बस्तर में बढ़ती लौह अयस्क तस्करी, अवैध वन कटाई और खनिज तंत्र पर उठे गंभीर सवाल

जगदलपुर।बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा के मुख्य संयोजक एवं जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के बस्तर संभाग अध्यक्ष नवनीत चाँद, संभागीय महामंत्री रामनाथ नेगी तथा दंतेवाड़ा जिला अध्यक्ष रेमन मरकामी ने संयुक्त प्रेस वक्तव्य जारी कर कहा कि बैलाडीला, बचेली, किरंदुल, पेंडवार, मिरतुर, गंगालूर, धुरली, नारायणपुर, ओरछा एवं अंतागढ़ क्षेत्र से अवैध लौह अयस्क उत्खनन, तस्करी, वन कटाई तथा वन क्षेत्रों में सड़क निर्माण से जुड़े समाचार लगातार सामने आ रहे हैं। हाल ही में वन विभाग द्वारा लौह अयस्क से भरे ट्रकों की जब्ती ने यह संकेत दिया है कि पूरे घटनाक्रम की समग्र, तकनीकी और स्वतंत्र जांच आवश्यक है।
नवनीत चाँद ने कहा कि यदि अलग-अलग क्षेत्रों में बार-बार एक जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं, तो यह केवल कानून-व्यवस्था का नहीं बल्कि खनिज प्रशासन, निगरानी व्यवस्था और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का गंभीर विषय है। ऐसे मामलों में केवल वाहन जब्त कर देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरे नेटवर्क, आर्थिक लाभार्थियों और प्रशासनिक जवाबदेही की भी जांच होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा एवं जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) पिछले कई महीनों से ज्ञापन, प्रेस वार्ता और प्रशासनिक प्रस्तुतियों के माध्यम से उच्च स्तरीय SIT गठन, विभागीय जवाबदेही, तकनीकी एवं वित्तीय ऑडिट तथा कठोर कार्रवाई की मांग लगातार करता रहा है, किंतु आज तक संभाग स्तरीय विशेष जांच दल का गठन नहीं किया गया।
उन्होंने कहा कि यदि जांच में राजस्व हानि, फर्जी दस्तावेज, ट्रांजिट पास, वेब्रिज, रेलवे डिस्पैच, रॉयल्टी, मनी ट्रेल अथवा आर्थिक अपराध के तथ्य सामने आते हैं, तो प्रकरण की जांच CBI, ED अथवा अन्य सक्षम केंद्रीय एजेंसियों से कराई जानी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि एनएमडीसी अथवा किसी अन्य सार्वजनिक या निजी संस्था से संबंधित किसी प्रकरण में पहले से विभागीय जांच या कार्रवाई चल रही है, तो उन तथ्यों को भी समग्र जांच के दायरे में शामिल किया जाए, ताकि संपूर्ण सत्य जनता के सामने आ सके।
नवनीत चाँद ने कहा कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय, विभिन्न उच्च न्यायालयों के अवैध खनन संबंधी दिशा-निर्देशों तथा छत्तीसगढ़ विधानसभा में उठे प्रश्नों के अनुरूप पूरे प्रकरण की समीक्षा कर यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि कानूनों एवं न्यायालयीय निर्देशों का पालन किस स्तर तक हुआ है।
उन्होंने कहा कि नक्सल प्रभाव कम होने के बाद यदि खनिज तस्करी और प्राकृतिक संसाधनों के अवैध दोहन के मामलों में वृद्धि हो रही है, तो सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि रोकथाम के लिए अब तक कौन-सी प्रभावी संस्थागत व्यवस्था विकसित की गई है। बस्तर की प्राकृतिक संपदा संविधान की भावना के अनुरूप बस्तर की जनता की धरोहर है और इसकी सुरक्षा राज्य की सर्वोच्च जिम्मेदारी है।
मुख्य मांगें
बस्तर संभाग के लिए तत्काल उच्च स्तरीय SIT का गठन।
पिछले 10 वर्षों के उत्पादन, डिस्पैच, स्टॉक, रॉयल्टी, ट्रांजिट पास, रेलवे रैक, वेब्रिज एवं परिवहन रिकॉर्ड का फोरेंसिक ऑडिट।
वन, खनिज, राजस्व, पुलिस, परिवहन, रेलवे एवं अन्य संबंधित विभागों की भूमिका की स्वतंत्र जांच।
नारायणपुर, अंतागढ़ एवं अन्य क्षेत्रों में प्रकाशित मीडिया रिपोर्टों के आधार पर अवैध वन कटाई एवं सड़क निर्माण की स्वतंत्र जांच।
आर्थिक लाभार्थियों एवं मनी ट्रेल की जांच; आवश्यकता होने पर PMLA सहित प्रासंगिक कानूनों के तहत कार्रवाई।
संभावित राजस्व हानि का वैज्ञानिक आकलन कर रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
न्यायालयीय निर्देशों एवं विधानसभा में उठे प्रश्नों के अनुपालन की समीक्षा रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
दोष सिद्ध होने पर संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों, परिवहनकर्ताओं एवं अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों पर कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाए।
स्पष्ट चेतावनी
बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा एवं जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) ने कहा कि यदि सरकार शीघ्र SIT गठित कर निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच प्रारंभ नहीं करती, तो संगठन संविधान और कानून के दायरे में व्यापक लोकतांत्रिक जनआंदोलन चलाने के साथ इस पूरे प्रकरण को राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर तक ले जाएगा।
नवनीत चाँद का वक्तव्य
> “बस्तर की खनिज संपदा किसी माफिया, दलाल या प्रभावशाली नेटवर्क की नहीं, बल्कि बस्तर की जनता की धरोहर है। हमारी मांग किसी व्यक्ति विशेष के विरुद्ध नहीं, बल्कि पूरे तंत्र की निष्पक्ष, वैज्ञानिक और जवाबदेह जांच की है। यदि सरकार पारदर्शी जांच कराती है तो सत्य स्वयं सामने आ जाएगा।”



