I love you…यहाँ मैं और तुम के बीच प्रेम कितना प्रासंगिक!!

 

नवीन श्रीवास्तव,लेखक,पत्रकार/

शाश्वत प्रेम के समर्थन में विशेष …

 

 

I love you- इसमें एक “मैं” है और एक” तुम” है…बीच में शब्दों के साथ हासिल करने का एक भरमजाल व्यक्त नहीं होने की स्थिति में भावनाओं को प्रकट करने की एक ध्वनि समूह… love you दो इंसानों के बीच की दूरी को बयां करने का सबसे सिद्ध वाक्य हो एक सरल रास्ता की चलो अब कह देते है .. सकता है थोड़ा अटपटा लगे पर शोध के लिए प्रकाशपरक मार्ग है!

 

इसमें एक कर्ता है” मैं” ….जो कह रहा you से की मैं हूं तुम्हारे लिए यह प्रगटीकरण है प्रेम यहाँ बयां नहीं हुआ तो कहना पड़ रहा ..अगर आप प्रेम में भीग गए है रस से सराबोर है तो हो सकता है ..यह विवशता में ,मजबूरी में मुँह से निकल रहा हो या कहना पड़ रहा हो…प्रेम में इस तरह के खूबसूरत मौके आते है ..जब आपको प्रेम ने चुन लिया हो या यह भी बहुत संभव है कि यहाँ कहने और होने में फर्क हो और मैं यहां you को झूठ कह रहा हो .. पर आई I अगर प्रेम में है तो you मात्र एक माध्यम है पर हो यह रहा कि आपको प्रेम ने चुना हो यह जीवन में यह सबसे खूबसूरत समय है ..अगर ऐसा है तो (लेखक का कहना/मानना है कि आप “I”और “you” दोनो से ज्यादा कद्र प्रेम की करें)खैर…

 

I love you -प्रगटिकरण है जहां” प्रेम” तो नहीं पर जिसे प्रेम ने चुना है वह करने वाला जो है वह कह रहा है …वह घोषणा करता है कि मैं तुमसे प्यार करता हूं ।प्रेम ने अभिव्यक्ति के लिए रास्ता चुना,या फिर किसी किसी और प्रयोजन से कहा जा रहा शब्दों से भाव को समझना जरूरी हो सकता यह ध्यान रखने योग्य बात है।

 

… वर्तमान समय में प्रेम जिसे हुआ है उसी कर्ता के रहमोकरम पर प्रेम का भविष्य है ..उसे लगता है मैंने कहा नहीं तो मुश्किल है जीना ? संभव है वह ऐसा इसीलिए कह रहा,या उसे कहना पड़ रहा क्योंकि you को प्रेम की पहले की अभिव्यक्ति समझ में नहीं आई या हो सकता है उसने यह महसूस ना किया हो..पर इतना तो है कि संवाद से पहले कहने से पहले प्रेम प्रकट नहीं हुआ अब कहने से हृदयस्थल को कितना भेद सकेगा यह देखना अलग विषय है!

 

यहां “मैं” प्रेम को राजी दिखता है पर यह “तुम” के बीच अभी दूरी है । I और you के बीच अंतराल है यह दोनों के राजी होने के बिना संभव नहीं है कि बीच की दूरी खत्म हो .. विलय बिना प्रेम संभव नहीं जब तक you राजी नहीं प्रेम बीच में ही होगा ,दोनों के बीच … प्रेम को इंतजार है कि बीच की दीवार ढह जाए तभी एक ही अनुभूति से एहसास से दोनों भीग पायेंगे।

 

जब तक “तुम “अपना ह्रदय का सारा दरवाजा ना खोल दे ..यहाँ प्रेम का आनन्द दोनों के लिए जश्न में नहीं बदलेगा पर (याद रखें आपको प्रेम बहुत बार इस संसार में चुनता तो किसी माध्यम से ही है जैसे किसी लड़के को लड़की से हुआ या फिर लड़की को…पर प्रेम की अनुभूति किसी भी माध्यम से जन्म ले सकता है..और आप किसी माध्यम से ज्यादा प्रेम के प्रति ईमानदार है तो ..प्रेम आपके लिए ही है पर यहां यह विषय नहीं है )

I love you कहने वाला समझ रहा कि you ह्रदय का दरवाजा खोल दे तो बात बने.. यहाँ शर्त है प्रेम में शर्त, प्रेम का शर्त प्रेम के लिए शर्त…??? पर प्रेम तो निः शर्त होता है… यहां तो प्रेम को बांटने स्वीकृति की जरूरत पड़ रही है..केवल देने के बजाय पाने की अपेक्षा क्या यहाँ ज्यादा नहीं है .. यह तो उल्टा स्वरूप है प्रेम का !!

 

l Love you- कहना प्रेम को प्रकट करने का कमजोर माध्यम है ..हो सकता है क्योंकि I के कहने से पहले you के भाव दशा से प्रकट नहीं हुआ ..you को क्या समझ नहीं आया …हो सकता you को भी इंतजार हो या हो सकता है उसे प्रेम ने छुआ नहीं हो और भी बातें हो सकती है पर प्रेम के एक एहसास से शब्दों के परे भीगने की बात ही अलग है.. I और you के बीच दूरियां ना हो, दीवार ना हो ..शब्दों के बजाय अगर अनुभतियों की भाषा समझ आये तो फिर ज्यादा सार्थकता है शब्दों से तो झूठ भी गढ़ा जा सकता है ..तो अच्छा है ना कि कहने,सुनने के बजाय प्रेम के मौन भाषा को समझे ..आज इतना भी जान समझ गए तो झूठे शब्दों के जाल से …हम बच सकते है प्रेम को कहने और होने के ढंग से समझना जरूरी है..फिर तो यह इंद्रियों से परे आत्मा में अमृत वर्षा से कम नहीं ..।

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