लोकसभा में कहा मोदी सरकार ने – दो बच्चों की नीति लाने का कोई इरादा नहीं

नई दिल्ली
जनसंख्या नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय स्तर पर ‘दो बच्चों की नीति’ लाने की कोई योजना नहीं है। शुक्रवार को लोकसभा में केंद्र सरकार ने एक सवाल के जवाब में यह बात कही। नरेंद्र मोदी सरकार ने ऐसी कोई नीति ना लाने के पीछे कई वजहें गिनाई हैं। लोकसभा सांसद उदय प्रताप सिंह ने स्वास्थ और परिवार कल्याण मंत्रालय (MohFW) से इस बारे में सवाल किया था। जवाब में राज्य मंत्री (MoHFW) डॉ भारती पवार ने कहा कि सरकार का ऐसा कोई विचार नहीं है।
सरकार क्यों नहीं लाएगी ‘दो बच्चों की नीति’?
मंत्री ने अपने जवाब में चार वजहें गिनाई हैं। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे का हवाला देते हुए सरकार ने कहा कि अब वांछित प्रजनन दर घटकर 1.8 हो गई है। मतलब औसतन हर जोड़ा 1.8 बच्चे चाहता है। दूसरी वजह जनसंख्या और विकास तो लेकर एक अंतरराष्ट्रीय समझौते को बताया गया है जो भारत को परिवार नियोजन में जबर्दस्ती से रोकती है। तीसरी वजह दुनियाभर से मिले अनुभव हैं।
सरकार का कहना है कि जबर्दस्ती करने से जनसांख्यिकीय विसंगतियां हो जाती हैं जैसे लिंग के आधार पर गर्भपात, लड़कियों का त्याग और उनकी भ्रूण हत्या। चौथी वजह के रूप में कुछ राज्यों का उदाहरण दिया गया है। केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों ने बिना कोई सख्त प्रावधान लागू किए प्रजनन दर कम किए हैं।



