विधानसभा भंग हुई तो क्या होगा?भाजपा की सरकार बनेगी या लगेगा राष्ट्र्पति शासन

महाराष्ट्र में सियासी संकट अपने चरम की ओर बढ़ रहा है। संकेत हैं कि उद्धव ठाकरे बाजी हार गए हैं। किसी भी समय इस्तीफा दे सकते हैं। वहीं संजय राउत ने कहा है कि विधानसभा भंग की जा सकती है। राजनीति के जानकारों का मानना है कि यदि विधानसभा भंग करने की सिफारिश होती है तो दो स्थितियां बनेंगी। पहली – भाजपा कहे कि उसके पास बहुमत है इसलिए विधानसभा भंग न की जाए और उसे बहुमत साबित करने का मौका दिया जाए। वहीं यदि राष्ट्रपति शासन लगता है तो इसके 6 माह में चुनाव कराने होंगे। इसकी आशंका कम ही है क्योंकि अभी ढाई साल पहले ही प्रदेश में चुनाव हुए हैं।

…तो महाराष्ट्र में दूसरी बार राष्ट्रपति शासन

राष्ट्रपति शासन लगता है तो महाराष्ट्र में तीन साल में दूसरी बार ऐसा मौका होगा। इससे पहले अक्‍टूबर 2019 में महाराष्‍ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के लंबे समय तक मुख्‍यमंत्री का चयन नहीं हो सका, तो केंद्र ने राष्‍ट्रपति शासन लगा दिया था। इसके बाद एक नाटकीय घटनाक्रम के तहत देवेंद्र फडनवीस ने सुबह 5 बजे सीएम पद की शपथ ले ली थी। हालांकि बहुमत साबित नहीं कर सके थे।

वहीं शिवसेना के कद्दावर नेता रहे एकनाथ शिंदे पर पूरे देश की नजर है, जिनका दावा है कि उनके साथ 40 विधायक हैं। इस बीच, हर किसी से जेहन में एक ही सवाल है कि क्या उद्धव ठाकरे गिर जाएगी? क्या भाजपा एक बार फिर सरकार बनाने की स्थिति में हैं? इसके लिए महाराष्ट्र विधानसभा का गणित समझना जरूरी है। महाराष्ट्र विधानसभा में अभी 287 सीटें हैं। सरकार बनाने के लिए बहुमत का जरूरी आंकड़ा 144 का है।

भाजपा इस बार जल्दबाजी के मूड में नहीं है। इतना कुछ होने के बाद भी भाजपा के किसी बड़े नेता का बयान नहीं आया है। भाजपा में भी हलचल जरूर है, लेकिन पार्टी ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं। माना जा रहा है कि यह सियासी ड्रामा अभी करीब एक हफ्ते और चल सकता है। आगे यह संभव है कि एकनाथ शिंदे का गेम प्लान पुख्ता होने के बाद भाजपा की ओर से सरकार बनाने का दावा पेश किया जा सकता है या उद्धव ठाकरे सरकार से बहुमत साबित करने के लिए कहा जा सकता है। अभी एकनाथ शिंदे के साथ कितने विधायक हैं, इसकी आधिकारिक जानकारी नहीं है। मंगलवार सुबह यह आंकड़ा 12 था, जो बढ़कर 22, फिर 27 और 36 हो गया। शिवसेना ने कहा कि उसके पास 55 में से 35 विधायक हैं। वहीं बुधवार सुबह गुवाहाटी एयरपोर्ट पर एकनाथ शिंदे के साथ 40 विधायक देखे गए।

बता दें, साल 2019 के विधानसभा चुनाव नतीजों में भाजपा को 106, शिवसेना को 56, एनसीपी को 53 और कांग्रेस को 44 सीटें मिली थी। भाजपा और शिवसेना चुनाव से पहले साथ थीं और ऐसे में दोनों के पास बहुमत का आंकड़ा था। हालांकि, गठबंधन टूट गया और भाजपा को सरकार बनाने के लिए 40 सीटों की जरूरत हो गई। भाजपा ने अजित पवार की मदद से सरकार बनाने की नाकाम कोशिश की। आखिर में शिवसेना ने एमसीपी और कांग्रेस के साथ हाथ मिलाकर सरकार बनाई।

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