छत्तीसगढ़

साहित्य तीर्थ से उड़ी खुशबू..हृदय में बसे लालाजी’ संस्मरण संकलन विमोचित 

 

जुटे साहित्यकार,संपादक सनत ने कहा -बस्तर के लेखकों की जिम्मेदारी वे अपने छेत्र के लेखकों को मुख्यधारा में बनाए रखे

 

जगदलपुर,नवीन श्रीवास्तव।साहित्य ऋषि लाला जगदलपुरी जी इस बस्तर की धरा के साहित्यिक वटवृक्ष रहे हैं जिनकी छत्रछाया में अनेक नामचीन साहित्यकारों में साहित्यिक पटल में अपना स्थान बनाया है। लालाजी की रचनावली, स्वभाव, विचारधारा, आदतें और बस्तरिया संस्कृति के प्रति समर्पण पर बस्तर वरिष्ठ कनिष्क उन्नीस साहित्यकारों का दस्तावेज ’हृदय में बसे लालाजी’ संस्मरण संकलन का विगत दिनों 17 दिसम्बर 2023 को लालाजी के जन्मदिवस पर विमोचित हुआ। अवसर था लाला जगदलपुरी जिला गं्रथालय के साहित्य महोत्सव का।

मंचस्थ अतिथि साहित्यकारों पद्मश्री धर्मपाल सैनी, बी एल विश्वकर्मा, बी एन आर नायडू, सुभाष पाण्डे, डॉ योगेन्द्र मोतीवाला, विजयसिंह, अवध किशोर शर्मा, दादा जोकाल, विनय श्रीवास्तव, जिला शिक्षा अधिकारी श्रीमती भारती प्रधान एवं आकाशवाणी केन्द्राध्यक्ष बलबीर सिंह कच्छ के साथ पुस्तक के संपादक सनत कुमार जैन के करकमलों द्वारा संकलन का विमोचन हुआ।

इस कड़ी में अपने विचार रखते हुये सैनी जी ने कहा कि लालाजी ने बस्तर की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिये मौलिक कार्य किया है।

नायडू जी ने कहा कि लालाजी के जीवन के पलों का संग्रह कर लालाजी को अमर कर दिया गया है।

विजय सिंह ने कहा कि आज भी लालाजी का कमरा उनकी याद दिलाता है। उनकी यादें ताजा हो जाती हैं। जब भी मिलते थे वे अध्ययनरत होते थे।

अवध किशोर शर्मा जी ने लालाजी रचित अनेक पंक्तियां का पाठ कर सभा को सम्मोहित कर दिया। लालाजी की प्रसिद्ध पंक्ति ’उनको इस बात का घमण्ड है कि उनको किसी बात का घमण्ड नहीं है’ पढ़ी।

विनय श्रीवास्तव ने कहा कि लालाजी का संस्मरण लेखन का कार्य श्रमसाध्य है सभी लेखकों और संपादक सनत जैन को धन्यवाद। लालाजी अप्रकाशित रचनाओं का शीघ्र ही वे प्रकाशन करेंगे।

बलबीर सिंह कच्छ ने कहा कि लालाजी ने अपनी किताबों में बस्तर के समाज का इतना अच्छा चित्रण किया है कि वैसा लेखन सजीव लेखन लगता है।

सनत जैन ने सुप्रसिद्ध कहानीकार महेश्वर नारायण सिन्हा की पुस्तक में लिखी टिप्पणी का पाठ किया, जिसका मर्म था कि बस्तर का साहित्यकार इतना सबकुछ कर लेने के बावजूद इतना गुमनाम क्यों है ? ये बस्तर के लेखकों की जिम्मेदारी है कि वे अपने क्षेत्र के लेखकों मुख्यधारा में बनाये रखें।

लाला जगदलपुरी ग्रंथालय के प्रभारी अधिकारी शरदचंद्र गौड़ ने सफल कार्यक्रम की बधाई देते हुये भविष्य में और कार्यक्रमों के आयोजन की बात कही।

इस कार्यक्रम शहर के विपिन बिहारी दाश, ऋषि शर्मा ऋषि, सुरेश चितेरा, शशंाक शेण्डे, बादल प्रभारी पूर्णिमा सरोज, भरत गंगादित्य, चमेली नेताम, स्मृति मिश्रा, मोहिनी ठाकुर, सतरूपा मिश्रा, गीता शुक्ला, ज्योति चौहान, अलावा बस्तर संभाग के कई साहित्यकार उपस्थित थे। कार्यक्रम में सम्मिलित होने नगरी से श्रीमती अमिता रवि दुबे भी आयीं थी।

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