लॉकडाउन में जिंदगी और जरूरत के बीच, माँ बेबस बच्चे की भूख की चीख के आगे-मुक्तिमोर्चा

BY-Naveen Shrivastava
मुक्तिमोर्चा ने मद्त मुहिया करवा, विभागीय जिमेदारो से , जिमेदारी निर्वहन हेतु अपील की-नवनीत चाँद
जगदलपुर ।बस्तर अधिकार मुक्तिमोर्चा के मुख्य सयोंजक नवनीत चाँद व सह सयोंजक समीर खान ने सयुक्त रूप से बयान जारी करते हुए कहा कि ,कोरोना संक्रमण के तीव्र गति से फैलाव को रोकने हेतु सरकार द्वारा लगाए गए लॉकडाउन ने जिंदगी और जीने की जरूरत के बीच एक संघर्स पैदा कर दिया है। जिसका उदाहरण आज बस्तर जिले के जगदलपुर ब्लाक के आड़ावाल ग्राम पंचायत के रेलवे पारा निवाशी माँ गीता के द्वारा मुक्तिमोर्चा को फोन कर दुदमुहे बच्चे की भूख की चीख में मद्त की गुहार ने यह बताया। उक्त घटना स्थल पर मुक्तिमोर्चा की टीम ने पहुच मद्त मुहैया करवाई तब यह पता लगा कि गरीब परिवार द्वारा टेंट हाउस में रोज काम कर रोज कमाने वाला परिवार आज लॉकडाउन कड़ी शर्तो के आगे बेबस नजर आया ,जिमेदार विभाग की हवा हवाई बातों की पोल इस बात से खुल रही है। कि विभागीय रिकॉर्ड में नाम दर्ज होने के बाद भी सहयार्थ योजनाओ ने जरूर के वक्त दम तोड़ दिया ,सरकार ,जिमेदार जनप्रतिनिधियों ,प्रशासन सयुक्त तैयारियों की छूट शर्तो में व लॉकडाउन के पक्षधर बुद्धिजीवियों के पास उतपन्न हो रही इन परिस्थितियों के लिए कोई हल अब तक नही है।यह बेहद चिंतनीय विषय है।कोरोना संक्रमण के फैलाव रोकने के लिए जान भी जहान भी के नारे के तर्ज पर बचाव की योजनाएं व तैयारी की जरूरत थी। पर अफसोस हमने पुराने मुसीबत से कुछ नहीं सीखा और अब हम कोरोना संक्रमण के जाल में तेजी से फंसते जा रहे है। हर बात के लिए जनता जिमेदार नहीं ,जनता ने जिमेदारो को चुना जनता के हितों का नेतृत्व करने के लिए पर उनके पास भी कोई ठोस समाधान का प्लान नहीं। मुक्तिमोर्चा द्वारा जिमेदार विभागीय अधिकारियों को सूचना दे ऐसी परिस्थितियों को उतपन न होने देने की अपील दूरभाष मे बात कर की ,इस दौरान मुक्तिमोर्चा के सोशल मीडिया प्रभारी ओम मरकाम व शहर उपाध्यक्ष सनी राजपूत भी मौजूद थे।*



