आवारा पशुओं से बढ़ते हादसों पर नगर निगम को ज्ञापन, 30 दिन में स्थायी समाधान की मांग

“दुर्घटना के बाद मुआवजा नहीं, दुर्घटना से पहले सुरक्षा चाहिए” — नवनीत चाँद
जगदलपुर। शहर की प्रमुख सड़कों, चौक-चौराहों, बाजार क्षेत्रों एवं व्यस्त मार्गों पर खुले में घूम रहे आवारा एवं निराश्रित पशुओं से बढ़ते दुर्घटना के खतरे को लेकर बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा के मुख्य संयोजक एवं बस्तर संभाग अध्यक्ष, जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे.) नवनीत चाँद के आह्वान पर नगर मंडल कार्यकारी अध्यक्ष अलका नादान के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने नगर निगम आयुक्त से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा।
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि सड़क पर बैठे पशु विशेषकर रात के समय वाहन चालकों को दिखाई नहीं देते, जिससे दोपहिया सहित अन्य वाहनों के दुर्घटनाग्रस्त होने का खतरा बना रहता है। यह केवल पशु प्रबंधन का विषय नहीं, बल्कि नागरिकों के जीवन, सड़क सुरक्षा, यातायात व्यवस्था एवं प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा गंभीर मामला है।
7 दिन में अभियान, 15 दिन में सर्वे और 30 दिन में स्थायी योजना की मांग
मोर्चा ने प्रशासन से 7 दिवस का विशेष आवारा पशु नियंत्रण अभियान, 15 दिवस के भीतर दुर्घटना संभावित मार्गों एवं हॉट-स्पॉट का संयुक्त सर्वे तथा 30 दिवस के भीतर स्थायी Stray Cattle Management Plan लागू करने की मांग की है। साथ ही 24×7 रेस्क्यू व्यवस्था, सुरक्षित कांजी हाउस/गौशाला, पशु चिकित्सा सुविधा, रात्रिकालीन पेट्रोलिंग, स्ट्रीट लाइट एवं चेतावनी संकेत तथा पशुओं को खुले में छोड़ने वाले मालिकों की पहचान कर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की गई।
मोर्चा ने नगर निगम, पुलिस, यातायात पुलिस, पशुपालन विभाग, RTO एवं PWD की संयुक्त कार्ययोजना बनाने तथा पिछले वर्षों में पशु-जनित सड़क दुर्घटनाओं का आधिकारिक आंकड़ा सार्वजनिक करने की भी मांग की।
नवनीत चाँद बोले—“प्रशासन दुर्घटना का इंतजार न करे”
नवनीत चाँद ने कहा कि, “जगदलपुर की जनता को दुर्घटना के बाद मुआवजा नहीं, दुर्घटना से पहले सुरक्षा चाहिए। जब प्रशासन को पता है कि किन स्थानों पर पशुओं का जमावड़ा रहता है, तो स्थायी समाधान क्यों नहीं किया जा रहा है? जहां जांच में लापरवाही सामने आए, वहां जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।”
उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन एवं व्यक्तिगत सुरक्षा का अधिकार महत्वपूर्ण है। प्रशासन को पशु कल्याण और नागरिक सुरक्षा के बीच संतुलन बनाते हुए मानवीय एवं कानूनसम्मत व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए।
अलका नादान—“पशुओं के प्रति संवेदना भी, नागरिकों की सुरक्षा भी”
अलका नादान ने कहा, “हम पशुओं के खिलाफ नहीं, अव्यवस्था के खिलाफ हैं। पशुओं के साथ क्रूरता नहीं होनी चाहिए, लेकिन उनकी वजह से नागरिकों की जान भी खतरे में नहीं छोड़ी जा सकती। नगर निगम को अस्थायी अभियान के बजाय स्थायी और जवाबदेह व्यवस्था बनानी होगी।”
हिमांशु आनंद—“युवाओं की सुरक्षा से समझौता नहीं”
युवा मोर्चा जिला अध्यक्ष हिमांशु आनंद ने कहा, “हजारों युवा प्रतिदिन दोपहिया वाहनों से शहर की सड़कों पर चलते हैं। प्रशासन को दुर्घटना होने के बाद कार्रवाई करने के बजाय दुर्घटना की संभावना को पहले ही खत्म करना होगा।”
संयुक्त बयान
नवनीत चाँद, अलका नादान एवं हिमांशु आनंद ने संयुक्त रूप से कहा कि “हमारी लड़ाई किसी पशु के खिलाफ नहीं, बल्कि अव्यवस्थित पशु प्रबंधन और जवाबदेही की कमी के खिलाफ है। न पशुओं के साथ क्रूरता हो और न नागरिकों की जिंदगी खतरे में छोड़ी जाए। यदि निर्धारित समय में प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा एवं जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे.) लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से जनहित की लड़ाई को आगे बढ़ाएंगे।”
मुख्य मांग:
“सड़कें सुरक्षित हों, पशु सुरक्षित रहें और प्रशासन अपनी जिम्मेदारी सुनिश्चित करे।”



