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उच्च न्यायालय में विचाराधीन मामले के बावजूद एनएमडीसी प्रबंधन पर प्रशासनिक आदेशों की अवहेलना का आरोप

 

गर्भवती महिलाओं सहित विस्थापित परिवारों के साथ कथित दुर्व्यवहार निंदनीय – मुक्ति मोर्चा ए, जनता कांग्रेस

दंतेवाड़ा,

बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा एवं जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के दंतेवाड़ा जिला अध्यक्ष रेमन मरकामी एवं संभागीय महामंत्री रामनाथ नेगी ने गत दिवस संयुक्त बयान जारी कर टेलिंग डैम क्रमांक-01 से प्रभावित विस्थापित परिवारों के साथ हुई कथित घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त की है।

नेताओं ने कहा कि टेलिंग डैम प्रभावित परिवारों के पुनर्वास एवं आवास से संबंधित प्रकरण वर्तमान में माननीय उच्च न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है। इसी दौरान अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) एवं अनुविभागीय दण्डाधिकारी, बचेली द्वारा पारित आदेश के अनुसार एनएमडीसी के टाइप-1 आवासों को प्रभावित परिवारों के अस्थायी पुनर्वास हेतु विधिवत आवंटित किया गया तथा इसकी लिखित सूचना एवं पालन हेतु नोटिस भी एनएमडीसी प्रबंधन को जारी किया गया।

इसके बावजूद आरोप है कि जब प्रभावित परिवार प्रशासनिक आदेश के अनुरूप आवंटित आवासों में रहने पहुँचे, तब एनएमडीसी के कुछ अधिकारियों द्वारा उन्हें आवास से बाहर निकालने का प्रयास किया गया तथा विद्युत आपूर्ति बाधित कर दी गई। यदि ऐसा हुआ है, तो यह केवल प्रशासनिक आदेशों की अवहेलना का प्रश्न नहीं, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया के सम्मान पर भी गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।

सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि प्रभावित परिवारों में लगभग छह गर्भवती महिलाएँ, बच्चे एवं बुजुर्ग भी शामिल हैं। ऐसे संवेदनशील समय में उनके साथ किसी प्रकार का कथित दबाव, भय या मूलभूत सुविधाओं से वंचित करना मानवीय संवेदनाओं के विपरीत है और इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा एवं जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) का स्पष्ट मत है कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 एवं 21 प्रत्येक नागरिक को समानता तथा गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार प्रदान करते हैं। प्रशासनिक आदेशों का पालन करना प्रत्येक संस्था एवं अधिकारी का दायित्व है। यदि किसी वैध आदेश की जानबूझकर अवहेलना की गई है, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही विधिसम्मत प्रक्रिया के अनुसार तय की जानी चाहिए।

हमारी प्रमुख मांगें:

1. एनएमडीसी बचेली प्रबंधन के संबंधित अधिकारियों की भूमिका की तत्काल निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
2. प्रभावित परिवारों को प्रशासन द्वारा आवंटित आवासों में सुरक्षित निवास सुनिश्चित किया जाए तथा विद्युत एवं अन्य मूलभूत सुविधाएँ तत्काल बहाल की जाएँ।
3. माननीय उच्च न्यायालय में विचाराधीन प्रकरण के अंतिम निर्णय तक किसी भी प्रकार की बलपूर्वक बेदखली या प्रतिकूल कार्रवाई पर रोक सुनिश्चित की जाए।
4. गर्भवती महिलाओं, बच्चों एवं बुजुर्गों की सुरक्षा एवं सम्मानजनक पुनर्वास की विशेष व्यवस्था की जाए।
5. प्रशासनिक आदेशों की कथित अवहेलना पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय एवं विधिक कार्रवाई की जाए।
6. टेलिंग डैम क्रमांक-01 से प्रभावित सभी परिवारों के लिए स्थायी, सुरक्षित एवं सम्मानजनक पुनर्वास की समयबद्ध योजना लागू की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी परिस्थितियाँ दोबारा उत्पन्न न हों।

रेमन मरकामी एवं रामनाथ नेगी ने जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन से आग्रह किया कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर कानून के शासन, प्रशासनिक आदेशों और न्यायिक प्रक्रिया की गरिमा को बनाए रखने हेतु आवश्यक कदम उठाए जाएँ। उन्होंने कहा कि विकास तभी सार्थक है जब वह संविधान, कानून और मानवीय गरिमा के अनुरूप हो।

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