बंगाल पहले चरण: रिकॉर्ड वोटिंग के बाद सियासी हलचल तेज, TMC-BJP में किसे मिलेगी बढ़त?

पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज यानी 23 अप्रैल 2026 को एक नया इतिहास रचा गया है. बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण में 152 सीटों के लिए हुए मतदान ने पिछले सभी रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं. चुनाव आयोग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, शाम 6 बजे तक ही आंकड़ा 91.35 प्रतिशत पार कर गया है. चूंकि कई मतदान केंद्रों पर शाम 6 बजे के बाद भी लंबी कतारें देखी गईं, इसलिए यह अनुमान लगाया जा रहा है कि फाइनल आंकड़ा 90-95 प्रतिशत तक पहुंच सकता है. बंगाल के चुनावी इतिहास में यह अब तक की सबसे भारी वोटिंग मानी जा रही है.

 

अगर साल 2021 से तुलना करें तो पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में कुल 82.29% मतदान हुआ था. उस समय भी भारी वोटिंग को सत्ता परिवर्तन की लहर माना गया था, लेकिन ममता बनर्जी ने प्रचंड बहुमत के साथ वापसी की थी. हालांकि, 2026 के पहले फेज में ही वोटिंग प्रतिशत का 90% के करीब पहुंच जाना यह संकेत देता है कि जनता के मन में किसी गहरी नाराजगी या बड़े बदलाव की छटपटाहट है. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि जब भी वोटिंग प्रतिशत इतना अधिक उछलता है, तो वह अक्सर प्रो-इंकम्बेंसी यानी सरकार के पक्ष में या एंटी-इंकम्बेंसी सरकार के खिलाफ की एक बड़ी लहर का संकेत होता है.

 

2021 का रिकॉर्ड टूटा, क्या बदलेगी सत्ता की हवा?

पहले चरण में जिन 152 सीटों पर वोटिंग है उसका 2021 का रिजल्ट बड़ा ही दिलचस्प रहा था. ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस ने 46.90 फीसदी वोट हासिल कर 92 सीटें जीती थी. वहीं बीजेपी ने 39.65 फीसदी वोटों के साथ 59 सीटें जीती थी. कांग्रेस ने 4.33 फीसदी वोट हासिल किए थे. वामदल को 3.26 फीसदी वोट मिले थे.

 

बंपर वोटिंग से कौन सबसे ज्यादा ‘बमबम’?

भारी मतदान के बाद दोनों ही खेमों में जीत के दावे तेज हो गए हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक रैली के दौरान कहा कि ‘बंपर वोटिंग इस बात का सबूत है कि बंगाल की जनता का ‘भय’ अब ‘भरोसे’ में बदल गया है.’ बीजेपी का मानना है कि साइलेंट वोटर और महिलाएं इस बार बड़ी संख्या में घर से बाहर निकली हैं, जो उनके पक्ष में जा सकता है.

 

ममता-मोदी में कौन किस पर ज्यादा भारी

वहीं, तृणमूल कांग्रेस का तर्क है कि उच्च मतदान उनके मजबूत संगठन और ममता बनर्जी की जन-कल्याणकारी योजनाओं जैसे लक्ष्मी भंडार के प्रति जनता के अटूट समर्थन को दर्शाता है. टीएमसी खेमे में उत्साह है कि भारी संख्या में ग्रामीण और अल्पसंख्यक मतदाताओं ने ‘बाहरी’ ताकतों को रोकने के लिए वोट किया है. फिलहाल, दोनों ही पार्टियां खुद को ‘बमबम’ बता रही हैं, लेकिन पर्दे के पीछे बेचैनी साफ देखी जा सकती है.

 

दूसरे फेज के लिए क्या है संदेश?

पहले चरण की ये 152 सीटें उत्तर बंगाल और दक्षिण बंगाल के कई महत्वपूर्ण जिलों में फैली हुई हैं. यह चरण इसलिए भी निर्णायक है क्योंकि यह राज्य की आधी से अधिक विधानसभा सीटों का मूड तय कर देता है. अगर पहले फेज में किसी एक पार्टी के पक्ष में स्पष्ट हवा दिखती है, तो इसका ‘डोमिनो इफेक्ट’ 29 अप्रैल को होने वाले दूसरे फेज की 142 सीटें पर भी पड़ेगा.

 

झारग्राम, मेदिनीपुर और बांकुरा जैसे इलाकों में हुई बंपर वोटिंग ने यह साफ कर दिया है कि बंगाल का चुनाव इस बार किसी एक मुद्दे पर नहीं, बल्कि अस्मिता और अस्तित्व की लड़ाई बन गया है. पीएम मोदी का झालमुड़ी फैक्टर वोटिंग में क्या बड़ा फैक्टर साबित हुआ है, यह तो नतीजे के बाद पता चलेंगे लेकिन बंगाल चुनाव में बंपर वोटिंग ने सारे पिछले रिकॉर्ड तोड़े. आज की वोटिंग ने यह तय कर दिया है कि बंगाल की जनता ने अपना फैसला पूरी ताकत के साथ ईवीएम में कैद कर दिया है. अब देखना यह है कि 4 मई को पीएम मोदी की ‘झालमुड़ी पॉलिटिक्स’ और भारी मतदान ममता बनर्जी के किले को बचा पाता है या बीजेपी के ‘सोनार बांग्ला’ के सपने को सच करता है.

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