सामाजिक समरसता निमित्त मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के चरित्र को आत्मसात करना होगा।

अन्य’ के प्रति सहज सम्मानजनक और भेदभाव रहित व्यवहार सामाजिक समरसता का परिचायक है।
– एल. ईश्वर राव, समन्वयक एक घंटा राष्ट्र के नाम।
जगदलपुर,नवीन श्रीवास्तव। एक घंटा राष्ट्र के नाम अभियान के तहत श्रीराम मंदिर रेलवे कालोनी, संजय गाँधी वार्ड में बैठक संपन्न हुई। श्रीराम मंदिर में प्रभु श्रीराम की स्तुति की गयी। वक्ताओं ने अपने उद्बोधन में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के जीवन को सामाजिक समरसता का सबसे बड़ा प्रतीक मानते हुए प्रभु श्रीराम द्वारा सबरी के जूठे बेर का खाया जाना, निषादराज को बार-बार गले लगाना,चित्रकूट में कोल-भील को अपने परिवार के सदस्यों की तरह व्यवहार करना,गिद्धराज जटायू का अंतिम संस्कार स्वयं अपने हाथों से किये जाने व हनुमान, सुग्रीव, अंगद, नल-लील,जामवंत आदि के साथ बंधुत्व व आत्मीयता पूर्ण व्यवहार को समरसता के अद्भुत और श्रेष्ठ उदाहरण निरूपित किया और उनके चरित्र को आत्मसात करने की जरूरत बताया।
साथ में बैठक के विषय “सामाजिक समरसता सशक्त राष्ट्र का आधार स्तम्भ” पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए एल.ईश्वर राव समन्वयक एक घंटा राष्ट्र के नाम ने अपने उद्बोधन में सशक्त राष्ट्र राष्ट्रवासियों की एकजुटता पर निर्भर होने और एकजुटता के लिए सामाजिक समरसता को आवश्यक तत्व बताते हुये सामाजिक समरसता को विशुद्ध रूप से व्यक्ति का अन्य के प्रति सहज सम्मानजनक और भेदभाव रहित व्यवहार से होना बताया। एल.ईश्वर राव ने आगे कहा कि सामान्यतः समता और समानता की बात की जाती है, किन्तु यह एक सीमा तक रहता है। विविधता प्रकृति प्रदत्त है। देश, काल, प्रकृति, स्वभाव, संस्कार, रुचि, क्षमता आदि की भिन्नता के कारण मनुष्यों के विकास के स्तर में भी भिन्नता अवश्यंभावी है। इन विविधताओं के कारण जो भेद रहता है, उसका समाधान समरसता से सम्भव है। साथ ही समाज की विविध विशेषताओं को समानता के नाम पर नष्ट भी नहीं किया जा सकता, अपितु समरसता के सूत्र में इन भिन्नताओं के साथ सामंजस्य स्थापित किया जा सकता है। समानता का वास्तविक व्यावहारिक रूप समरसता से ही प्राप्त होगा। सामाजिक समरसता से तात्पर्य अपने वर्ग, जाति और समुदाय से भिन्न लोगों के प्रति सहज सम्मानजनक और भेदभाव रहित व्यवहार। ‘अन्य’ के प्रति प्रेम और आत्मीयता पूर्ण व्यवहार ही सामाजिक समरसता का परिचायक है। सामाजिक चेतना के जागरण के लिए सम्पूर्ण समाज का अविभक्त और परस्पर प्रेमपूर्ण होना आवश्यक है। जिसके लिए हम सभी को मिलकर प्रयास करना होगा। जिस पर उपस्थित लोगों ने समवेत स्वर में सामाजिक भेदभाव से ऊपर उठकर परस्पर भेद-भाव रहित सम्मानजनक व्यवहार करने को संकल्पित हुए।
बैठक में कैलाश राठी,कार्तिक सेना,अजय पाल सिंह जसवाल, संजय चौहान, डी के पराशर, मिथिलेश इणाणी, रेखा नायक,गायत्री बडकस,अनिता सिह आदि ने भी अपना विचार प्रस्तुत किये।
इस दौरान मुकेश शर्मा,रवि शर्मा,प्रकाश साहू,मिलन विश्वास, गौतम आचार्य, सुनील कुमार दास,जीपी यादव, रामनरेश पांडेय, पूनम शर्मा, तेज मिश्रा, रीता मंडल, ज्योति चौहान,रोशनी सेना,पूर्णिमा,नीतू सोनी, अंजू ठाकुर,सरिता सेना, धनमति देवी, सोनाली सेना, सुनील जैन, कौशिक शुक्ला, निर्मल यादव, घनश्याम माने, सुनील जैन, राजकुमारी बेसरा आदि आदि गणमान्य नागरिक उपस्थित रहें हैं।



