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बंगलूरू भगदड़: मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने बढ़ाई मुआवजे की राशि, अब मृतकों के परिजनों को मिलेंगे 25-25 लाख रुपए

बंगलूरू भगदड़ मामले में कर्नाटक सरकार ने शनिवार शाम को मुआवजे की राशि को बढ़ाने का एलान किया है। कर्नाटक की सिद्दारमैया सरकार ने मृतकों के परिवारों को 25 लाख रुपया मुआवजे के रूप में देने की घोषणा की है। पहले यह रकम 10 लाख थी। वहीं आरसीबी भी इस हादसे में मारे गए लोगों के परिजनों के लिए 10-10 लाख रुपए के मुआवजे का एलान कर चुकी है।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने चिनास्वामी स्टेडियम हादसे में मृतकों के परिजनों को मुआवजा बढ़ाकर 25 लाख रुपये करने का आदेश दिया। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने शनिवार को इस संबंध में घोषणा की। इससे पहले राज्य सरकार ने 10 लाख रुपये प्रति मृतक के परिवार को मुआवजा देने की घोषणा की थी। अब इसे बढ़ाकर 25 लाख रुपये प्रति परिवार कर दिया गया है। गौरतलब है कि 4 जून को आईपीएल की विजेता टीम आरसीबी के जश्न कार्यक्रम के दौरान मची भगदड़ में 11 लोगों की मौत हो गई थी। 56 लोग घायल हो गए थे।

 

हाईकोर्ट के पूर्व जज का एक सदस्यीय आयोग लगाएगा जिम्मेदारों का पता
कर्नाटक सरकार की ओर से सेवानिवृत्त हाईकोर्ट के जज जॉन जॉन माइकल कुन्हा की अध्यक्षता में गठित एक सदस्यीय जांच आयोग भगदड़ की जांच करेगा। आयोग को इस घटना के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान करने को कहा गया है। साथ ही आयोग को ऐसे एहतियाती उपाय भी सुझाने होंगे जिससे भविष्य में ऐसी घटनाओं को दोबारा होने से रोका जा सके।

 

मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने 5 जून को इस मुद्दे में प्रक्रियागत खामियों की जांच के लिए कुन्हा के नेतृत्व में एक सदस्यीय आयोग के गठन की घोषणा की थी। आयोग को 30 दिनों में रिपोर्ट सौंपनी है। सीएम कार्यालय से जारी निर्देश में कहा गया था कि आयोग को जांच आयोग अधिनियम, 1952 और सिविल प्रक्रिया संहिता के प्रावधानों के तहत जांच करने की सभी शक्तियां होंगी। सरकार को उम्मीद है कि एक महीने के भीतर जांच पूरी हो जाएगी और रिपोर्ट पेश कर दी जाएगी। आयोग को पता लगाना होगा कि – क्या चिन्नास्वामी स्टेडियम में आरसीबी टीम के विजय अभिनंदन समारोह के आयोजन के दौरान आवश्यक अनुमति, नियमों और प्रक्रियाओं का पालन किया गया था। वहां हुई भीड़ और भगदड़ के कारण क्या थे।

साथ ही, घटना के संबंध में एहतियात के तौर पर उठाए गए कदमों में चूक और जिम्मेदार लोगों की पहचान करनी होगी। यह स्पष्ट किया गया कि यह जांच आयोग, आदेशित मजिस्ट्रेट जांच से अलग है तथा यह समानांतर एवं व्यापक जांच करेगा।

 

 

कर्नाटक सरकार ने कहा कि यदि आवश्यक हो तो जांच आयोग के अध्यक्ष तकनीकी और कानूनी सहायता के लिए एक सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी और एक सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी की सेवाएं प्राप्त करने के लिए कदम उठा सकते हैं। संबंधित अधिकारियों के वेतन/भत्ते का खर्च सरकार की ओर से वहन किया जाएगा। पुलिस महानिदेशक और महानिरीक्षक जांच आयोग के लिए आवश्यक स्टाफ, सामग्री, वाहन और कार्यालय तथा फर्नीचर/टेलीफोन आदि उपलब्ध कराएंगे।

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