आपदा के बीच जन्म लिया ..अब उसी लड़,सीख बड़ा हो रहा…बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा अब…कहीं दिमाग मे जगह बना रहा तो कहीं.. दिलों में रास्ता

अंश — बस्तर में पानी ,सड़क से लेकर रोजगार,स्वास्थ्य ,निजीकरण जैसे अनेकोनेक मुद्दे पर डटे यह वही बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा है जिसे गत वर्ष कोरोना दस्तक के समय लोगों ने स्वरूप लेते देखा था शिशुवस्था में ही मोर्चा ने खुद को आजमाने आपदा को अवसर में बदला ताकि मोर्चा को खड़ा किया जा सके चुनौती कठिन था पर कदम बढ़ते गए ..

जगदलपुर/ नवीन श्रीवास्तव

नैसर्गिक शक्तियों से भरपूर बस्तर के रहवासियों में हौसले में भी हरापन कम नहीं है ..यही कारण है कि भीषण संकट के इस दौर में दूसरों के लिए कुछ कर गुज़रने के इरादे लिए वे फरिश्तों की तरह सड़कों पर दिख रहे हैं ..मैदान में जुटे हैं.. जिन्हें जरूरत है उनके घरों तक पहुंच रहे हैं

एक तरफ शासन ,प्रशासन पूरी सामर्थ्य के साथ कोरोना पराजित करने जुटी है दूसरे तरफ पड़ोसी ,मित्र ,रिश्तेदार ,सत्ता व प्रशासन से जुड़े लोग..अनेकोनेक संस्था , संगठन भी नेक इरादे लिए अपनी भूमिका रहे कि इस कठिन समय से मिलकर लड़ा जाए.. मास्क के साथ सोशल डिस्टेंसिंग तक लोगों के बीच पहुंच रहे हैं ऐसी तस्वीरों से आपदा भी पहले कमजोर पड़ेगा.. फिर उसकी मौत तय है ऐसे में मुक्ति मोर्चा भी कोरोना के खिलाफ मैदान में है और लोगों को योजनाबध्द ढंग से राहत पहुंचाने जुटी है । मोर्चा के सम्भागीय संयोजक एवं अपने कार्यशैली के साथ कुशल वक्ता के रूप में जाने व पहचाने जाने वाले नवनीत चांद का कहना है कि लॉक डाउन का असर सब पर पड़ा है वहीं गरीब एवं मध्यम वर्ग के लोग इससे काफी प्रभावित हैं जाहिर है रोज कमाने खाने वालों की समस्याएं बढ़ गई है ,ऐसे में मोर्चा का प्रयास है कि कोरोना संक्रमण से जूझ रहे अधिक से अधिक लोगों एवं परिवारों तक जितना संभव हो पहुँचने मोर्चा लगी है निगम वार्डो से लेकर ग्रामपंचायतों तक राहत सामग्री के साथ मोर्चा जहाँ 5-5 वार्डो के बीच दो -आक्सी मीटर रख यह कोशिश कर रही है जरूरमन्दों को इसका लाभ मिले वहीँ ग्राम पंचायतों में भी यथासंभव लोगो के बीच इस तरह के मदद ले मोर्चा पहुंच रही है । बस्तर में पानी ,सड़क से लेकर रोजगार,स्वास्थ्य ,निजीकरण जैसे अनेकोनेक मुद्दे पर डटे यह वही बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा है जिसे गत वर्ष कोरोना दस्तक के समय लोगों ने स्वरूप लेते देखा था शिशुवस्था में ही मोर्चा ने खुद को आजमाने आपदा को अवसर में बदला ताकि मोर्चा को खड़ा किया जा सके चुनौती कठिन था पर कदम बढ़ते गए ..अब इस बार कोरोना के पहले से भी मुश्किल संक्रमण दौर में .अब उनके पास अवसर है कि वे खुद को साबित करें..और इसे लेकर मोर्चा लगातार मैदान में दिख रहा ना केवल शहर बल्कि शहर के साथ गांव –गांव पहुच रहे मोर्चा जिस तरह बस्तर संस्था संगठनों के बीच खुद को स्थापित करने अपनी जड़े जमा रही है …उसे लेकर चर्चे लगभग हर गलियारे में है और कितना है..क्या है … इससे ज्यादा बेहतर बात मोर्चा के लिए यह है की वह बस्तर के कहीं किसी के दिमाग मे जगह बना रहा तो कहीं दिलों ..मतलब रास्ता तैयार है…मुकाम गढ़ने हैं।

Related Articles

Back to top button