बस्तर की प्राकृतिक संपदा की रक्षा हेतु राजनीतिक इच्छाशक्ति, पारदर्शिता और कानून आधारित कार्रवाई आवश्यक : नवनीत चाँद

जगदलपुर, बस्तर।
बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा के मुख्य संयोजक एवं जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के बस्तर संभाग अध्यक्ष नवनीत चाँद ने कहा है कि बस्तर की जल, जंगल, जमीन और खनिज संपदा केवल संसाधन नहीं, बल्कि यहां की जनता के भविष्य, अधिकार और क्षेत्रीय विकास की आधारशिला है। इन संसाधनों की रक्षा के लिए केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति, संवैधानिक प्रतिबद्धता और कानून सम्मत प्रशासनिक कार्रवाई आवश्यक है।
श्री नवनीत ने कहा कि यदि शासन चाहे तो अवैध खनन, अवैध परिवहन, ओवरलोडिंग, रॉयल्टी चोरी, दस्तावेजी अनियमितता, वेब्रिज गड़बड़ी, निजी एवं शासकीय रेक पॉइंटों से संदिग्ध गतिविधियों पर तत्काल रोक लग सकती है। आवश्यकता केवल निष्पक्ष नीयत और सख्त अमल की है।
नवनीत चाँद ने कहा कि बस्तर अनुसूचित क्षेत्र है, इसलिए यहां संविधान की पाँचवीं अनुसूची, PESA कानून, वनाधिकार अधिनियम, MMDR Act, पर्यावरण संरक्षण कानून, मोटरयान अधिनियम तथा अन्य लागू प्रावधानों का पालन करना शासन-प्रशासन की बाध्यकारी जिम्मेदारी है। ग्रामसभा की सहमति, स्थानीय समुदाय की भागीदारी और पारदर्शिता के बिना किसी भी संसाधन उपयोग को जनहित नहीं कहा जा सकता।
उन्होंने शासन से मांग की कि बस्तर संभाग के सभी जिलों में खनिज परिवहन, रॉयल्टी रिकॉर्ड, चालान, ई-वे बिल, GPS रिकॉर्ड, वजन पर्ची, रेलवे साइडिंग, वेब्रिज, स्टॉक यार्ड एवं लोडिंग-अनलोडिंग केंद्रों की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए तथा दोषियों पर FIR, जब्ती, दंडात्मक कार्यवाही और लाइसेंस निरस्तीकरण जैसी सख्त कार्रवाई हो।
उन्होंने कहा कि वर्षों से यदि शिकायतें सामने आ रही हैं तो यह केवल प्रशासनिक कमजोरी नहीं, बल्कि राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी का संकेत है। अब समय आ गया है कि सरकार स्पष्ट करे—वह बस्तर की जनता के साथ है या संसाधनों की लूट करने वाले तंत्र के साथ।
नवनीत चाँद ने कहा कि बस्तर की संपदा का पहला अधिकार स्थानीय जनता, आदिवासी समाज, क्षेत्रीय विकास और पर्यावरण संतुलन का है। यदि समयबद्ध कार्रवाई नहीं हुई तो बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा एवं जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीकों से जनजागरण अभियान, ज्ञापन, धरना-प्रदर्शन और जनसंवाद कार्यक्रम चलाएंगे।
उन्होंने अंत में कहा कि बस्तर बिकाऊ नहीं है, बस्तर की संपदा पर पहला हक बस्तरवासियों का है और इसका उपयोग कानून, संविधान और जनहित के अनुरूप ही होना चाहिए। इस दौरान बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा एवं जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ जे के बस्तर जिला पदाधिकारी के रूप में मेहताब सिंह नीलांबर भद्रे बनमली बघेल संतु कश्यप शिव कश्यप निहारिका सिंह प्रिया यादव आकाश जॉन बलिराम बघेल कमल गुड्डू अलका नादान हिमांशु आनंद श्रीमती सरकार आदि पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित थे



