गुजरात में प्रकृति का कहर: तेज बारिश और बाढ़ से राज्य के कई जिलों में जनजीवन बुरी तरह से प्रभावित

तेज बारिश और बाढ़ की मार झेल रहे गुजरात में भूंकप के झटके महसूस किए गए। आज दोपहर बाद गुजरात में भूंकप के हल्के महसूस किए गए। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 3.2 मापी गई। भूंकप के कारण जान-माल की क्षति की कोई जानकारी सामने नहीं आई है। लेकिन बारिश और बाढ़ के बीच आए भूंकप ने लोगों में एक और डर बढ़ा दिया।
इस बीच बारिश के कारण राज्य में लोगों की मौत का सिलसिला लगातार बढ़ता जा रहा है। तेज बारिश और बाढ़ के कारण अभी तक गुजरात में 100 से अधिक लोगों को मौत हो चुकी है। बाढ़ और बारिश से गुजरात के दक्षिणी जिलों में सबसे ज्यादा परेशानी है। डांग, नवसारी और वलसाड के साथ कच्छ में लाखों लोगों को अपना गांव-घर छोड़कर सुरक्षित स्थान पर शरण लेना पड़ा है।
दक्षिण गुजरात में बाढ़ के कारण ज्यादा परेशानी-
एनएच पर पानी चढ़ने के कारण चार राष्ट्रीय राजमार्गों को बंद कर दिया गया है। आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार दक्षिणी गुजरात में बारिश और बाढ़ से मरने वालों की संख्या 54 हो गई। जबकि पूरे राज्य में मरने वालों की संख्या लगभग 100 से हो गई है। अभी 14,000 से अधिक लोग अस्थायी आश्रयों में रह रहे हैं।
वलसाड और डांग जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी-
दूसरी ओर मौसम विज्ञान विभाग की ओर से जारी पूर्वानुमान के अनुसार आज वलसाड और डांग जिलों में भारी बारिश हो सकती है। इन दोनों जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। पूर्णा और अंबिका नदियां तीन स्थानों पर उफान पर हैं। वेरावल में पूर्णा नदी का स्तर 23 फीट तक बढ़ गया है जो एक हाई-अलर्ट स्थिति है। सरदार सरोवर डैम भी पानी से लबालब है। यहां डैम से पानी स्पील कर रहा है।
बाढ़ से 422 पंचायतें बनीं टापू-
दूसरी ओर महुवा में पूर्णा नदी 13.41 मीटर पर बह रही थी जो अब 13 मीटर है। सोनवाड़ी के पास अंबिका नदी भी 8.53 मीटर पर बह रही है। लेकिन वर्तमान में 6.03 मीटर है। गुजरात के राजस्व मंत्री राजेंद्र तिवारी ने बताया कि बाढ़ के कारण चार स्थानों पर राष्ट्रीय राजमार्ग बंद करने के अलावा, 20 राज्य राजमार्ग, 24 अन्य सड़कें और 422 पंचायत सड़कें बंद हैं। आपदा प्रबंधन विभाग पानी में फंसे लोगों को निकालने का अभियान चला रही है। इस बीच भूकंप के झटके से लोगों में दहशत का माहौल है।



