पृथक बस्तर राज्य की मांग को लेकर बस्तर स्वराज संगठन का गठन
भीख नहीं हक चाहिए के नारे के साथ बस्तर स्वराज संगठन की शुरुआत

बस्तर के हक़, संसाधन और भविष्य पर निर्णायक संवाद — बैठक सम्पन्न
जगदलपुर। बस्तर संभाग में काफी लंबे समय से बस्तर को अलग राज्य बनाने की मांग को लेकर सोशल मीडिया में चर्चा और चौक चौराहों में काफी चर्चा हो रही है। लोग पृथक बस्तर राज्य विषय को लेकर जमकर चर्चा कर रहे है। लोगों का यह कहना है कि बस्तर में विकास की रफ्तार बहुत धीमी है अबतक मूलभूत सुविधाओं के लिए स्थानीय रहवासी तरस रहे हैं। इसलिए अब एक ही विकल्प है कि बस्तर अलग राज्य बने ताकि बस्तर तेज़ी से विकसित हो सके।
इसी विषय को लेकर शनिवार को स्थानीय शहीद पार्क में एक महत्वपूर्ण बैठक सम्पन्न हुई, जिसमें यह साफ़ संदेश दिया गया कि बस्तर अब अपनी अनदेखी, उपेक्षा और संसाधनों के लगातार शोषण को और स्वीकार नहीं करेगा।
उपस्थित सदस्यों ने सर्वसम्मति से संगठन का नाम बस्तर स्वराज संगठन रखा जिसकी रूपरेखा आगामी दिनों में तय की जाएगी।
बैठक के मुख्य, निर्णायक बिंदु —
1. संसाधन जा रहे हैं, लेकिन विकास नहीं आ रहा
बस्तर से प्रतिदिन बहुत बड़ी मात्रा में लौह अयस्क बाहर भेजा जाता है, जिसकी कीमत करोड़ों रुपये प्रतिदिन होती है।
लेकिन इसके बदले में—न उद्योग स्थापित हो रहे हैं, न स्थानीय युवाओं को नौकरी मिल रही है, न क्षेत्रीय बुनियादी ढाँचे में कोई बड़ा निवेश दिखता है।
“संसाधन बस्तर के, मुनाफ़ा बाहर — यह मॉडल अब स्वीकार नहीं।”
2. बेरोज़गारी चरम पर, पलायन बढ़ता जा रहा
स्थानीय युवाओं के लिए रोज़गार के अवसर बेहद कम हैं।
इस कारण हजारों युवा रोज़गार की तलाश में बस्तर छोड़ने को मजबूर हैं।
इतने संसाधनों वाले क्षेत्र में पलायन — एक बड़ी प्रशासनिक असफलता है।
3. योजनाएँ बनती हैं, लेकिन जमीन पर नहीं उतरतीं
बैठक में यह भी स्पष्ट हुआ कि बस्तर के जरूरतों और भूगोल के हिसाब से योजनाएँ नहीं बनतीं।
जो योजनाएँ आती हैं, वे या तो अधूरी रह जाती हैं या स्थानीय परिस्थिति के अनुरूप नहीं होतीं।
4. विशाल भौगोलिक क्षेत्र — पर कमजोर प्रशासनिक पहुँच
बस्तर का क्षेत्रफल कई राज्यों से बड़ा है, लेकिन प्रशासनिक पहुँच सीमित।
दूर-दराज़ गाँव आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं।
स्थानीय जरूरतों के हिसाब से अलग प्रशासनिक इकाई बनना अब समय की मांग है।
5. बस्तर की सांस्कृतिक एवं जनजातीय पहचान को सुरक्षा की आवश्यकता
जनजातीय समाज की संस्कृति, परंपरा और जीवनशैली पर बाहरी दबाव बढ़ रहा है।
बस्तर को ऐसी व्यवस्था चाहिए जो उसकी पहचान को समझे, सम्मान दे और संरक्षित रखे।
हमारा स्पष्ट संदेश:
“बस्तर के अधिकारों के लिए निर्णायक कदम उठाने का समय आ गया है।
बस्तर अब सिर्फ दर्शक नहीं रहेगा — अपनी दिशा खुद तय करेगा।”
बस्तरवासियों से अपील
बस्तर स्वराज संगठन सभी नागरिकों, युवाओं, महिलाओं, सामाजिक संस्थाओं और जनप्रतिनिधियों से अपील करता है कि बस्तर के भविष्य के लिए जागरूक बनें। अपने अधिकार की लड़ाई में आवाज़ उठाएँ। आंदोलन को मज़बूत बनाने में सक्रिय भूमिका निभाएँ।
उपस्थित सदस्यों ने स्पष्टरूप से कहा कि यह संघर्ष किसी के खिलाफ नहीं है बल्कि बस्तर की अस्मिता, अधिकार और स्वाभिमान के लिए एक गैरराजनैतिक आंदोलन है।
इस दौरान प्रमुखरूप से रोहित सिंह आर्य, प्रदीप गुहा, नरेंद्र भवानी, बिजली बैध, नीलम कुशवाहा, लखपाल सिंह, गणेश राव, मितेश पानीग्रही, रंगाधार बाघ, सूर्यपाल शर्मा। बाबला यादव, आदर्श चंद, संतोष श्रीवास्तव, कृष्णा नायक सहित अन्य उपस्थित रहे।
संगठन से जुड़ने के लिए जारी नंबर 9826928999, 8959405411, 7000043232 9406337842



