FEATURED

नानगुर खाद प्रकरण केवल स्टॉक गड़बड़ी नहीं, पूरे बस्तर के उर्वरक वितरण तंत्र में संभावित कालाबाजारी और भ्रष्टाचार की जांच का विषय — नवनीत चाँद

 

 

 

 

जगदलपुर, बस्तर।

 

बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा एवं जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) ने नानगुर स्थित सीलबंद खाद गोदाम में रिकॉर्ड एवं वास्तविक स्टॉक के बीच भारी अंतर पाए जाने के मामले को अत्यंत गंभीर बताते हुए संपूर्ण बस्तर संभाग में खाद एवं बीज वितरण व्यवस्था की उच्च स्तरीय तकनीकी, वित्तीय एवं आपराधिक जांच की मांग की है।

 

मुख्य संयोजक नवनीत चाँद ने कहा कि स्थानीय समाचार पत्रों में प्रकाशित जानकारी के अनुसार नानगुर स्थित सीलबंद गोदाम में लगभग 1275 बोरी यूरिया एवं लगभग 2 टन पोटाश स्टॉक में कमी पाई गई है। यदि विभागीय जांच में यह तथ्य प्रमाणित होता है, तो यह केवल एक गोदाम या एक व्यापारी का मामला नहीं बल्कि पूरे उर्वरक वितरण तंत्र, निगरानी व्यवस्था एवं प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिन्ह है।

 

उन्होंने कहा कि बस्तर के अनेक किसान लगातार शिकायत कर रहे हैं कि केंद्र सरकार द्वारा भारी सब्सिडी के साथ उपलब्ध कराए जाने वाले उर्वरक कई स्थानों पर निर्धारित मूल्य से अधिक दरों पर बेचे जा रहे हैं। किसानों को कभी खाद की कृत्रिम कमी का सामना करना पड़ता है, तो कहीं उन्हें खाद के साथ अन्य उत्पाद लेने के लिए मजबूर किया जाता है। कई क्षेत्रों से यह भी शिकायतें प्राप्त हुई हैं कि वितरण प्रणाली में पारदर्शिता का अभाव है और वास्तविक लाभ किसानों तक नहीं पहुंच पा रहा है।

 

नवनीत चाँद ने कहा कि उर्वरक वितरण प्रणाली Essential Commodities Act, 1955, Fertilizer (Control) Order, 1985, Integrated Fertilizer Management System (IFMS) तथा DBT Fertilizer System के अंतर्गत संचालित होती है। इसके बावजूद यदि कंपनी से लेकर डिस्ट्रीब्यूटर, डीलर, सहकारी समितियों एवं वितरण केंद्रों तक कहीं भी स्टॉक हेराफेरी, जमाखोरी, कालाबाजारी या अधिक मूल्य वसूली हो रही है, तो इसकी जिम्मेदारी केवल निजी विक्रेताओं की नहीं बल्कि निगरानी के लिए जिम्मेदार विभागीय अधिकारियों की भी बनती है।

 

उन्होंने मांग की कि पूरे बस्तर संभाग में खाद वितरण की संपूर्ण श्रृंखला की जांच की जाए, जिसमें—

 

✅ खाद कंपनियों द्वारा जारी स्टॉक

 

✅ रैक पॉइंट पर प्राप्त स्टॉक

 

✅ परिवहन एवं लॉजिस्टिक रिकॉर्ड

 

✅ C&F एजेंट एवं डिस्ट्रीब्यूटर

 

✅ डीलर एवं सब-डीलर

 

✅ मार्कफेड, LAMPS (लार्ज एरिया मल्टीपरपज सोसायटी), PACS एवं सहकारी समितियां

 

✅ शासकीय गोदाम एवं वितरण केंद्र

 

✅ POS मशीनों के बिक्री रिकॉर्ड

 

✅ GST, बिलिंग एवं स्टॉक रजिस्टर

 

का स्वतंत्र सत्यापन कराया जाए।

 

उन्होंने कहा कि यदि किसी स्तर पर रिकॉर्ड एवं वास्तविक स्टॉक में अंतर, कालाबाजारी, जमाखोरी, अधिक मूल्य वसूली अथवा किसानों के साथ आर्थिक शोषण के प्रमाण मिलते हैं, तो संबंधित डिस्ट्रीब्यूटर, डीलर, परिवहनकर्ता, सहकारी संस्था के प्रबंधक, गोदाम प्रभारी तथा निगरानी के लिए उत्तरदायी विभागीय अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय की जाए।

 

बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा एवं जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) ने मांग की है कि कृषि विभाग, सहकारिता विभाग, पुलिस विभाग, मार्कफेड, आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW), राजस्व विभाग तथा वित्तीय जांच विशेषज्ञों को शामिल करते हुए संयुक्त विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया जाए।

 

प्रमुख मांगें

 

🔹 नानगुर खाद प्रकरण की न्यायिक अथवा SIT जांच

 

🔹 विगत तीन वर्षों के खाद एवं बीज वितरण का विशेष ऑडिट

 

🔹 रैक पॉइंट से किसान तक संपूर्ण सप्लाई चेन का फोरेंसिक ऑडिट

 

🔹 सभी डिस्ट्रीब्यूटर, डीलर एवं सहकारी समितियों का भौतिक सत्यापन

 

🔹 स्टॉक हेराफेरी एवं कालाबाजारी के मामलों में एफआईआर दर्ज कर आपराधिक कार्रवाई

 

🔹 अधिक मूल्य वसूली से प्रभावित किसानों को क्षतिपूर्ति

 

🔹 जांच रिपोर्ट सार्वजनिक कर दोषियों की जवाबदेही तय करना

 

नवनीत चाँद ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 14, 21, 38, 39(ब), 39(स) एवं 46 राज्य को किसानों के हितों की रक्षा तथा संसाधनों के न्यायसंगत वितरण की जिम्मेदारी सौंपते हैं। किसानों के लिए सब्सिडी पर उपलब्ध कराए जाने वाले उर्वरकों में यदि भ्रष्टाचार, कालाबाजारी या स्टॉक हेराफेरी होती है, तो यह केवल आर्थिक अपराध नहीं बल्कि किसानों के अधिकारों पर सीधा हमला है।

 

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार इस पूरे मामले में निष्पक्ष एवं समयबद्ध कार्रवाई नहीं करती है, तो बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा एवं जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) किसानों के हितों की रक्षा हेतु व्यापक जनजागरण अभियान, जिला स्तरीय आंदोलन तथा लोकतांत्रिक जनसंघर्ष प्रारंभ करेगी।

“किसानों की सब्सिडी पर डाका डालने वालों को संरक्षण नहीं, कठोर कार्रवाई चाहिए।”

“खाद की कालाबाजारी बंद करो — किसानों को उनका अधिकार दो।”

 

 

Related Articles

Back to top button