जगदलपुर करकापाल मसीही कब्रिस्तान के साथ दोबारा जिला प्रशासन द्वारा छेड़ छाड करना कांग्रेस सरकार का खोखला काम मसीही समाज के साथ अन्याय – नरेंद्र भवानी जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ जे पार्टी


मामले में जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के पार्टी के प्रदेश सयुंक्त महासचिव नरेंद्र भवानी ने जानकारी देते हुए बताये की जगदलपुर करकापाल कब्रिस्तान जो कई पीढ़ी से वहां उपस्थित है जहां सामाज के द्वारा वाहा शवों को गाड़ा जाता है, किन्तु एक दो व्यक्ति एवं एक प्राइवेट भूमि को लाभ दिलाने के प्रयास से कांग्रेस पार्टी की सरकार द्वारा दोबारा कब्रिस्तान के साथ सड़क के रास्ते बहाने कई पीडियो से उपस्थित मसीही कब्रिस्तान से रास्ता हेतु जो कार्य करने का प्रयास किया जा रहा है वो समाज के साथ अन्याय है और कांग्रेस पार्टी की सरकार के मंत्री विधायक है केवल मुखदर्शक बने है, जबकि सरकार में नहीं आने से पहले इसी कब्रिस्तान हेतु उक्त मांगो लेकर समाज ने किया था बड़ा आंदोलन और उस आंदोलन में सभी बड़े कांग्रेसी नेता बढ़चढ़ कर हिस्सा लेकर प्रोटेस्ट किये थे ! लेकिन आज वहीं नेता गण के राज में समाज अपने आप को ठगा हुवा महसूस कर रहे है !
जबकि जिस रास्ते की बात जिलाप्रशासन कर रही वास्तव में वाहा कोई रास्ता नहीं था बल्कि उस लाइन में तो कई कब्रे कई पीडियो से है ! अगर रास्ता बनाने पर जिलाप्रशासन काम करती है तो वह कब्रे कहा जायेगी आखिर किसी के धर्म को ठेस पहुंचा कर कांग्रेस की सरकार क्या साबित करना चाहती है समझ से परे है ! इस जिलाप्रशासन के निर्णय का पुर जोर विरोध करती है जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ जे पार्टी ! आज कल में जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ जे पार्टी ज्ञापन देकर जिलाधिकारी बस्तर को समाज हित में निर्णय लेने का निवेदन करेगी, ताकि किसी समाज के साथ भेदभाव जैसा माहौल ना बन सके !
पूर्व में भी भाजपा साशित काल में यही कब्रिस्तान के बाउंड्री हेतु सरकारी सीमांकन पर ही वर्तमान बाउंड्री बनी सरकारी बजट से फिर आज वर्तमान कांग्रेस की सरकार में यह सीमांकन गलत कैसे जबकि पूर्व में सामाज का यह कब्रिस्तान को असामाजिक तत्व के लोगो के द्वारा भीड़ भाड़ के साथ बल पूर्वक बाउंड्रीवाल को तोडा गया था कब्रों पर बाथरूम तक किया गया था आखिर समाज को अकेला निहत्ता समझने का दुशाहस ना करें सरकार पुरे मामले में सिर्फ कुछ एक से दो लोगो को लाभ दिलाने के उद्देशय से इतना बड़ा कदम ना ले सरकार होगा पुरजोर विरोध, करेंगे जिलाकार्यलय का घेराव नहीं सहेंगे अत्याचार
वहीं कब्जे की बात करें तो सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि कब्जाधारी व्यक्ति उस जमीन या संपत्ति का अधिकार लेने का दावा कर सकता है, जो 12साल या उससे अधिक समय से बिना किसी व्यवधान के उसके कब्जे में है. यही नहीं, शीर्ष अदालत ने यह भी कहा है कि अगर ऐसे व्यक्ति को इस जमीन से बेदखल किया जा रहा है तो वह कानूनी सहायता भी ले सकता है
और यह सब कब्जे के दिन से शुरू होती है मियाद, ( लिमिटेशन एक्ट 1963 ) के तहत निजी अचल संपत्ति पर लिमिटेशन (परिसीमन) की वैधानिक अवधि 12 साल जबकि सरकारी अचल संपत्ति के मामले में 30 वर्ष है. यह मियाद कब्जे के दिन से शुरू होती है. सुप्रीम कोर्ट के जजों जस्टिस अरुण मिश्रा, जस्टिस एस अब्दुल नजीर और जस्टिस एमआर शाह की बेंच ने इस कानून के प्रावधानों की व्याख्या करते हुए कहा कि कानून उस व्यक्ति के साथ है जिसने अचल संपत्ति पर 12 वर्षों से अधिक समय से कब्जा कर रखा है. अगर 12 वर्ष बाद उसे वहां से हटाया गया, तो उसके पास संपत्ति पर दोबारा अधिकार पाने के लिए कानून की शरण में जाने का अधिकार है
जबकि जगदलपुर करकापाल कब्रिस्तान तो कई पीडियो से मसीही समाज के स्तेमाल में आता रहा है आज भी लगभग समाज के लाखो लोग इसी कब्रिस्तान से जुड़े हुए है एवं उनकी आस्थाये जुडी हुई है कांग्रेस की सरकार इतना बड़ा अत्याचार करने का प्रयास ना करें



