उमेश पाल हत्याकांड से स्टूडेंट्स ‘क्रिमिनल’ बन गए, कमरा भी नहीं मिल रहा

इलाहाबाद यूनिवर्सिटी का 131 साल पुराना मुस्लिम हॉस्टल 11 दिन से बंद है। इसी के कमरा नंबर-36 से पुलिस ने एक वकील सदाकत खान को उठाया था। पुलिस का कहना है कि सदाकत माफिया अतीक अहमद का गुर्गा है और 24 फरवरी को हुई उमेश पाल की हत्या में शामिल था।
सदाकत की पढ़ाई पूरी हो चुकी थी, इसके बावजूद वह हॉस्टल में गलत तरीके से रह रहा था। उसकी गिरफ्तारी के बाद से हॉस्टल सील है। यूनिवर्सिटी में एग्जाम चल रहे हैं, लेकिन स्टूडेंट्स रेलवे स्टेशन या ग्राउंड में रात काट रहे हैं। उन पर ‘क्रिमिनल’ का ठप्पा लग गया है और शहर में कोई किराए पर कमरा भी नहीं दे रहा।
हॉस्टल को क्रिमिनल्स का अड्डा घोषित कर दिया गया है। यहां के 107 कमरों में 193 बच्चे रह रहे थे। 13 मार्च से एग्जाम शुरू हो चुके हैं, पर छात्रों के पास रहने की जगह नहीं है। किताबें भी हॉस्टल के कमरों में बंद हैं। सवाल यही है कि क्या सच में मुस्लिम हॉस्टल क्राइम का अड्डा बना हुआ था? क्या सभी छात्रों को इसकी सजा मिलनी चाहिए।



