बस्तर में खाद-बीज वितरण व्यवस्था की SIT जांच हो, दोषियों पर FIR दर्ज हो – नवनीत चाँद

नानगुर खाद गोदाम में 1275 बोरी यूरिया एवं लगभग 2 टन पोटाश की कमी का मामला पूरे बस्तर के किसानों के साथ हो रहे संभावित आर्थिक शोषण और खाद वितरण व्यवस्था में व्याप्त गंभीर अनियमितताओं की ओर संकेत करता है।
जगदलपुर।बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा के मुख्य संयोजक एवं जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के बस्तर संभाग अध्यक्ष नवनीत चाँद के नेतृत्व में जिला कलेक्टर से मुलाकात कर इस पूरे मामले में विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया तथा उच्च स्तरीय जांच समिति (SIT) गठित करने की मांग की गई।
ज्ञापन में कहा गया है कि यदि सरकारी सब्सिडी से किसानों के लिए उपलब्ध कराए जाने वाले खाद एवं बीज किसानों तक निर्धारित मूल्य पर नहीं पहुंच रहे हैं, तो यह केवल प्रशासनिक विफलता नहीं बल्कि किसानों के अधिकारों एवं सार्वजनिक धन के साथ गंभीर खिलवाड़ है।
बस्तर संभाग के अनेक किसानों से लगातार शिकायतें प्राप्त हो रही हैं कि खाद की कृत्रिम कमी पैदा की जा रही है, निर्धारित मूल्य से अधिक दरों पर बिक्री हो रही है, अनावश्यक टैगिंग की जा रही है तथा वितरण व्यवस्था में गंभीर पारदर्शिता का अभाव है।
नवनीत चाँद ने मांग की है कि—
✅ पूरे बस्तर संभाग में खाद एवं बीज वितरण व्यवस्था की SIT जांच कराई जाए।
✅ विगत तीन वर्षों के खाद वितरण का फोरेंसिक ऑडिट कराया जाए।
✅ नानगुर खाद प्रकरण में जिम्मेदार अधिकारियों एवं संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध FIR दर्ज की जाए।
✅ मार्कफेड, सहकारी समितियों, डिस्ट्रीब्यूटरों, परिवहन एजेंसियों एवं निजी विक्रेताओं की भूमिका की जांच की जाए।
✅ किसानों से अधिक मूल्य वसूली एवं कालाबाजारी पर तत्काल रोक लगाई जाए।
✅ जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
नवनीत चाँद ने कहा कि बस्तर का किसान पहले ही मौसम, बाजार और आर्थिक संकट से जूझ रहा है। यदि किसानों के हिस्से का खाद भी रास्ते में गायब हो रहा है या कालाबाजारी की भेंट चढ़ रहा है, तो यह किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि सरकार एवं प्रशासन द्वारा समयबद्ध एवं निष्पक्ष जांच नहीं कराई जाती है तो बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा एवं जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) किसानों के हित में व्यापक लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक जनआंदोलन प्रारंभ करने के लिए बाध्य होंगे।
“किसानों के हक का एक-एक बोरा खाद और सरकार की एक-एक रुपये की सब्सिडी का हिसाब देना होगा।”
जवाब दो — खाद कहां गया?
जवाब दो — किसानों को खाद क्यों नहीं मिला?
जवाब दो — कालाबाजारी करने वालों पर कार्रवाई कब होगी?



