असम: एआईयूडीएफ पार्टी को भाजपा ने बताया था बांग्लादेशी समर्थक, उसके मुस्लिम विधायक ने संस्कृत में ली शपथ, बोले- यह सभी भाषाओं की जननी

असम की नवनिर्वाचित विधानसभा का पहला सत्र शुक्रवार को सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के कुछ विधायकों के संस्कृत में शपथ लेने के साथ शुरू हुआ। लेकिन सोनाई से विपक्षी ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) के विधायक करीमुद्दीन बरभुइया ने कुछ ऐसा किया, जिसने सभी को हैरान कर दिया। बीजेपी द्वारा ‘बांग्लादेशी समर्थक’ करार दिए जाने वाली पार्टी के विधायक ने संस्कृत में शपथ लेकर कई लोगों को चौंका दिया। बरभुइया उन 16 एआईयूडीएफ विधायकों में शामिल हैं, जो इस बार 126 सदस्यीय सदन के लिए चुने गए हैं। जबकि उनकी पार्टी के विधायकों ने असमिया और बंगाली में शपथ ली, एक मुस्लिम विधायक को संस्कृत में शपथ लेते देखना दुर्लभ था।

शपथ लेने के बाद बरभुइया ने कहा, “संस्कृत सभी भाषाओं की जननी है। मेरी मातृभाषा बंगाली है। हम एक ऐसे राज्य में रहते हैं जहां असमिया आधिकारिक भाषा है। संस्कृत बंगाली और असमिया सहित सभी भाषाओं की जननी है। शपथ लेना मेरे लिए विशेष क्षण था, क्योंकि जिंदगी में यह पहली बार हो रहा था। मैं इसे विशेष बनाना चाहता था, इसलिए मैंने अपने देश की प्राचीन भाषा में बोलना पसंद किया।” विधायक ने आगे कहा कि मेरा धर्म मुझे अपनी संस्कृति का सम्मान करना सिखाता है और मुझे सीखने की भी अनुमति देता है। मैं लोगों को दिखाना चाहता हूं कि भारत एक विविध देश है जहां एकता हमारी ताकत है। मुझे नहीं लगता कि संस्कृत का धर्म से कोई लेना-देना है। यह एक है प्राचीन भारतीय भाषा और एक भारतीय होने के नाते मेरे मन में इस भाषा का बहुत सम्मान है।

बरभुइयां के अलावा, शुक्रवार को सात और विधायकों ने संस्कृत में शपथ ली। पिछले साल बिहार से कांग्रेस विधायक शकील अहमद खान ने संस्कृत में शपथ लेकर सबको चौंका दिया था। उन्होंने कहा था कि उन्होंने भारत की विविधता में एकता के बारे में समाज को संदेश देने के लिए संस्कृत में शपथ ली थी। वहीं, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा, पूर्व मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल, विपक्ष के पूर्व नेता देबब्रत सैकिया और जेल में बंद सीएए विरोधी कार्यकर्ता अखिल गोगोई ने शुक्रवार को असम की 15वीं विधानसभा के सदस्य के तौर पर शपथ ली। 

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