EVM में कैद प्रत्याशियों का भाग्य, 78% हुआ मतदान, 16 को आएंगे नतीजे

छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ विधानसभा उपचुनाव में 10 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला मतदाताओं ने कर दिया। अब उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में कैद हो गई है। शाम 5 बजे तक 78 फीसदी से अधिक मतदान हो चुका था। 5 बजे के बाद केंद्रों के अंदर मौजूद मतदाताओं की वोटिंग जारी है। वोटिंग का फाइल प्रतिशत अभी जारी नहीं हुआ है। उपचुनाव के परिणाम 16 अप्रैल को आएंगे। भाजपा-कांग्रेस सहित सभी प्रत्याशी अपनी-अपनी जीत का दावा कर रहे हैं।
राजनांदगांव जिले के नक्सल प्रभावित साल्हेवारा में मतदान का प्रतिशत बढ़ने की जानकारी मिली है। मतदान पूरा होने के बाद ही संवेदनशील बूथों की स्थिति स्पष्ट होगी। गंडई-छुईखदान इलाके में 70 फीसदी तक मतदान हुआ है। वहीं खैरागढ़-जालबांध में भी 60 से 65 फीसदी से अधिक मतदान हो चुका है। खैरागढ़ विधानसभा में औसत 80 फीसदी तक मतदान होने की उम्मीद है। गर्मी का मौसम होने के कारण सुबह से ही लोग बड़ी संख्या में मतदान केंद्र पहुंचने लगे थे। खैरागढ़ विधानसभा क्षेत्र में 291 मतदान केंद्र बनाए गए हैं, जिसमें 53 मतदान केंद्र माओवाद प्रभावित संवेदनशील माने गए हैं। 86 मतदान केंद्रों को राजनीतिक कारणों से संवेदनशील बताया गया है। मतदान में 1164 अधिकारियों और कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। वहीं सुरक्षा के लिए 22 कंपनियां तैनात है। कड़ी सुरक्षा के बीच स्ट्रांग रूम में ईवीएम जमा होंगे।

2018 में मात्र 870 वोट से हुई थी जीत
खैरागढ़ सीट पर 2018 के विधानसभा चुनाव में जनता कांग्रेस छत्तीसगढ (जे) ने जीत हासिल की थी। यहां जेसीसीजे के प्रत्याशी देवव्रत सिंह को 61,516 वोट मिले थे। वहीं भाजपा के कोमल जंघेल को 60,646 और कांग्रेस के गिरवर जंघेल को 31,811 वोट मिले थे। वहीं इस सीट में जीत का मार्जिन केवल 870 वोट का था। विधायक व राजा देवव्रत सिंह के निधन के बाद यह सीट रिक्त हो गई थी, जिस अभी उपचुनाव हुआ है। इस उपचुनाव में कांग्रेस ने जीत के बाद खैरागढ़-गंड़ई को जिला बनाने की घोषणा की है

3 उप चुनाव में कांग्रेस ने मारी बाजी
बता दें कि इससे पहले दंतेवाड़ा, चित्रकोट और मरवाही में हुए उप चुनाव में कांग्रेस ने जबरदस्त प्रदर्शन कर 3 सीटों में जीत हासिल की थी। अगर कांग्रेस खैरागढ़ भी फतेह करती है तो कांग्रेस के विधायकों की संख्या बढ़कर 71 हो जाएगी। अगर सीट में भाजपा बाजी मारती है तो भाजपा के विधायकों की संख्या बढ़कर 15 हो जाएगी। वर्तमान में कांग्रेस के 70 विधायक हैं। वहीं भाजपा के 14 विधायक हैं। बसपा के 2 और जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जेसीसीजे) को 3 सीटें हैं।

डॉ. रमन और भूपेश की प्रतिष्ठा दांव पर
खैरागढ़ उप चुनाव में सीएम भूपेश बघेल और पूर्व सीएम डॉ. रमन सिंह की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। भाजपा इसे सत्ता का सेमीफाइनल मान रही है। यहीं से छत्तीसगढ़ में जीत की शुरुआत होने और आगामी विधानसभा में सत्ता परिवर्तन की बात कही जा रही है। वहीं सीएम भूपेश बघेल बड़े अंतर से जीत के साथ 2023 में सरकार बनाने का दावा कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ में इससे पहले हुए 3 उपचुनाव में कांग्रेस को जीत मिली है। टीम भूपेश बघेल अपनी जीत का सिलसिला जारी रखना चाहेगी। वहीं राजनांदगांव सीट से डॉ. रमन सिंह विधायक हैं। इससे पहले वे राजनांदगांव सीट से लोकसभा के सांसद भी रह चुके हैं। खैरागढ़ उपचुनाव को छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम और मौजूदा सीएम के बीच की जंग के तौर पर देखा जायेगा।

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