28,243 मीट्रिक टन धान की कमी पर सरकार जवाब दे, समिति प्रबंधकों पर ही जिम्मेदारी डालना उचित नहीं : नवनीत चाँद

लगभग ₹89.30 करोड़ मूल्य के धान के अंतर की निष्पक्ष जांच हो, CBI जांच की मांग
जगदलपुर। बस्तर संभाग में वर्ष 2025-26 की धान खरीदी के बाद 382 उपार्जन केंद्रों के भौतिक सत्यापन में 28,243 मीट्रिक टन धान का अंतर सामने आने की जानकारी सार्वजनिक हुई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस धान का मूल्य लगभग ₹89 करोड़ 30 लाख 87 हजार आंका गया है। बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा के मुख्य संयोजक एवं जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के बस्तर संभाग अध्यक्ष नवनीत चाँद ने कहा कि यह मामला अत्यंत गंभीर है और इसकी वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि संभाग में बड़ी मात्रा में धान खरीदी के बाद भौतिक सत्यापन में सामने आया यह अंतर केवल समिति प्रबंधकों की जिम्मेदारी मानकर समाप्त नहीं किया जा सकता। सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि यह अंतर खरीदी, तौल, परिवहन, उठाव, संग्रहण, मिलिंग या किसी अन्य चरण में किस कारण से सामने आया।
यदि समय पर उठाव नहीं होने, धान के लंबे समय तक पड़े रहने, नमी अथवा प्राकृतिक सूखत के कारण किसी प्रकार की कमी हुई है तो उसका भी प्रचलित विभागीय नियमों एवं वैज्ञानिक मानकों के आधार पर निष्पक्ष आकलन होना चाहिए। वहीं यदि जांच में किसी स्तर पर वित्तीय या प्रशासनिक अनियमितता प्रमाणित होती है तो जिम्मेदार लोगों पर नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।
पहले भी लगातार उठाया है मुद्दा
नवनीत चाँद ने कहा कि बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा ने धान खरीदी और उठाव से जुड़े विषयों को पहले भी लगातार उठाया है। 2 मई 2026 को जनता दरबार, जगदलपुर के माध्यम से कलेक्टर बस्तर को ज्ञापन देकर धान संबंधी अनियमितताओं की जांच, दोषियों पर कार्रवाई एवं जवाबदेही तय करने की मांग की गई थी। इसके बाद जून 2026 में समय पर धान उठाव नहीं होने तथा लगभग ₹15.50 करोड़ के नुकसान से संबंधित सामने आई जानकारी पर भी संगठन ने निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारों की जवाबदेही की मांग की थी।
उन्होंने कहा कि अब सामने आई 28,243 मीट्रिक टन के अंतर की जानकारी हमारे पूर्व में उठाए गए सवालों को और गंभीर बनाती है।
हमारी स्पष्ट मांग
बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा एवं जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) की मांग है कि—
– लगभग ₹89.30 करोड़ मूल्य के बताए जा रहे धान के अंतर की CBI से निष्पक्ष जांच कराई जाए।
– 28,243 मीट्रिक टन के अंतर का केंद्रवार विवरण सार्वजनिक किया जाए।
– खरीदी से लेकर तौल, परिवहन, उठाव, संग्रहण और मिलिंग तक पूरी प्रक्रिया का रिकॉर्ड आधारित ऑडिट कराया जाए।
– समिति प्रबंधकों तक जिम्मेदारी सीमित न रखते हुए पूरी प्रक्रिया में शामिल सभी संबंधित स्तरों की भूमिका की जांच की जाए।
– सूखत, खराबी अथवा अन्य प्राकृतिक कारणों का दावा होने पर उसका नियमों के अनुरूप स्वतंत्र एवं वैज्ञानिक आकलन कराया जाए।
– जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाए, उसके विरुद्ध FIR, विभागीय कार्रवाई एवं नियमानुसार शासकीय राशि की वसूली की जाए।
– जांच समयबद्ध तरीके से पूर्ण कर निष्कर्ष सार्वजनिक किए जाएं।
नवनीत चाँद ने कहा कि बस्तर के किसान के धान का हिसाब पारदर्शी तरीके से होना चाहिए। हमारा उद्देश्य किसी निर्दोष व्यक्ति को दोषी ठहराना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि यदि इतनी बड़ी मात्रा में धान का अंतर सामने आया है तो उसकी वास्तविक वजह और जिम्मेदारी निष्पक्ष जांच से सामने आए।
“28 हजार 243 मीट्रिक टन धान के अंतर का पूरा सच सामने आना चाहिए। समिति प्रबंधकों पर ही पूरी जिम्मेदारी डालने के बजाय खरीदी से लेकर मिलिंग तक पूरी व्यवस्था की जांच हो। बस्तर के किसानों के हित में हमें आरोप नहीं, निष्पक्ष जांच और स्पष्ट जवाब चाहिए। दोषी प्रमाणित होने वाले किसी भी व्यक्ति को कानून से संरक्षण नहीं मिलना चाहिए।”



