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न्यायिक सक्रियता जरूरी, लेकिन इसे ‘न्यायिक आतंकवाद’ नहीं बनने देना चाहिए-मुख्य न्यायाधीश

भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) बीआर गवई ने शुक्रवार को न्यायिक सक्रियता की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि न्यायिक सक्रियता जरूरी है, लेकिन इसे न्यायिक दुस्साहस या न्यायिक आतंकवाद में नहीं बदलना चाहिए। नागपुर जिला न्यायालय बार एसोसिएशन की तरफ से आयोजित सम्मान समारोह में बोलते हुए गवई ने कहा कि लोकतंत्र के तीनों स्तंभ विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका सभी की अपनी सीमाएं और अधिकार तय हैं। सभी को संविधान और कानून के अनुसार काम करना चाहिए।

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