JDS ऐसे बढ़ा रही BJP और कांग्रेस की चिंता

बेंगलुरु.    दक्षिण भारतीय राज्य कर्नाटक का चुनाव दिलचस्प होने के आसार हैं। इसकी वजह 2004, 2008 और 2018 चुनाव के नतीजे हैं, जब राज्य में त्रिशंकु सभा रही थी। अब 2023 में भी इस तरह की स्थिति बनती नजर आ रही हैं और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों ही तीसरे दल जनता (सेक्युलर) को रोकने के पूरे प्रयास कर रही है। विस्तार से समझते हैं।

कहा जा रहा है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल समझ रहे हैं कि 224 सीटों वाले कर्नाटक में बहुमत हासिल करने का एक ही रास्ता जेडीएस की रफ्तार को रोकना है। दोनों ही बड़े दल रैलियों और कार्यक्रमों में जेडीएस के खिलाफ प्रचार कर कर रहे हैं। वहीं, जेडीएस भी खुलकर पलटवार कर रही है।

भाजपा ने क्या कहा?
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बेलगावी में एक चुनावी रैली के दौरान क्षेत्र में भाजपा की सीटें बढ़ाने की बात कही। साल 2004, 2008 और 2018 में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, लेकिन बहुमत का आंकड़ा हासिल नहीं कर सकी थी। नतीजा यह हुआ कि पार्टी को 2006 में जेडीएस के साथ जाना पड़ा और 2008 और 2018 में दल बदल के जरिए सत्ता में आई।

शाह ने कहा था, ‘एक ओर एक पार्टी है, जो 25 से 30 सीटें जीतना चाहती है और कांग्रेस के साथ सरकार चलाना और कर्नाटक के लोगों का अपमान करने वाली वंशवाद की राजनीति चलाना चाहती है।’ उन्होंने कहा था, ‘कांग्रेस और जेडीएस दो दलों की तरह नजर आ सकते हैं, लेकिन मैं कर्नाटक के लोगों को बताना चाहता हूं कि जेडीएस को दिया गया हर वोट कांग्रेस के खाते में जाएगा। यह केवल कांग्रेस को जीत हासिल करने में मदद करेगा।’

कांग्रेस ने भी घेरा
मांड्या क्षेत्र में पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा था, ‘पिछली बार इस क्षेत्र की 7 सीटों में से हमें एक भी सीट नहीं दी। सभी पर जेडीएस ने जीत हासिल की। इस बार ऐसा नहीं होना चाहिए। क्या आप ऐसा दोबारा करेंगे? आपको हमे मांड्या में 5-6 सीटें देना होंगी।’ कांग्रेस दिग्गज का यह बयान वोक्कलिगा समुदाय का गढ़ माना जाता है, जो पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा का समर्थन करता है।

जेडीएस का पलटवार
राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने कांग्रेस पर सवाल उठा दिए थे। उन्होंने कहा था, ‘वे कह रहे हैं कि जेडीएस सत्ता में नहीं आएगी और इसलिए लोगों को हमें वोट नहीं देना चाहिए। गुटबाजी कांग्रेस को सत्ता में नहीं आने देगी। उनके नेता एक-दूसरे की आंखों में नहीं देख पार रहे हैं। उनके पास अपनी पार्टी पर नियंत्रण की ताकत नहीं है और वे मेरी पार्टी के बारे में बात कर रहे हैं।’

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