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बस मेरे और तुम्हारे होने में इतना फर्क है। कि तुम कम पर खुश हो जाते हो मुझे ज्यादा चाहिए ।।

 

पावन स्वतंत्रता दिवस पर विशेष/ नवीन श्रीवास्तव पत्रकार एवं लेखक, बस्तर

 

स्वतंत्रता क्या है कि …तुम अधिकार के साथ कर्तव्य को पूरी तरह जानते हो बिना कर्तव्यों की पूर्ति किया अधिकार नहीं मिलता.. *स्वतंत्रता है कि तुम पूरी तरह खिल सको पूर्णता के साथ .. चेतना के विस्तार लिए इस आत्मिक बोध के साथ कीअहम् ब्रह्मास्मि …जागरण की सीमा बहुत है* ।

 

हे देश के ईमानदार लोगों मैं जानता हूं .. इस देश की सारी व्यवस्थाएं आप जैसे लोगों से चल रही..आप सब ही माँ भारती के असली लाल हैं .. व्यवस्था चला रहे..जो जिम्मेदार होते हुए भरस्ट हैं वे कीड़े-पतंगे से ज्यादा कुछ नहीं..मुझे यकीन है ..एक दिन सब ठीक हो जायेगा.. है देश के आम लोगों.. क्या हुआ कि आप लोगों को कोई नहीं जानता,क्या हो गया कि जब सारे दुःख ,तकलीफों के बीच आप सब ईमानदारी से अपने हिस्से का काम करते हैं तो कोई तालियां नहीं बजाता.. तालियों की परवाह न करें ना ही बेवजह किसी के लिए बजाने में समय व्यर्थ करें तुम्हें कोई नहीं जानता इससे कोई फर्क नहीं पड़ता बस लगे रहो.. सच के साथ रहो ..आप सब जुटे रहें…दायित्वबोध लिए ईमानदारी से देश मजबूत होता है.. यही राष्ट्रवाद है ..डटे रहें *गले में मैं फलाने…मैं ढेकाने.. का पोस्टर टांग कर घुमने वाले मात्र जयजयकार के बीच रहने वाले जोकरों से कुछ नहीं होने वाला..अपने महंगे कपड़ों के अंदर ऐसे लोग निपट नंगे हैं* ईमानदारी सहज नहीं इन बेईमानों से,भरस्ट लोगों से कुछ नहीं हो सकता.. इनकी बड़ी इमारतों बड़ी गाड़ियों तामझाम काफ़िलों का कोई मतलब नहीं देश का एक-एक पैसा बहुत कीमती है अपने काम में लगे रहो डगर मुश्किल भरा है..पर *याद रखें सृजन के लिए..प्रसव वेदना से गुजरना ही पड़ता है..गुजरना ही होगा*..

 

वर्तमान में .इंद्रियों से रस भोगने को आमंत्रित करता बाजार..हमारे संवेदनाओं को दुर्बल बना रहा है..हमारी नई पीढ़ियां कमजोर हो रही है.. संवेदनाओं से रहित ह्रदय ..हमारे महान देश के स्मष्ठि भाव को तोड़ रहा है *लिए एक साथ चलते हैं मिलकर प्रपंच को छोड़..यह जो आज का दिन है खाश है.. इसमें तिरंगे की खुशबू है .. यह रोग प्रतिरोधक शक्ति से युक्त है थोड़ा जोर से सांस लो ..इस खुशबू में देश के लिए मर मिटने वाले बलिदानियों का अहसास है* बहुत कुछ कहना है..पर पहले एक साथ हो जाते हैं और केवल आँखों से नहीँ ..फेफड़े को फुला.. सांस के साथ .आजादी के पर्व .की खनक लिए आज आजादी के जश्न के मिठास को ह्रदय तक खींच लेते हैं… *आज देश के लिए मर मिटने की भावना हमारे इरादों को वज्र का बना सकता है ..जब कहीँ मुश्किलों का अँधेरा होगा काम आएगा*.. इसी उम्मीद नहीं वरन दृढ़ विश्वास के साथ ..सुप्रभात.. मां भारती की जय के साथ पावन स्वतंत्रता दिवस पर अशेष बधाईयों के साथ..

 

आपका ..

नवीन श्रीवास्तस्व,पत्रकार,लेखक हरेपन लिये बस्तर से

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