खुद से कहना सीखें…. शाबाश.. यह जीवन विजय यात्रा है…और आप योद्धा हैं

खुद से कहना सीखें…. शाबाश..
यह जीवन विजय यात्रा है…और आप योद्धा हैं

धार..एक अभियान (नववर्ष पर सादर)/नवीन श्रीवास्तव,वरिष्ठ पत्रकार,लेखक जगदलपुर

नये साल के आगमन को लेकर..जश्न का शोर अभी थमा नहीं है अच्छा है..जीवन में उत्सव..जश्न का आयोजन जरूरी है..जश्न में थिरकन…हमारे अंदर मरे हुए उत्तकों..को झाड़ देता है..फिर जागे हुए उत्साह जब हौसला जब नसों में दौड़ता है तो अवसाद दुम दबाकर भागने में ही अपनी भलाई समझता है..फिर आप खड़ें हो जाये यह जीतने के मुहिम की शुरुवात है..खुद से कहें.. शाबाश..यह विजय यात्रा है..इरादों के प्रचंड शंखनाद को घुलने दो.घुलने दो..ताकि मुश्किल,मुसीबत,समस्याओ के कानों में दर्द होने लगे..इन्हे पराजित करना कोई मुश्किल नहीं..पर इस समाज में,व्यवस्था तंत्र में ..प्रेम के खिलाफ भरे पेट पर बड़े पेट वालों ने बाजार को खड़ा कर दिया है..पर..पर यह नहीं टिकेगा..पर पहले आइये इस ठिठुरन भरी सर्द ..जाड़े से सीखते हैं..यह हमें तोड़ता नहीं जोड़ता है यह हमें एक के बजाय दो होना सिखाता है..जाड़ा सिखाता है कि धरती में जीवन के लिए प्रेम की ऊष्मा जरूरी है..

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