पहली बार प्रेशर पॉलिटिक्स के शिकार दिखाई दे रहे हैं? मुख्यमंत्री अशोक गहलोत

जयपुर. राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पहली बार प्रेशर पॉलिटिक्स का शिकार दे रहे हैं। बसपा से कांग्रेस में आए विधायक वाजिब अली और संदीप यादव को राजनीति नियुक्ति देने पर इस चर्चा को बल मिला है। बसपा से आए से 6 विधायक मंत्री राजेंद्र गुढ़ा के अगुवाई में काफी दिनों से नाराज चल रहे थे। इन विधायकों ने कांग्रेस से समर्थन वापस लेने की धमकी तक डे डाली थी। सीएम ने दोनों विधायकों को राज्यमंत्री का दर्जा देकर इन विधायकों की नाराजगी दूर करने की कोशिस की है। हालांकि, सैनिक कल्याण मंत्री राजेंद्र गुढ़ा अब भी नाराज बताए जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार राजेंद्र गुढ़ा कैबिनेट मंत्री का पद चाहते हैं। इसलिए कैबिनेट फेरबदल की मांग ने जोर पकड़ लिया है। बसपा मूल के सभी विधायक पायलट गुट की बगावत के समय सीएम गहलोत की सरकार को बचाने में निर्णायक भूमिका में रहे थे। राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस की तीन प्रत्याशियों की जीत के द्वार भी बसपा विधायकों के बदौलत ही खुले थे। 

बसपा विधायकों का दबाव लाया रंग

गहलोत सरकार ने हाल ही में भरतपुर के नगर से विधायक वाजिब अली को राजस्थान राज्य खाद्य आयोग का अध्यक्ष बनाया गया है। जबकि अलवर के तिजारा से विधायक संदीप यादव को भिवाड़ी शहरी आधारभूत विकास बोर्ड का अध्यक्ष बनाया है। दोनों ही विधायकों को लंबे समय से नियुक्ति का इंतजार था। इनके द्वारा प्रेशर पॉलिटिक्स का सिलसिला भी लगातार जारी था। पिछले दिनों में इन विधायकों द्वारा कई ऐसे बयान दिए गए जिनकी वजह से सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े हुए और सरकार के लिए मुश्किलें पैदा हुईं थी। सीएम गहलोत ने विधायक जोगिंदर सिंह अवाना, लाखन मीना, दीपचंद खैरिया पहले ही राजनीतिक नियुक्ति का तोहफा दे दिया था। जबकि राजेंद्र गुढ़ा को कैबिनेट में शामिल किया था। लेकिन विधायक वाजिब अली और संदीप यादव को पद नहीं मिला था। मंत्री राजेंद्र गुढ़ा इन विधायकों की आढ़ में गहलोत सरकार पर लगातार दबाव बना रहे थे।  गिर्राज सिंह मलिंगा को राजनीतिक नियुक्ति का इंतजार है। राजस्थान में विधानसभा चुनाव 2023 के अंत में होने वाले है। ऐसे में पायलट कैंप के साथ-साथ बसपा मूल के विधायक अभी से हिसाब करने में जुटे हैं। बसपा विधायकों का दर्द है कि सरकार में उनकी सुनवाई नहीं होती है। क्षेत्र में लोगों की नाराजगी झेलनी पड़ रही है। बसपा विधायक चाहते है कि कांग्रेस में शामिल हो गए है। ऐसे में विधानसभा चुनाव में टिकट भी कांग्रेस का मिले। लेकिन कांग्रेस की तरफ से ठोस आश्ववासन नहीं मिल रहा है। 

अब टिकट पक्का करने का दबाव 

मंत्री राजेंद्र गुढ़ा खुद को कैबिनेट मंत्री नहीं बनाए जाने से अब भी नाराज चल रहे हैं। हाल ही में प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में हुई जनसुनवाई में राजेंद्र गुढ़ा ने खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर कर दी थी। राजेंद्र गुढ़ा ने कहा- हम कांग्रेस कल्चर के आदमी नहीं है। हमने कांग्रेस का साथ दिया। हम से जो वाद किया वह पूरा नहीं हुआ है। प्रदेश कांग्रेस प्रभारी अजय माकन ने वादा नहीं निभाया। जानकारों का कहना है कि बसपा विधायक गहलोत सरकार पर रणनीति के तहत दबाव बना रहे हैं। विधायक विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का टिकट पक्का करना चाहते हैं। इसलिए सरकार पर दबाव बना रहे हैं। सीएम गहलोत के धुर विरोधी सचिन पायलट इन विधायकों की कैबिनेट में एंट्री के खिलाफ रहे हैं। इसलिए मात्र एक विधायक को ही कैबिनेट में शामिल किया गया था। सचिन पायलट का कहना है कि कांग्रेस कार्यकर्तां ने पुलिस की लाठियां खाई है। इसलिए टिकट पर पहला हक उन्हीं का बनता है। दरअसल अब विधानसभा चुनाव में सवा साल का ही वक्त बचा है। लिहाजा अब विधायकों की कवायद अपना टिकट बचाने की ज्यादा है। वहीं राज्यसभा और राष्ट्रपति चुनाव भी अब सम्पन्न हो चुके हैं जिनके जरिए विधायक दबाव बना सकते थे। हालांकि मुख्यमंत्री की मंशा सियासी संकट के दौरान साथ देने वाले लोगों को ईनाम देने की है। यही वजह है कि आने वाले दिनों में राजनीतिक नियुक्तियों की तीसरी सूची आने की संभावना जताई जा रही है। 

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