यह शहर खूबसूरत होगा जरूर। पर तुम्हारे बिना यह बहुत उदास भी होगा


चर्चा -ए-चौराहा:चांदनी चौक…एक बेबाक अनकही कहानियां( किश्त-8) /नवीन श्रीवास्तव, पत्रकार
आपने पढ़ा चौराहों के इस जगदलपुर शहर का बड़ा नाम है इस कदर की जिन्हें पहचान चाहिए अक्सर
उनके बड़े-बड़े छोटे पर्चे ,पोस्टर, होल्डिंग्स चौक में नजर आ जाते है … चांदनी चौक की कहें तो .. इसके तीन मुख्य रास्तों में बने डिवाइडर पर आपको आये दिन किसी ना किसी के पर्चे ,पोस्टर तस्वीरें मिल जाएंगे ..अवसर किसी के आगमन का हो,नियुक्ति का हो या जन्मदिन मौका सियासी जश्न का हो ,किसी खुशी का या रुतबे का इस चौक के इर्दगिर्द मानो सड़क के बीच का विभाजक बना ही इसलिए हो..अपना शहर है..अब चौक शहर ,सड़क से पूछने की क्या जरूरत ..वह कुछ बोलेगा भला …टांग लो हम किसी से कम नहीं के तर्ज पर … दरअसल शहर का मतलब पढ़े-लिखे लोग और जहां पढ़े लिखे लोग होंगे ..जाहिर है वहां पोस्टर भी होगा ..पर्चे भी होंगे और होल्डिंग्स भी .. ।पोस्टर कई तरह का होता है छोटा ,बड़ा और बहुत बड़ा भी जितना बड़ा जेब उतना बड़ा पोस्टर! ये जो पोस्टर होते हैं..होर्डिंग्स होते हैं.. इनकी बिरादरी भी होती है कोई महंगा होता है ..कोई सस्ता होता है ..पर मकसद सबका एक जैसा लगभग होता है… छोटा हुआ हुआ तो यह दीवारों से चिपकता है और कहीं टँगता है और अगर.. बडा हुआ तो देखना यह होर्डिंग्स बन गुर्राता है….। पोस्टर छोटा हो या बड़ा हो इससे क्या फर्क पड़ता है नाम दिल पर उतरे तो यह भगवान से कम नहीं है..फिर क्या मुश्किल की पत्थर पर लिख दो तो पानी पर तैर जाए… पर नाम का दिल में जगह जरूरी है वरना दीवारों में जतन से सहेजे गए नाम भी अव्यवस्था से खुद को कहां बचा पाते हैं… इसी का उदाहरण है चांदनी चौक से कुछ आगे व्यावसायिक परिसर है.. जहाँ लिखा है … पंडित दीनदयाल उपाध्याय व्यवसायिक परिसर ..इसे पोस्टर ना समझे..यह एक व्यकितत्व और कृतित्व का सम्मान है..एक ऐसे शख्सियत का नाम है जो एक मजबूत व शसक्त भारत चाहते थे पर उन्हें क्या मालूम कि उनके अपने नाम को इस तरह एक इमारत पर लिखा जाएगा.. फिरआंख बंद कर उसे बदहाली के खंडहर में तब्दील होने दिया जायेगा..ऐसे समय मे पंडित दीनदयाल जी का यह कहना प्रासंगिक लग रहा है जिसमे उन्होंने कहा था–अवसर वाद से राजनीति के प्रति लोगों का विश्वास खत्म होते जा रहा ।.. क्या अच्छा नहीं होगा अगर वे जो इस परिसर में अव्यवस्था के जिम्मेदार हैं और अगर पंडित दीनदयाल जी को अपना आदर्श मानते हैं…तो ऐसे लोग अगली बार किसी अवसर पर जब भी उन्हें याद करें या कोई कार्यक्रम करें तो इसी परिसर में किया जाए.. संभव है इस तरह के पहल से इस व्यवसायिक परिसर में व्याप्त अव्यवस्था का निदान हो जाए ..(जारी)



