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चांदनी चौक …चर्चा-ए-चौराहा- किसी के लिए शीशा है कि वह निखर जाए ।बेशर्म हो तो तुम्हारे लिए मैं आईने की तरह हूं

 

बेबाक …अनकही कहानी/नवीन श्रीवास्तव, वरिष्ठ पत्रकार

चर्चा-ए-चौराहा:चांदनी चौक जगदलपुर(9 जून 2025)चौराहों का शहर …जगदलपुर में इन दिनों पुराना बस स्टैंड कोतवाली के सामने स्थित व्यावसायिक परिसर में शराब दुकान खोले जाने के निर्णय को लेकर फिर..कश्मकश..अंतर्विरोध .सामने आ रहा है .. लोगों का कहना है कि यहां के निवासियों का जनजीवन यहां शराब दुकान से प्रभावित होगा यह सही भी है.. पर ..समूचा अपना शहर तो एक ही है ना… रहने वाले क्या एक ही नहीं है ..क्या शहर के बच्चे , बेटियां,महिलाएं , युवा,बुजुर्ग एक से नहीं हैं … नशा तो वैसे भी असहज ही है इसलिए इसके शिकार ज्यादातर वही बनते हैं जो सहजता के प्रतीक है ..बच्चे ,बेटियां ,महिलाएं बुजुर्ग ….फिर नशेमन शराब की दुकान यहां वहां जहां कहीं भी हो उसका साइड इफैक्ट खत्म तो नहीं होने वाला..वैसे शराब दुकानों की बात है तो इसे हटाने विरोध के स्वर उठते रहे हैं… सामाजिक , राजनीतिक विरोध के साथ शहर की जागरूक महिलाएं शहर में शराब दुकानों का विरोध करती रही है पर सवाल , मांग आज भी वही है जरा ..*चाँदनी चौक ..स्थित शराब दुकान को देखिए..शहर के बीचों बीच अपने एक तरफ जीवन और सेहद का संजीवनी बांटते जीवनदायी महारानी अस्पताल तो ठीक लगभग इतनी ही दूरी पर दूसरी तरफ शराब दुकान ..दोनों के बीच इंसानी अदूरदर्शिता के कारण विपरीत परिस्थितियों के बाद भी सहजता को जीने के मशक्कत में वर्षों से साधनारत मौन खड़ा* ..शहर का खूबसूरत चांदनी चौक.मानो कह रहा हो–

किसी के लिए शीशा है कि वह निखर जाए ।बेशर्म हो तो तुम्हारे लिए मैं आईने की तरह हूं।

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