए बुलाना जरूरी नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि नोटिस पाने वाले मतदाताओं के दस्तावेज संतोषजनक पाए जाते हैं, तो निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी सुनवाई न करने का फैसला ले सकते हैं। यानी अंतिम निर्णय अधिकारियों के विवेक पर निर्भर करेगा।

बैठक पर उठे सवाल, फिर भी जारी रहेगा संवाद
बैठक में सत्तारूढ़ माकपा की ओर से एम विजयकुमार और भाजपा की ओर से जे आर पद्मकुमार शामिल हुए। कांग्रेस प्रतिनिधि एम के रहमान ने हाल ही में जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों की ओर इशारा किया। यूडीएफ नेताओं ने आरोप लगाया कि बैठकों में दलों के सुझावों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा। इस पर केलकर ने कहा कि यदि दलों को बैठकें बेकार लगती हैं, तो इन्हें अगले सप्ताह से बंद किया जा सकता है। हालांकि, सभी दल अगले सप्ताह फिर बैठक करने पर सहमत हो गए।

ड्राफ्ट सूची में कुल 2 करोड़ 54 लाख 42 हजार 352 मतदाता शामिल किए गए हैं। वहीं, गणना चरण पूरा होने के बाद 24 लाख 8 हजार 503 मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। मतदाता 22 जनवरी 2026 तक ड्राफ्ट सूची पर दावा और आपत्ति दर्ज करा सकते हैं।

 

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