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मुख्यमंत्री से मुलाकात से रोके जाने पर बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा एवं जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) ने उठाए गंभीर सवाल 

 

क्या सुशासन तिहार में जनता की आवाज सुनने की जगह केवल एकतरफा संवाद ही स्वीकार्य है

 

तोकापाल/चित्रकूट विधानसभा।

बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा एवं जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के मुख्य संयोजक एवं बस्तर संभाग अध्यक्ष नवनीत चाँद के निर्देशन में चित्रकूट विधानसभा इकाई के पदाधिकारी सुशासन तिहार के अवसर पर माननीय मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय से मुलाकात कर चित्रकूट विधानसभा क्षेत्र की जनसमस्याओं, संवैधानिक अधिकारों एवं विकास संबंधी मुद्दों पर विस्तृत ज्ञापन सौंपने पहुंचे थे।

 

संगठन का कहना है कि वे पूरी तरह शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से मुख्यमंत्री के समक्ष क्षेत्र की समस्याओं को रखना चाहते थे। न तो कोई प्रदर्शन प्रस्तावित था, न नारेबाजी और न ही किसी प्रकार की कानून-व्यवस्था प्रभावित करने वाली गतिविधि। इसके बावजूद पुलिस एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं का हवाला देते हुए संगठन के प्रतिनिधियों को मुख्यमंत्री से मुलाकात करने की अनुमति नहीं दी गई।

 

इसके बाद संगठन के पदाधिकारियों ने लोकतांत्रिक परंपराओं का सम्मान करते हुए अपना ज्ञापन तहसीलदार महोदय के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम सौंपा।

 

लोकतंत्र और सुशासन पर गंभीर प्रश्न

संगठन ने कहा कि भारतीय संविधान प्रत्येक नागरिक को अपनी बात शासन तक पहुँचाने, शिकायत दर्ज कराने और जनहित के मुद्दों को लोकतांत्रिक माध्यम से उठाने का अधिकार प्रदान करता है।

यदि जनता के बीच आयोजित किसी सरकारी कार्यक्रम में जनता के प्रतिनिधि और सामाजिक संगठन भी अपनी बात सीधे मुख्यमंत्री तक नहीं पहुँचा सकते, तो यह प्रश्न स्वाभाविक रूप से उठता है कि आखिर “सुशासन” की वास्तविक परिभाषा क्या है?

चित्रकूट विधानसभा इकाई का कहना है कि जिन मुद्दों को लेकर मुख्यमंत्री से चर्चा की जानी थी, उन्हें लेकर पूर्व में अनेक बार स्थानीय प्रशासन, विभागीय अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों एवं शासन के समक्ष ज्ञापन प्रस्तुत किए जा चुके हैं। लेकिन अधिकांश मामलों में या तो कार्रवाई नहीं हुई अथवा प्रकरण विभागीय प्रक्रियाओं में लंबित रह गए।

आज जब स्वयं राज्य के मुख्यमंत्री चित्रकूट विधानसभा क्षेत्र में उपस्थित थे, तब क्षेत्र की जनता को यह उम्मीद थी कि उन्हें अपनी समस्याओं को सीधे राज्य के सर्वोच्च निर्वाचित कार्यपालिका प्रमुख के समक्ष रखने का अवसर मिलेगा। दुर्भाग्यवश ऐसा नहीं हो सका।

 

संगठन ने उठाए ये प्रमुख मुद्दे

ज्ञापन में पेयजल संकट, अमृत जल योजना, शिक्षा व्यवस्था, वनाधिकार पट्टों का वितरण, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, स्वास्थ्य सेवाएं, आंगनबाड़ी व्यवस्था, किसानों की समस्याएं, सिंचाई सुविधाएं, राजस्व प्रकरणों का लंबित निराकरण, अवैध खनिज उत्खनन, सड़क निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, पंचायतों में मूलभूत सुविधाओं की स्थिति, सामाजिक सौहार्द, अनुसूचित क्षेत्रों में संवैधानिक अधिकारों के क्रियान्वयन तथा धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े विषय प्रमुख रूप से शामिल थे।

साथ ही ईसाई समाज से संबंधित कब्रिस्तान भूमि, धार्मिक स्वतंत्रता, सामाजिक भेदभाव एवं शिकायतों की निष्पक्ष जांच जैसे मुद्दों को भी ज्ञापन में शामिल किया गया

 

चित्रकूट विधानसभा अध्यक्ष कमल बघेल ने कहा—

«”हम मुख्यमंत्री जी के समक्ष क्षेत्र की वास्तविक समस्याओं को रखना चाहते थे। हमारा उद्देश्य केवल जनता की आवाज को शासन तक पहुँचाना था। यदि शांतिपूर्ण तरीके से ज्ञापन देने आए लोगों को भी मुख्यमंत्री से मिलने का अवसर नहीं मिलता, तो यह लोकतांत्रिक संवाद की भावना पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।”

 

ग्रामीण जिला महामंत्री संतु कश्यप ने कहा—

«”जनता की समस्याओं को शासन तक पहुँचाना किसी राजनीतिक दल या संगठन का विशेषाधिकार नहीं बल्कि लोकतांत्रिक अधिकार है। हम संविधान और कानून के दायरे में रहकर जनता के मुद्दे उठाते रहेंगे। सरकार और प्रशासन को जनता की बात सुनने की व्यवस्था मजबूत करनी चाहिए।”

 

बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा के मुख्य संयोजक एवं जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के बस्तर संभाग अध्यक्ष नवनीत चाँद ने कहा—

«”बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा और जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) जनता के अधिकारों, सामाजिक न्याय और विकास के मुद्दों पर लगातार संघर्ष करती रही है। यदि सरकार वास्तव में सुशासन की पक्षधर है, तो उसे जनता के सवालों से भी संवाद करना चाहिए। हम बस्तर, चित्रकूट विधानसभा और पूरे संभाग से जुड़े जनहित के मुद्दों पर जिम्मेदार सरकार, प्रशासन और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों से लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से सवाल पूछते रहेंगे और जनता की समस्याओं के समाधान के लिए संघर्ष जारी रखेंगे।”»

बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा एवं जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) स्पष्ट करती है कि उसका संघर्ष किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि जनहित, संवैधानिक अधिकारों, सामाजिक न्याय और क्षेत्रीय विकास के पक्ष में है। लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति जनता की आवाज में निहित है और उस आवाज को किसी भी परिस्थिति में दबाया नहीं जा सकता।

इस अवसर पर चित्रकूट विधानसभा अध्यक्ष कमल बघेल, लोहंडीगुड़ा युवा अध्यक्ष सूरज कश्यप, शिव कश्यप, सुकलु मांडवी, लक्ष्मण कश्यप, अनिल कश्यप, अनिल मांडवी, चैतु मौर्य, सूदु बूटलू कश्यप, कुंवर मांडवी, बोडा कश्यप, रामधार मांडवी, रामलाल कश्यप, गोपी कारटामी, मांझी मौर्य, भीमसिंग कश्यप, संदीप नाग, हेमंत सहित बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा एवं जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के अन्य पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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