प्रेम के समर्थन में-1,पर… इंद्रियों की भूख बढ़ाने वाले और देश की नई,युवा पीढ़ियों को रंगीन सपने बेचने वाले बाजारू सौदागरों को जूता मारना ही होगा..


पर… इंद्रियों की भूख बढ़ाने वाले और देश की नई,युवा पीढ़ियों को रंगीन सपने बेचने वाले बाजारू सौदागरों को जूता मारना ही होगा..
धार ..एक अभियान /15 वर्षों से विसंगतियों के खिलाफ लगातार यह स्तम्भ आप सभी प्रबुद्ध पाठकों के लिए सादर ,श्रीवास्तव,पत्रकार,लेखक, बस्तर से
प्रेम के समर्थन में मिलकर खड़े होने की जरूरत है ..परंतु इंद्रियों की भूख बढ़ाने वाले ,उन्हें उत्तेजित कर रंगीन सपने बेचने वाले बाजारू सौदागरों को जूता मारना जरूरी है..देश में लगभग ..युवाओं की आबादी बेहोशी में है.. अब वे समझे कैसे बाजार और अनुभव हीनता सब मामला बिगाड़ रहा है.. वैसे भी होने और दिखने के बीच जो फर्क होता है उसे संस्कार, सह्रदयता और संवेदनशीलता से समझा जा सकता है .. बच्चे कैसे समझें कि जीभ और जुबान को जो अच्छी लगे ..जरुरी नहीं वह अच्छा हो..हो सकता है वह मामला बिगाड़ दे ..बच्चों को कैसे पता चले कि जो आंखों को अच्छा लगता है उससे दिमाग में शार्ट,-शर्किटिंग भी हो सकता है ..इसलिए हमें ही जागना होगा.. जिस्म के तमाम नसों और नाड़ियों में ..वासना के बजाय अधिक से अधिक प्रेम बहे इतना कि वह खून में शामिल हो जाए और दिल तक पहुंचे ..और… और दिमाग से खत्म होते जा रहे ..रिश्तो के मर्म को झकझोर कर जगा दे केवल दीवारों में -प्रेम ही ईश्वर है या ईश्वर ही प्रेम है कब तक लिखा जाता रहेगा ..समझिए प्रेम ही वह संजीवनी है (जारी)




