हर रिश्तों को मिलाकर एक ही रिश्ता तन का रिश्ता कर दिया है,नववर्ष पर मिलन एवं कवि सम्मेलन का आयोजन


जगदलपुर ।ये पंक्तियां साहित्य एवं कला समाज के अध्यक्ष सनत सागर ने वर्तमान टीवी सीरियलों पर कटाक्ष करते हुये अपने रचना पाठ में पढ़ीं।
इस कठिन कठोर जिन्दगी को जाने कितना आसान बना दिया है
न तो कोई अब मां है न ही बहन है और नहीं है कोई सिर्फ पत्नी।
एकता कपूर ने सारे रिश्तों को मिलाकर एक रिश्ता ही बना दिया है
अपनी मर्जी का तन चुनने का सिर्फ और सिर्फ तन का रिश्ता बना दिया है।
शनिवार की शाम, साहित्य एवं कला समाज जगदलपुर द्वारा नववर्ष के अवसर पर अंचल के कवियों को लेकर मिलन समारोह और कवि सम्मेलन आयोजित किया। सोनी गली सुभाष वार्ड में आयोजित इस कार्यक्रम में शहर के गणमान्य स्थापित साहित्यकारों ने नवीन साहित्यकारों को सुनकर उनका उत्साहवर्धन किया।
कार्यक्रम में गांधीवादी विचारक एव वरिष्ठ चिंतक पद्मश्री धर्मपाल सैनी, वरिष्ठ साहित्यकार एवं चिंतक श्री जयचंद्र जैन, समानसेविका एवं लेडी दानवीर कर्ण सुश्री अनिता राज, पर्यावरणविद व ममोला जैसी उत्कृष्ठ काव्य की रचयिता श्रीमती शांती तिवारी, समाजसेविका श्रीमती शैल दुबे, तथा सोनी गली के वरिष्ठ सदस्य श्री क्रांति कुमार श्रीवास्तव मंचस्थ अतिथि थे।
मां सरस्वती की अर्चना करते हुये ममता मधु ने मधुर आवाज में कविता प्रस्तुत की।
मंच संचालन करते हुये युवा गजलकर महेश तेन्नेटी ने अपनी गहरी शायरियों से लगभग चार घंटे चले कार्यक्रम को बांधे रखा। अपने गजल संग्रह ’अल्फाज बिखरे हुये से’ से साहित्यिक मैदान में आने वाले महेश तेन्नेटी जी ने अपना विशेष प्रभाव डाला। वर्तमान अव्यवस्थाओं से लेकर प्रेम की गली तक चलती हुयी उनकी शायरियां सुनकर साहित्यिक समाज अचरज से भरा हुआ था।
बस्तर क्षेत्र के एकमात्र पैरोडी कवि श्री विमल तिवारी जी ने वृक्षारोपण और पर्यावरण को समर्पित रचना पढ़ी।
वनवासी वनवासी काटना नहीं, तू रूख झाड़ को।
युवा शौर्य कवि बाबू बैरागी ने अपनी गरजती आवाज में किसानों की समस्याओं को रखा।
छत्तीसगढ़ी फिल्मों के स्क्रिप्ट राइटर युवाकवि ने अपना मधुर प्रेमगीत प्रस्तुत किया।
सतरूपा मिश्रा ने अपनी मधुर आवाज में बचपन को याद करवाते हुये अपनी लम्बी कविता का पाठ किया।
साहित्यिक कार्यक्रमों में पहली दूसरी बार शिरकत करने वाले नवीन साहित्यकारों में गिरजानंद मिश्रा, ओमप्रकाश ध्रुव, मनोज उपाध्याय, अनुकृति मिश्रा आदि थे।
विपिन बिहारी दाश जी ने इस अवसर पर अपनी नवीन कृति तन्हाई सभी को सप्रेम भेंज की।
आपसी सहयोग से संपन्न कार्यक्रम में स्वरूचि भोज की व्यवस्था भी थी। कार्यक्रम में अपनी उत्कृष्ठ कविताओं का पाठ करने वाले व शामिल होने वाले बंशीलाल विश्वकर्मा, वसंत चव्हाण, नरेन्द्र पाढ़ी, के आर तिवारी, रविन्द्रनाथ विश्वास, डॉ प्रकाश मूर्ति, किशोर मनवानी, विशाल जैन, खुशबू कस्तूरी, प्रदीप कैवर्त, मास्टर देव जैन सरला जैन और श्रीमती खिलेश्वरी ध्रुव आदि उपस्थित थे।
इसके बाद संध्या में उसी पंडाल में सोनी गली परिवार का स्वरूचि भोज के साथ मिलन समारोह हुआ। जिसमें सोनी परिवार, तिवारी परिवार, दाश परिवार, जोशी परिवार, विश्वकर्मा परिवार, श्रीवास्तव परिवार, सूर्यवंशी परिवार, आचार्य परिवार, डे परिवार, जैन परिवार, गोविन्द परिवार ने जमकर आनंद उठाया। कार्यक्रम का संचालन, सनत जैन, सोनू श्रीवास्तव, शोभना जोशी, रेखा सोनी व रितिका तिवारी ने किया।



