15.50 करोड़ रुपये के धान नुकसान की निष्पक्ष जांच हो, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो – नवनीत चाँद

जगदलपुर, बस्तर।
बस्तर जिले के धान खरीदी एवं भंडारण केंद्रों में धान के समय पर उठाव नहीं होने के कारण लगभग 15.50 करोड़ रुपये के आर्थिक नुकसान तथा हजारों क्विंटल धान में वजन कमी (शॉर्टेज) की खबर अत्यंत गंभीर एवं चिंताजनक है। यह केवल वित्तीय नुकसान का मामला नहीं, बल्कि किसानों की मेहनत, सार्वजनिक संसाधनों की सुरक्षा तथा प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा हुआ विषय है।
बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा के मुख्य संयोजक एवं जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) बस्तर संभाग अध्यक्ष नवनीत चाँद ने कहा कि यदि विभागीय नियमों के अनुसार खरीदी उपरांत 72 घंटे के भीतर धान का उठाव किया जाना अनिवार्य है, तो यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि आखिर किन परिस्थितियों में लाखों क्विंटल धान महीनों तक केंद्रों में पड़ा रहा और इस दौरान संबंधित विभागीय अधिकारियों द्वारा क्या निगरानी एवं कार्रवाई की गई।
उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक एवं जवाबदेह प्रशासन में केवल समिति कर्मचारियों अथवा निचले स्तर के कर्मचारियों पर संपूर्ण जिम्मेदारी डालकर मामले को समाप्त नहीं किया जा सकता। यदि करोड़ों रुपये के नुकसान की स्थिति उत्पन्न हुई है तो जिला स्तर से लेकर राज्य स्तर तक संपूर्ण प्रशासनिक श्रृंखला की भूमिका की जांच आवश्यक है।
भारत के संविधान का अनुच्छेद 38 राज्य को सामाजिक एवं आर्थिक न्याय सुनिश्चित करने का दायित्व सौंपता है, जबकि अनुच्छेद 39(ख) सार्वजनिक संसाधनों के उपयोग को जनहित में संचालित करने की अपेक्षा करता है। ऐसे में सार्वजनिक धन एवं किसानों की उपज को सुरक्षित रखना शासन एवं प्रशासन की संवैधानिक जिम्मेदारी है।
जनता के सामने खड़े प्रमुख प्रश्न
• जब नियम 72 घंटे में उठाव का प्रावधान करते हैं तो धान केंद्रों में लंबे समय तक क्यों पड़ा रहा?
• जिला विपणन अधिकारी, जिला प्रबंधक, सहायक पंजीयक, कलेक्टर तथा अन्य संबंधित अधिकारियों की भूमिका की समीक्षा क्यों नहीं हो रही?
• परिवहन एजेंसियों, मिलर्स एवं अनुबंधित संस्थाओं की जवाबदेही कब तय होगी?
• 15.50 करोड़ रुपये के नुकसान की भरपाई कौन करेगा?
• किसानों की उपज की सुरक्षा सुनिश्चित करने में हुई विफलता के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई की गई?
बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा की मांगें
1. पूरे मामले की उच्च स्तरीय स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए।
2. जिला स्तर से लेकर राज्य स्तर तक सभी जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
3. धान परिवहन, उठाव, भंडारण एवं निगरानी प्रक्रिया की विस्तृत जांच कराई जाए।
4. दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों, एजेंसियों एवं मिलर्स पर आर्थिक एवं विभागीय कार्रवाई की जाए।
5. जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए ताकि जनता को वास्तविक तथ्यों की जानकारी मिल सके।
6. भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने हेतु पारदर्शी निगरानी तंत्र स्थापित किया जाए।
नवनीत चाँद ने कहा कि यदि किसी छोटे कर्मचारी की त्रुटि पर तत्काल निलंबन और कार्रवाई संभव है, तो करोड़ों रुपये के नुकसान के मामलों में बड़े अधिकारियों एवं विभागीय प्रमुखों की जवाबदेही भी समान रूप से तय होनी चाहिए। लोकतंत्र में जवाबदेही केवल निचले स्तर तक सीमित नहीं हो सकती।
उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि किसानों, सहकारी संस्थाओं और जनता के हित में इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।



