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बस्तर की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल, उच्च स्तरीय जांच एवं विशेष शिक्षा सुधार अभियान की मांग – नवनीत चाँद

 

 

 

 

जगदलपुर, बस्तर।बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा के मुख्य संयोजक एवं जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के बस्तर संभाग अध्यक्ष नवनीत चाँद ने बस्तर संभाग की वर्तमान शिक्षा व्यवस्था को चिंताजनक बताते हुए कहा है कि सरकार के शिक्षा सुधार संबंधी दावे जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाते।

 

उन्होंने कहा कि हाल ही में प्रकाशित समाचारों एवं विभागीय आंकड़ों के अनुसार बस्तर जिले के 1,526 विद्यालयों में से 60 विद्यालय अति जर्जर स्थिति में हैं, 37 विद्यालय भवनविहीन हैं तथा 360 विद्यालय आज भी एकल शिक्षक व्यवस्था पर संचालित हो रहे हैं। इसके अतिरिक्त बस्तर संभाग में लगभग 6,201 सहायक शिक्षकों के पद रिक्त हैं।

 

नवनीत चाँद ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21A, 14, 15(4), 46 तथा पंचम अनुसूची के प्रावधानों के बावजूद यदि आदिवासी अंचल के बच्चे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित हैं, तो यह केवल प्रशासनिक विफलता नहीं बल्कि संवैधानिक दायित्वों की अनदेखी है।

 

उन्होंने आरोप लगाया कि एक ओर विद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी है, वहीं दूसरी ओर अनेक शिक्षकों को उनके मूल पदस्थापना स्थल से हटाकर विभिन्न कार्यालयों एवं अन्य स्थानों पर संलग्न किया गया है। इससे विद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है। उन्होंने सभी संलग्नीकरण आदेशों को तत्काल निरस्त कर शिक्षकों को मूल पदस्थापना स्थल पर भेजने की मांग की।

 

नवनीत चाँद ने यह भी मांग की कि शिक्षा विभाग से जुड़े शिक्षकों एवं अधिकारियों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त किया जाए ताकि वे पूरी क्षमता के साथ शिक्षण कार्य कर सकें।

 

उन्होंने कहा कि शिक्षा के नाम पर प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन विद्यालयों की वास्तविक स्थिति अनेक गंभीर प्रश्न खड़े करती है। इसलिए समग्र शिक्षा अभियान, पीएम श्री योजना, छात्रावास योजनाओं, आश्रम-आवासीय विद्यालयों, DMF एवं CSR निधियों सहित शिक्षा विभाग की सभी योजनाओं का वित्तीय, तकनीकी एवं सामाजिक ऑडिट कराया जाना चाहिए।

 

उन्होंने विद्यालय भवन निर्माण, अतिरिक्त कक्ष निर्माण, मरम्मत कार्य, फर्नीचर, कंप्यूटर, स्मार्ट क्लास, खेल सामग्री एवं अन्य खरीदी गई सामग्री का स्वतंत्र भौतिक सत्यापन एवं बाजार मूल्य के आधार पर मूल्यांकन कराने की मांग भी की।

 

नवनीत चाँद ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में शिक्षा सुधार को लेकर गंभीर है तो उसे बस्तर के लिए विशेष आदिवासी शिक्षा मिशन लागू करना चाहिए, रिक्त पदों पर विशेष भर्ती अभियान चलाना चाहिए तथा जर्जर एवं भवनविहीन विद्यालयों के लिए समयबद्ध कार्ययोजना घोषित करनी चाहिए।

 

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि 30 दिवस के भीतर प्रभावी कार्यवाही नहीं की जाती है तो बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा एवं जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) व्यापक जनजागरण अभियान, जनसुनवाई, धरना-प्रदर्शन एवं लोकतांत्रिक जनआंदोलन प्रारंभ करेगा।

 

“खनिज संपदा से समृद्ध बस्तर को शिक्षा में पिछड़ा रखना सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध है।”

 

 

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