ग्रामीणों को नही है शव वाहन की जानकारी: 10 किमी दूर खाट पर ले जाना पड़ता है शव

दंतेवाड़ा. राज्य और केंद्र सरकार अपनी योजनाओं के प्रचार पर करोड़ों-अरबों रुपए खर्च करतीं हैं, लेकिन इन योजनाओं की जानकारी अंदरूनी गांवों तक आज भी नहीं पहुंच पा रही है। यह तस्वीर इसकी बानगी है। शुक्रवार को दंतेवाड़ा जिले के कुआकोंडा इलाके से यह तस्वीर सामने आई इसमें उल्टी खाट पर चार ग्रामीण एक बुजुर्ग महिला का शव रेंगानार से टिकनपाल अंतिम संस्कार के लिए लेकर जा रहे थे।

ग्रामीणों के पास गाड़ी के किराए का पैसा नही था। वे यह बात भी नहीं जानते थे कि उन्हें शव वाहन मिल सकता है। ग्रामीणों को शव वाहन योजना के बारे में कुछ भी पता नहीं था। अंदरूनी इलाकों में इस तरह की योजनाओं का प्रचार-प्रसार नहीं होने से ग्रामीण अब भी तकलीफों का सामना कर रहे हैं। सरकारें दावा करती हैं कि वे अंतिम व्यक्ति तक हर योजना का लाभ पहुंचा रहीं हैं लेकिन जब इस तरह की तस्वीरें सामने आती हैं तो सब स्पष्ट हो जाता है।

दरअसल टिकनपाल गांव की रहने वाली मृतक महिला जोगी पोडियाम का यह शव है। इस शव को ले जाने वाले परिजन करीब 10 किलोमीटर सडक़ के रास्ते शव लेकर चलते रहे। सैकड़ों जागरुक नागरिक निकले उन्होंने भी मदद करने का प्रयास नहीं किया। ये लोग एक फोन करते और स्वास्थ्य विभाग को सूचित करते कि शव वाहन की व्यवस्था की जाए, लेकिन लोग देख कर निकलते रहे। इसी बीच कुआकोंडा पुलिस को जानकारी मिली।

पुलिस मौके पर पहुंची। थाना प्रभारी चंदन कुमार भी मौके पर पहुंच गए। जवानों और खुद टीआई ने पिकअप पर शव को रखवाया। साथ ही कुछ जवानों को घर तक शव के साथ भेजा। रेंगानार से करीब 25 किमी दूर है टिकन पंचायत। मृतक महिला के रिश्तेदार रमेश बताते हैं कि वह कुछ दिन पहले ही महिला टिकनपाल से रेंगानार आई थी। बीमार होने के चलते उसकी शुक्रवार सुबह मौत हो गई। परिजन के पास पैसा नही था, इस लिए उल्टी खाट कर टिकनपाल ले जा रहे थे। करी 10 किमी पैदल भी चले

Related Articles

Back to top button