मेंटेनेंस के नाम पर अघोषित बिजली कटौती, स्मार्ट मीटर से बढ़ते बिजली बिल और उपभोक्ता अधिकारों पर सवाल — बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा ने सरकार को दी चेतावनी

“जनता से पूरा बिल, लेकिन सेवा अधूरी; पारदर्शिता नहीं तो जवाबदेही तय होगी” — नवनीत चाँद
जगदलपुर।
बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा के मुख्य संयोजक एवं जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के बस्तर संभाग अध्यक्ष नवनीत चाँद ने बस्तर संभाग की लगातार बिगड़ती विद्युत व्यवस्था, मेंटेनेंस के नाम पर अघोषित बिजली कटौती, मेंटेनेंस के बाद भी लगातार ट्रिपिंग और बिजली गुल होने की घटनाओं, स्मार्ट मीटर के बाद बढ़ते बिजली बिलों तथा उपभोक्ता अधिकारों की अनदेखी को प्रदेश की जनता के साथ गंभीर अन्याय बताया है।
उन्होंने कहा कि आज बस्तर का आम उपभोक्ता दोहरी मार झेल रहा है। एक ओर समय पर बिजली बिल जमा करने के बावजूद घंटों बिजली कटौती, लो-वोल्टेज, बार-बार ट्रिपिंग और खराब विद्युत आपूर्ति का सामना करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर स्मार्ट मीटर लागू होने के बाद बड़ी संख्या में उपभोक्ता बिजली बिलों में अप्रत्याशित वृद्धि, बिलिंग की अपारदर्शिता, मीटर की शुद्धता, डेटा सुरक्षा तथा शिकायतों के निराकरण में कठिनाइयों की शिकायत कर रहे हैं।
नवनीत चाँद ने कहा कि यदि सरकार और विद्युत वितरण कंपनी बार-बार “मेंटेनेंस” के नाम पर जनता को बिजली से वंचित करती है, तो यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद मेंटेनेंस के बाद भी बिजली व्यवस्था क्यों नहीं सुधर रही है। यदि बार-बार फॉल्ट और कटौती जारी है, तो यह केवल तकनीकी समस्या नहीं बल्कि जवाबदेही का विषय है।
उन्होंने कहा कि तकनीक का उद्देश्य जनता को सुविधा देना है, न कि उसे अधिक बिल, अधिक असुविधा और अधिक आर्थिक बोझ देना। यदि स्मार्ट मीटर वास्तव में उपभोक्ता हित में हैं, तो सरकार स्वतंत्र तकनीकी ऑडिट, सार्वजनिक जनसुनवाई और बिलिंग प्रणाली की निष्पक्ष जांच कराने से क्यों हिचकिचा रही है?
नवनीत चाँद ने कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21, विद्युत अधिनियम, 2003, उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019, तथा प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत प्रत्येक उपभोक्ता को निष्पक्ष, पारदर्शी, उत्तरदायी और गुणवत्तापूर्ण सार्वजनिक सेवा प्राप्त करने का अधिकार प्रदान करते हैं। बिजली जैसी आवश्यक सेवा में पारदर्शिता, जवाबदेही और उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा करना सरकार और विद्युत वितरण कंपनी की कानूनी जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि जनता से बिना पर्याप्त संवाद और विश्वास कायम किए किसी भी व्यवस्था को लागू करना लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं माना जा सकता। इसलिए उपभोक्ताओं की शिकायतों का समाधान, पारदर्शी जानकारी और प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है।
बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा ने राज्य सरकार एवं विद्युत विभाग के समक्ष निम्न प्रमुख मांगें रखी हैं—
– बस्तर संभाग में लगाए गए सभी स्मार्ट मीटरों का स्वतंत्र तृतीय-पक्ष तकनीकी ऑडिट कराया जाए।
– स्मार्ट मीटर लागू होने के बाद बढ़े बिजली बिलों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए।
– प्रत्येक जिले में सार्वजनिक जनसुनवाई आयोजित कर उपभोक्ताओं की शिकायतें दर्ज कर उनका समयबद्ध निराकरण किया जाए।
– प्रत्येक उपभोक्ता को मीटर की Accuracy Test रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाए।
– स्मार्ट मीटर से संबंधित सभी अनुबंध, तकनीकी मानक, परीक्षण रिपोर्ट एवं बिलिंग प्रणाली को सार्वजनिक पोर्टल पर उपलब्ध कराया जाए।
– बार-बार होने वाली बिजली कटौती, ट्रिपिंग एवं मेंटेनेंस कार्यों की तकनीकी और प्रशासनिक जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
– मेंटेनेंस के नाम पर प्रस्तावित बिजली कटौती की पूर्व सूचना देना अनिवार्य किया जाए तथा कार्य पूर्ण होने के बाद भी होने वाले फॉल्ट की समीक्षा रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
– स्मार्ट मीटर संबंधी शिकायतों के लिए प्रत्येक जिले में विशेष हेल्पडेस्क एवं त्वरित शिकायत निवारण तंत्र स्थापित किया जाए।
– उपभोक्ताओं के लिए पोस्टपेड व्यवस्था तथा वैधानिक उपभोक्ता विकल्प (Opt-Out Policy) पर स्पष्ट नीति जारी की जाए।
नवनीत चाँद ने कहा कि यदि सरकार जनता की वास्तविक समस्याओं को नजरअंदाज करती रही और विद्युत व्यवस्था में पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित नहीं की गई, तो बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा पूरे बस्तर संभाग में व्यापक जनजागरण अभियान, हस्ताक्षर अभियान, जिला मुख्यालयों पर जनआंदोलन, सार्वजनिक जनसुनवाई की मांग, नियामक आयोग के समक्ष शिकायतें तथा आवश्यक होने पर न्यायालय में विधिक कार्यवाही सहित सभी लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक विकल्पों का उपयोग करेगा।
उन्होंने कहा कि “जनता समय पर बिजली बिल देती है, इसलिए सरकार और विद्युत विभाग भी समय पर गुणवत्तापूर्ण बिजली देने के लिए जवाबदेह हैं। जनता को अंधेरे में रखकर बिजली व्यवस्था नहीं चलाई जा सकती। बस्तर की जनता अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि पारदर्शिता, जवाबदेही और अपने अधिकारों का सम्मान चाहती है। यदि जनता की आवाज़ नहीं सुनी गई, तो यह मुद्दा गांव-गांव और शहर-शहर जनआंदोलन का रूप लेगा।”


