यह अंधेरा घना छा रहा… मन का विश्वास घबरा रहा…

गांव में बिजली गुल तो अंधेरे में डूब जाता है अस्पताल नहीं है कोई बैकअप व्यवस्था
जगदलपुर। नानगुर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र .. और अंधेरे में डूबे अस्पताल की यह t तस्वीर महज यह बताने का प्रयास है मौजूदा समस्या को समझा जा सके विचार करें कि अंधेरा घुप है ऐसे में स्टाफ नर्स के कमरे में के नाम में केवल एक नर्स बैठी है मोबाइल के टार्च की रोशनी में . अकेली .. ड्यूटी है ..दूसरा कोई नहीं ना डॉक्टर ना कोई दूसरा स्टाफ या फिर फोर्थ क्लास आप कल्पना करें ऐसे में अगर इस अस्पताल में गंभीर मरीज आता है तो ..तो सारा दारोमदार ड्यूटी पर तैनात स्टाफ नर्स की..जो विपरीत परिस्थितियों में डटी ड्युटी कर रही है .. विचार करें यह विकास की कैसी तस्वीर है और यह कितना न्यायपूर्ण व्यवस्था की तस्वीर है..या फिर यह सब डरा देने वाला है ?
एक तरफ वर्तमान सरकार प्रदेश के साथ बस्तर की तस्वीर बदलने लगी है और इसका असर भी दिख रहा है परंतु अभी भी कुछ भी ऐसे जगह है और समस्याएं है और ऐसी तस्वीर सामने आती है कि जिनका जमीनी स्तर पर निदान किया जाना जरूरी हो जाता है ।
भले ही उपरोक्त तस्वीर रोज की ना हो ..पर सूत्रों की माने तो अवकाश के दिन और रात में उपरोक्त तरह की परिस्थितिया अक्सर बनती है ..जब बिना चिकित्सक या अन्य किसी के स्टाफ के स्टाफ नर्स ड्यूटी पर अकेली होती है ..पर गंभीर यह है कि एक दिन,रात हो..दो .. तीन दिन..ऐसी स्थितियां बनती ही क्यों है? वहीं ग्रामीणों व सूत्रों का कहना है कि आए दिन नानगुर में बिजली आपूर्ति ठप्प होने से अस्पताल अंधेरे से घिर जाता है .. बैकअप व्यवस्था नहीं होने के चलते मौजूदा स्टाफ को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है ग्रामीण व सूत्रों की माने तो यहां अस्पताल में बिजली गुल होने के स्थिति में अस्पताल में रोशनी की एक बैकअप व्यवस्था की आवश्यकता के साथ सभी शिफ्टों में स्टाफ नर्स के साथ चिकित्सक एवं जरूरी अन्य स्टाफ की जरूरी है ।
बहरहाल अब देखना है कि आने वाले दिनों में अस्पताल में उक्त समस्याओं का कितना और कब निकलता है संभव है सुशासन की चलती बयार नानगुर के इस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के लिए भी जीवनदायिनी साबित हो और ऐसे समस्याओं का हल निकल आए ।



